हाईकोर्ट ने करोड़ों रुपए के जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े मामले में राज्य सरकार व एसीबी से पूछा है कि उन्होंने प्रार्थी पीएचईडी के चीफ इंजीनियर आरके मीना व एडि.चीफ इंजीनियर आरसी मीना के खिलाफ प्राथमिकी जांच से पहले सक्षम प्राधिकारी से इसकी अनुमति ली थी या नहीं ली।
वहीं अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह प्रार्थियों से जुड़े मामले में केस डायरी को मौजूदा तथ्यात्मक रिपोर्ट सहित पेश करे। अदालत ने सुनवाई आगामी सप्ताह में तय की है। जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने यह निर्देश आरके मीना व अन्य की आपराधिक विविध याचिका पर दिया।
मामले से जुड़े अधिवक्ता दीपक चौहान ने अदालत को बताया कि एसीबी ने 30 अक्टूबर 2024 को जल जीवन मिशन घोटाले से जुड़े मामले में प्रार्थियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। लेकिन एसीबी ने प्रार्थियों के खिलाफ प्राथमिकी जांच से पहले सक्षम प्राधिकारी से अनुमति नहीं ली। एसीबी ने प्राथमिकी जांच 18 जनवरी 2024 से शुरू की, लेकिन इसकी अनुमति बाद में 4 जुलाई व 26 सितंबर 2024 को ली है। जबकि पीसी एक्ट की धारा 17 ए के तहत प्राथमिकी जांच से पहले अनुमति लेना जरूरी है। ऐसे में एसीबी की पूरी कार्रवाई ही दूषित है।
वहीं जिन तथ्यों पर ये एफआईआर दर्ज हुई हैं उन समान तथ्यों पर एसीबी पहले ही तीन एफआईआर दर्ज कर चुकी है। प्रार्थियों के खिलाफ लगाए आरोप साबित नहीं हो रहे हैं। जिन सर्टिफिकेट के आधार पर अन्य आरोपियों को टेंडर मिले थे उनसे भी प्रार्थियों का कोई भी लेना-देना नहीं है और ना ही वे टेंडर जारी करने के लिए अधिकृत थे। जो भी काम दिया उन्होंने नियमानुसार किया और कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन नहीं किया है।






