विधानसभा उपचुनाव के दौरान समरावता गांव में हुई हिंसा मामले में नरेश मीणा की जमानत याचिका आज हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। जस्टिस प्रवीर भटनागर की अदालत ने फैसला सुनाया। दो दिन पहले दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वकील डॉ. महेश शर्मा ने कहा था- स्थानीय गांव वाले तहसील मुख्यालय बदलने के लिए कई दिनों से आंदोलन कर रहे थे। उन्होंने मतदान का बहिष्कार भी किया था। इस दौरान एसडीएम उनसे जबरन वोट डलवा रहे थे।
इस बात को लेकर याचिकाकर्ता की एसडीएम से धक्का-मुक्की हो गई थी। पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया था। घटना के बाद जो भी आगजनी हुई, उसमें याचिकाकर्ता का कोई रोल नहीं है। याचिकाकर्ता उस समय पुलिस हिरासत में था।
इसका विरोध करते हुए एएजी राजेश चौधरी ने कहा था कि आरोपी ने लोगों को उपद्रव के लिए उकसाया था। पूर्व में पेश वीडियो से साबित है कि वह लोगों को उकसा रहा था। घटना में 27 पुलिसकर्मियों को चोट आई है और 42 वाहन जले हैं। ऐसे में मामले की गंभीरता को देखते हुए उसे जमानत नहीं दी जाए।
जमानत मिलने पर भी नहीं होती रिहाई नरेश मीणा को आज अगर इस मामले में जमानत मिल भी जाती तो उसकी जेल से रिहाई नहीं होती। क्योंकि नरेश मीणा एसडीएम को थप्पड़ मारने के मामले में भी गिरफ्तार है। इसकी याचिका पर भी हाईकोर्ट अलग से सुनवाई कर रहा है।
इसके अलावा हाईवे रोकने और ईवीएम से छेड़छाड़ करने के दो अन्य मामले भी पुलिस ने नरेश मीणा के खिलाफ दर्ज किए थे। इसमें पुलिस ने अभी तक नरेश मीणा को गिरफ्तार नहीं किया है।
उपचुनाव के दिन एसडीएम काे मारा था थप्पड़ दरअसल, देवली-उनियारा विधानसभा सीट पर उपचुनाव के दौरान समरावता (टोंक) गांव के लोगों ने वोटिंग का बहिष्कार किया गया था। निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठे थे। इसी दौरान नरेश मीणा ने अधिकारियों पर जबरन मतदान करवाने का आरोप लगाया था। नरेश मीणा पोलिंग बूथ पर आए और उन्होंने SDM अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था।
कई गाड़ियों में लगा दी थी आग एसडीएम को थप्पड़ मारने के बाद नरेश मीणा वापस जाकर धरने पर बैठ गए थे। इसके बाद प्रदर्शनकारियों की गाड़ी रोकने को लेकर विवाद हो गया था। पुलिस ने नरेश मीणा को हिरासत में ले लिया था। मीणा के समर्थकों को जैसे ही इसकी जानकारी मिली, वे और भड़क गए थे। सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारी आए और नरेश मीणा को पुलिस की हिरासत से छुड़ाकर ले गए थे। इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। ग्रामीणों पर भी पथराव का आरोप लगाया था। घटना के दौरान गांव में कई गाड़ियों में आग लगा दी गई थी।





