Home » राजस्थान » साइबर ठगों को किराए के खाते देता था इंजीनियरिंग स्टूडेंट:गिरोह में 11वीं और 12वीं के बच्चे भी शामिल, 6 महीने में 10 से ज्यादा मोबाइल बदले

साइबर ठगों को किराए के खाते देता था इंजीनियरिंग स्टूडेंट:गिरोह में 11वीं और 12वीं के बच्चे भी शामिल, 6 महीने में 10 से ज्यादा मोबाइल बदले

साइबर ठगों को किराए के खाते उपलब्ध करवाने वाले इंजीनियरिंग स्टूडेंट सहित चार युवकों को अजमेर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। बाकी तीन युवक 11वीं और 12वीं क्लास में पढ़ते हैं। चारों से 4 मोबाइल, 5 एटीएम, सिम कार्ड और एक स्विफ्ट कार बरामद की गई है। अब तक 23 बैंक खातों की जानकारी मिली है, जिसे इन्होंने ठगों को दिया था। चारों कार में घूम-घूमकर निचले तबके के लोगों को झांसे में लेते थे। उन्हें एक खाते के बदले 3 से 4 हजार रुपए देते थे।

नाकाबंदी में चारों को पकड़ा

एसपी वंदिता राणा ने बताया- 28 जनवरी को मुखबिर और पोर्टल से प्राप्त संदिग्ध नंबरों की सूचना साइबर थाने को मिली थी। सूचना मिलने पर पुलिस ने सिविल लाइन थाना इलाके के जयपुर रोड पर नाकाबंदी कर एक संदिग्ध कार को रुकवाया था। 4 युवकों से पूछताछ करने पर चारों युवकों ने कोई जवाब नहीं दिया।

इसके बाद टीम ने कार्रवाई करते हुए फायसागर रोड निवासी गौरी शंकर (25) पुत्र गोपाल, शानू उर्फ रोनी (26) पुत्र बलबंत, पृथ्वी सिंह (24) पुत्र शक्ति सिंह और पीलीखान निवासी पवन सिंह (25) पुत्र गोपाल को गिरफ्तार किया है। चारों आरोपियों का मास्टरमाइंड पृथ्वी है। पृथ्वी इंजीनियरिंग कर रहा था। इसके साथ गौरी और रोनी 12वीं व पवन 11वीं पास है।

अब तक 30 से ज्यादा खाते सामने आए

एसपी ने बताया- पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने कुल 30 खाते साइबर ठगों को देकर साइबर ठगी करना कबूल किया है। करीब 30 लाख रुपए आमजन से ठगने की बात सामने आई है। इसके अलावा आरोपियों की ओर से उपयोग में लिए गए बैंक खातों में लाखों रुपए गलत तरीके से हेराफेरी करना सामने आया है। गिरोह में कई लोग शामिल हैं, जिनमें से चार को गिरफ्तार कर लिया है। बाकी अन्य आरोपियों को चिन्हित किया जा चुका है, उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

3 से 5 हजार का लालच देकर अकाउंट खुलवाते थे

गिरोह एक चैन के रूप में काम करता है। यह सबसे निचले लोगों से 3 से 5 हजार के कमीशन का झांसा देकर बैंक अकाउंट मय लिंक सिम कार्ड लेता है। इसके बाद जो लोग चैन के बीच में है, वह लाखों रुपए के कमीशन पर आगे भेज देते हैं। जांच में सामने आया कि सेविंग, करंट, कोऑपरेटिव तीन टाइप के अलग-अलग बैंक अकाउंट है, जिनकी अलग-अलग लिमिट होती है। कुछ अकाउंट में लाखों-करोड़ों रुपए की ट्रांजेक्शन लिमिट होती है, जिन्हें फ्रॉड में इस्तेमाल किया जाता है। अभी तक 23 बैंक खातों की जानकारी मिली है। जिनमें से कई खाते साइबर ठगी में शामिल थे और वह बैंक खाते फ्रीज करवाए गए हैं।

6 महीने में 10 से ज्यादा मोबाइल बदले

आरोपियों से बैंक से संबंधित एटीएम कार्ड सहित अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं। यह सभी अलग-अलग सिटी और जिलों में जाकर बैंक जैसे एसबीआई, यूनियन बैंक, यूको बैंक, सिटीबैंक और अन्य बैंकों में अपने नाम पर भी कम से कम 5 से 6 बैंक खाता खुला चुके हैं। जिनका इस्तेमाल साइबर अपराध और गलत तरीके में किया गया है।

पूछताछ के दौरान यह भी पता चला कि इन लोगों ने पिछले 6 महीने से 10 से ज्यादा मोबाइल बदले हैं, जिनके खिलाफ साइबर शिकायत हुई है और उपयोग में लिए हुए सिम कार्ड के खिलाफ भी शिकायत दर्ज होना पाया है।

गिरफ्तार चारों आरोपियों के नाम से कम से कम पांच अकाउंट मिले हैं। बड़े पैमाने पर अलग-अलग शहरों में विभिन्न ब्रांचों में बैंक खाता खुलवाकर साइबर ठगों को देकर आमजन से ठगी की गई और लाखों रुपए हड़पे।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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