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हत्यारे ने स्कूल-बस ड्राइवर को फोन कर कहा-बच्चे नहीं आएंगे:भाई-बहन को बाइक पर घर ले गया, फंदे से लटकाया; पार्टनरशिप तोड़ने से था नाराज

जोधपुर में पार्टनरशिप तोड़ने से नाराज बिजनेसमैन ने पार्टनर के 2 बच्चों की हत्या कर दी। पुलिस रविवार सुबह जब हत्यारे के मकान पर पहुंची तो ताला लगा था। टीम ताला तोड़कर अंदर गई तो एक कमरे में दोनों बच्चे फंदे पर लटके हुए थे।

पुलिस को मौके से एक नोट भी मिला है, जिसमें उसने सुसाइड की बात लिखी है। बच्चों की हत्या के बाद से आरोपी श्याम सिंह भाटी फरार है। पुलिस को अभी तक न तो श्याम सिंह भाटी की लाश मिली है और न ही उसके बारे में कुछ जानकारी मिल पाई है। पुलिस प्रारंभिक तौर पर मान रही है कि आरोपी ने सुसाइड नोट गुमराह करने के लिए लिखे हैं।

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि श्याम सिंह को पता था कि दोनों बच्चे रोजाना सुबह करीब 9 बजे स्कूल बस में बैठने के लिए घर से निकलते हैं। उसके पास बच्चों की स्कूल बस के ड्राइवर के नंबर भी थे।

श्याम सिंह ने शुक्रवार सुबह स्कूल बस के ड्राइवर को फोन कर बच्चों के नहीं आने की बात कही।रोजाना की तरह शुक्रवार सुबह भी दोनों बच्चे स्कूल बस में बैठने के लिए घर से निकले थे। गली के बाहर से श्याम सिंह दोनों को अपनी बाइक पर बैठाकर घर ले गया था।

तस्वीर, श्याम सिंह के मकान की है, जहां दोनों बच्चों को फंदे पर लटकाया गया था।
तस्वीर, श्याम सिंह के मकान की है, जहां दोनों बच्चों को फंदे पर लटकाया गया था।

पिता ने श्याम सिंह पर जताया था शक, मकान में लटके मिले शव ACP अनंत सिंह ने बताया- प्रदीप देवासी ने शनिवार शाम को अपनी बेटी तमन्ना उर्फ तन्नु (12) और बेटे शिवपाल (8) की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। उन्होंने श्याम सिंह पर शक जताया था। इस पर पुलिस शाम को ही श्याम सिंह के बोरानाडा थाने इलाके में जैन मंदिर के पास वाली गली में किराए के मकान पर पहुंची, जहां ताला लटक रहा था। इस पर पुलिस टीम लौट गई।

एसीपी ने बताया- रविवार सुबह पुलिस टीम दोबारा श्याम सिंह के घर पहुंची तब भी घर बंद था। ऐसे में पुलिस टीम ताला तोड़कर अंदर घुसी तो एक कमरे में दोनों बच्चों के शव फंदे पर लटके मिले। शवों के पास ही सुसाइड नोट भी रखा था। इसमें श्याम सिंह ने खुद के मरने की बात लिखी और आरोप लगाया था कि उसे व्यापार में धोखा मिला है, ऐसे में वह दोनों बच्चों को मार रहा है।

तस्वीर, 12 साल की तमन्ना और 8 साल के शिशुपाल की है। दोनों के शव स्कूल ड्रेस में मिले।
तस्वीर, 12 साल की तमन्ना और 8 साल के शिशुपाल की है। दोनों के शव स्कूल ड्रेस में मिले।

15 साल पहले हुई थी मुलाकात ACP ने बताया- श्याम सिंह मूल रूप से फलोदी के आदर्श नगर का रहने वाला है। वह पिछले 20 सालों से परिवार से अलग होकर जोधपुर के बोरानाडा इलाके में रह रहा था। वह अपने परिवार के संपर्क में भी नहीं था। यहां रहते हुए बोरानाडा की कई फैक्ट्रियों में काम कर चुका था।

करीब 15 साल पहले उसकी प्रदीप देवासी निवासी बिहार से जान-पहचान हुई थी। 9 महीने पहले श्याम सिंह ने प्रदीप को बोरानाडा में ही फैक्ट्री डालकर खुद का काम शुरू करने का प्रस्ताव दिया था। आरोपी पहले फैक्ट्रियों में मुनीम का काम कर चुका था।

बोला- कब तक मजदूरी करते रहोगे अनंत सिंह ने बताया- श्याम सिंह जानता था कि प्रदीप और उसकी पत्नी चूड़ियों के अच्छे कारीगर हैं। जनवरी 2024 में प्रदीप और उसकी पत्नी ने AD इंडस्ट्रीज कंपनी में नौकरी छोड़ दी थी। ऐसे में श्याम सिंह ने दोनों के सामने साथ बिजनेस करने का प्रस्ताव रखा था। उसने प्रदीप और उसकी पत्नी से कहा था कि कब तक ऐसे ही मजदूरी करोगे। बड़ा काम करो, खुद का बिजनेस शुरू करो।

ACP ने बताया- प्रदीप ने श्याम सिंह के साथ मिलकर चूड़ी की फैक्ट्री लगाई। इस फैक्ट्री में प्रदीप ही मुख्य कारीगर था। श्याम सिंह ने इसमें रुपए इन्वेस्ट किए थे। श्याम सिंह ने शुरू के कुछ महीनों तक प्रदीप और उसकी पत्नी को शेयर भी दिया। लेकिन, बाद में पेमेंट देना बंद कर दिया। पेमेंट नहीं मिलने से परेशान प्रदीप ने 2 जनवरी 2025 को श्याम के साथ पार्टनरशिप तोड़ दी और दोबारा AD इंडस्ट्रीज में काम शुरू कर दिया।

मां ने बच्चों के शव देखे तो बिलखने लगी। अपने होश खो बैठी।
मां ने बच्चों के शव देखे तो बिलखने लगी। अपने होश खो बैठी।

गुमराह करने के लिए लिखे सुसाइड नोट ACP अनंत सिंह ने बताया- 2 बच्चों के हत्यारे श्याम सिंह ने 2 सुसाइड नोट लिखे हैं। एक में बच्चों को मारने और दूसरे में व्यापार में नुकसान होने की बात लिखी है। प्रारंभिक जांच में ऐसा लग रहा है कि आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने के लिए सुसाइड नोट लिखे हैं।

उन्होंने कहा- पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी ने बच्चों को सीधे ही फंदे पर लटका दिया या फिर उन्हें पहले बेहोश किया था। पुलिस की प्रारंभिक जांच में दोनों के चेहरे या गले पर कोई निशान नहीं मिले हैं।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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