अलवर में 2 साल पहले मिली एक लावारिस बच्ची की ब्रेन टीबी से मौत हो गई। 10 फरवरी की शाम को बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे जयपुर के SMS अस्पताल रेफर किया गया था। लेकिन अगले दिन 11 फरवरी सुबह 6 बजे तक उसे अस्पताल में भर्ती नहीं कराया जा सका, जिसके चलते उसकी मौत हो गई।
मामले में चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया है कि जिस बच्ची का 2 साल तक कोई सुराग नहीं मिल सका, उसकी मौत के मात्र 48 घंटों के भीतर ही पुलिस उसके परिजनों को खोज निकालने में सफल रही।मृतक की पहचान प्रियंका (12 वर्ष) पुत्री कालीचरण के रूप में हुई है, जो हरियाणा के पलवल जिले के हथीन उड़ीथल गांव की निवासी थी।
बाल अधिकारिता विभाग का कहना है कि इस घटना के बारे में उन्हें बच्ची की मौत के बाद ही बताया गया। वहीं आरती बालिका गृह के संचालक ने कहा कि उन्हें कोरोना काल के बाद से अनुदान ही नहीं मिला है, जिस कारण बच्ची को जयपुर नहीं ले जा सके।

अब जानिए, बच्ची की मौत पर किसने क्या कहा…
मेडिकल जांच में निकला था ब्रेन टीबी आरती बालिका गृह के संचालक चेतराम सैनी ने बताया- प्रियंका 2 साल पहले अलवर शहर में मिली थी। उसके साथ परिजन नहीं थे और न ही कोई सामान था। तब से बालिका गृह में रह रही थी। 29 जनवरी 2025 को उसकी तबीयत खराब होने पर सैटेलाइट हॉस्पिटल कालाकुआं में दिखाया गया था।
अगले दिन 30 जनवरी को जांच कराई गई थी। उस रात बच्ची की तबीयत ज्यादा खराब हो गई। उसे शिशु हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। MRI कराने के बाद पता लगा कि उसे ब्रेन टीबी है। 5 दिन तक ICU में रखने के बाद सेहत में कुछ सुधार हुआ। इसके बाद सामान्य वार्ड में भर्ती कराया गया। 5 दिन बाद वापस तबीयत खराब होने पर आईसीयू में लेकर गए।
बालिका गृह संचालक बोले- अनुदान नहीं मिला आरती बालिका गृह के संचालक चेतराम सैनी ने कहा- बच्ची की तबीयत ज्यादा खराब होने पर शिशु हॉस्पिटल से वापस जिला हॉस्पिटल में वेंटिलेटर पर लिया गया। अलवर जिला हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने 10 फरवरी की शाम को बच्ची को जयपुर रेफर किया था। इस बारे में बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक रविकांत को बता दिया गया था लेकिन जयपुर ले जाने के इंतजाम नहीं किया गया।

CWC के अध्यक्ष बोले- जयपुर रेफर करने की सूचना मिली CWC के अध्यक्ष राजेश शर्मा ने कहा- 10 फरवरी को बच्ची को जयपुर रेफर करने की सूचना मिली थी। हमने तुरंत विभाग के सहायक निदेशक को अवगत करा दिया था। आगे इलाज कराने की जिम्मेदारी विभाग की थी। बालिका के परिजनों को नहीं ढूंढ़ने में भी विभाग की लापरवाही रही है। अब बालिका की मौत होने के बाद पुलिस परिजनों को लेकर आ गई।
विभाग के सहायक निदेशक बोले- कोई जानकारी नहीं मिली बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक रविकांत का कहना है- उन्हें मामले की जानकारी नहीं दी गई। न कोई मेल आया और न दूसरे तरीके से जानकारी दी गई। बालिका की मौत होने के बाद बताया गया। जबकि आरती बालिका गृह को जयपुर ले जाकर इलाज कराना चाहिए था।






