जयपुर की मुहाना मंडी में टमाटर, गोभी, मटर जैसी सब्जियों के दाम में भारी गिरावट आई है। मंडी में इतनी सब्जी आ रही है कि न तो किसानों को सही दाम मिल पा रहे हैं, न ही व्यापारी इन्हें आसानी से बेच पा रहे हैं।
देसी टमाटर थोक में 3 से 6 रुपए किलो मिल रहा है। जो बाजार में 10 से 15 रुपए किलो बिक रहा है। उसे खरीदने वाला कोई नहीं है। हालात ये है कि इन सब्जियों को फेंकना पड़ रहा है। बता दें कि नवंबर में देसी टमाटर की थोक कीमत करीब 65 रुपए किलो थी। जो बाजार में 80 से 100 रुपए तक बिक रहा था।
जयपुर फल एवं सब्जी थोक विक्रेता संघ मुहाना के अध्यक्ष योगेश तंवर ने बताया-
14 दिसंबर से मलमास शुरू होने के बाद से मंडी में भारी मात्रा में सब्जियां पहुंच रही हैं। मांग के मुकाबले ज्यादा सप्लाई होने से कीमतें लगातार गिर रही हैं। हमें उम्मीद थी कि मलमास के बाद सावे शुरू होंगे।

इसके बाद सब्जियों के दाम में तेजी आएगी। ऐसा नहीं हुआ। इसके विपरीत बाजार में सब्जियों की डिमांड कम और सप्लाई ज्यादा हो गई। इससे उम्मीद के अनुरूप भाव नहीं मिल पा रहा। मंडी में सब्जियां इतनी आ गई है कि इन्हें फेंकनी पड़ रही है।
पहले देखिए, मुहाना मंडी से जुड़ी 2 PHOTOS..


4 पॉइंट में जानिए मुहाना मंडी का हाल..
1.लहसुन के भाव 130 रुपए किलो पहुंचे योगेश तंवर ने बताया- नींबू को छोड़कर बाकी सभी सब्जियों के दाम गिर गए हैं, जिससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। यहां तक की 300 से 400 रूपए किलो तक बिकने वाला लहसुन भी 120 से 130 रूपए किलो के भाव पर बाजार में बिक रहा है। प्याज और आलू के भाव भी कम हुए हैं।
2. 40 साल में पहली बार ऐसी मंदी व्यापारी महेश कुमार ने बताया- 40 साल से मंडी में व्यापार कर रहा हूं, लेकिन ऐसी मंदी नहीं देखी। सब्जियों के दाम ही नहीं मिल रहे। हमारी कोशिश रहती है कि किसानों को कम से कम किराया तो मिले। बाजार से मांग ही नहीं हो रही है। ऐसे में हम उन्हें भाव क्या दें। स्थिति ये हो गई है कि प्लेटफार्म पर सब्जियां पड़ी हुई हैं। खरीददार नहीं है। सब्जियां खराब हो जाती है। ऐसे में गौशालाओं को भेजनी पड़ रही है।
3.किसानों का हाल बेहाल गुजरात के पालमपुर से आए किसान खालिद ने बताया- हम पिछले तीन महीने से मंदी का सामना कर रहे है। मैं लौकी, कद्दू लेकर आया था। लेकिन हमें लागत भाव भी नहीं मिल रहा। दो दिन से मंडी में सब्जियों के बिकने का इंतजार कर रहे हैं।

4.जनता तक नहीं पहुंच रहा फायदा मंडी में सब्जियां सस्ती होने के बावजूद इसका सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पा रहा है। बाजार में सब्जियों के रेट ज्यादा हैं, जबकि किसान घाटे में हैं। किसानों और व्यापारियों का कहना है कि सरकार सहकारी समितियों के माध्यम से सब्जियां खरीदे, जिससे किसानों को कम से कम लागत तो मिल सके।






