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संगठन चुनाव में किन तीन कारणों से पिछड़ी BJP:पार्टी की शर्तों के अनुसार कैंडिडेट खोजना चुनौती से कम नहीं, आम सहमति बनाने में भी देरी

आखिरकार BJP ने अजमेर सहित 5 जिलों में जिलाध्यक्षों की घोषणा कर दी है। अभी भी बीजेपी को 39 जिलाध्यक्षों को चुनना बाकी है। इसके लिए प्रदेश बीजेपी ने 31 जनवरी तक की मोहलत दी है। इसके बाद प्रदेशाध्यक्ष की घोषणा होगी। फिलहाल राजस्थान बीजेपी तय कार्यक्रम से करीब एक महीने पीछे चल रही है। बीजेपी को 30 दिसम्बर 24 तक जिलाध्यक्षों के नामों की घोषणा करनी थी। इसके बाद 15 जनवरी तक प्रदेशाध्यक्ष का निर्वाचन होना था।

अभी तक बीजेपी पूरे मंडल अध्यक्षों का भी निर्वाचन नहीं कर सकी है। प्रदेश बीजेपी के संगठन चुनाव में पिछड़ने के तीन प्रमुख कारण रहे।

1. केन्द्रीय नेतृत्व की कड़ी शर्तें इस बार बीजेपी के केन्द्रीय नेतृत्व ने संगठन चुनावों को महज औपचारिकता न रखकर पूरी प्रक्रिया अपनाते हुए कराने का निर्णय लिया। केन्द्रीय नेतृत्व चाहता था कि चुनाव पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता से हो। ऐसे में केन्द्रीय नेतृत्व ने मंडल अध्यक्ष और जिलाध्यक्ष के पद पर निर्वाचित होने वाले नेता के लिए कड़ी शर्तें लगा दी। इन शर्तों में प्रत्याशी की उम्र तय होने से लेकर उसकी योग्यता के कई मापदंड तय कर दिए गए। ऐसे में पार्टी के लिए इन शर्तों पर खरे उतरने वाले प्रत्याशियों को खोजना एक चुनौती बन गई।

2. सर्वसम्मति से चुनाव कराने का टास्क बीजेपी ने इन संगठन चुनावों को संगठन पर्व का नाम दिया है। इसका मतलब है कि प्रदेश के 52,163 बूथ, 1135 मंडल और 44 जिलाध्यक्षों के चुनाव सर्वसम्मति से कराए जा रहे हैं। कई जगह सर्वसम्मति बनाने में समय लग गया। कई जगह एक से अधिक प्रत्याशियों के चुनाव में खड़े होने की वजह से उन्हें समझाकर सर्वसम्मति बनाई गई। वोटिंग की नौबत नहीं आए। इसके साथ ही प्रत्येक पदाधिकारी का प्रदेश स्तर पर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करके रखने में भी काफी समय लगा।

3. आम सहमति बनाने में देरी इन संगठन चुनावों में जिला निर्वाचन अधिकारी के लिए हर पद पर तीन-तीन नामों का पैनल बनाना जरूरी किया गया था। पैनल स्थानीय विधायक, पूर्व विधायक, जिला पदाधिकारी, पूर्व पदाधिकारी, जिले के प्रमुख नेताओं की सहमति से ही तय करना था।

ऐसे में कई जिलों में तीन से ज्यादा नाम भी जिला निर्वाचन अधिकारी को मिले। कौन से तीन नाम पैनल में शामिल करने हैं। उस पर आम सहमति बनाने में भी देरी हुई। इन तीन नामों में से एक नाम समन्वय समिति को प्रदेश स्तर पर तय करना है। ऐसे में जो शेष दो नाम रिजेक्ट होते है। वे बगावत नहीं कर दे। उसे भी चुनाव टीम को मैनेज करना पड़ रहा है। जिलाध्यक्षों के निर्वाचन में इन तीन नामों में से एक नाम फाइनल करने में सबसे ज्यादा समय लग रहा है।

शिकायत पर कार्रवाई चुनाव में जो नियम व शर्तें लगाई गई हैं, उसके परीक्षण के लिए प्रदेश स्तर पर एक अपील समिति भी बनाई गई है। घनश्याम तिवाड़ी ने बताया- समिति ने 5 मंडल अध्यक्षों का निर्वाचन निरस्त कर दिया। 16 मंडल अध्यक्षों के चुनाव पर अंतरिम रोक भी लगा दी। कई मंडल अध्यक्षों ने अपनी उम्र से संबंधित गलत दस्तावेज पेश कर दिए। किसी के निर्वाचन में अनियमितताएं पाई गईं। इनके सत्यापन के बाद कार्रवाई की गई है। प्रदेश में चुनाव पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ हो रहे हैं।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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