राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ फिर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष बन गए हैं। 7 महीने में दूसरी बार मदन राठौड़ को राजस्थान भाजपा की कमान सौंपी गई है। सीएम भजनलाल शर्मा, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे समेत तमाम नेताओं की मौजूदगी उनके नाम की घोषणा हुई। भाजपा प्रभारी मोहनदास अग्रवाल ने कहा- मुझसे 3 लोगों ने चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी।
चुनाव प्रभारी गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने राठौड़ के नाम का ऐलान किया। प्रदेशाध्यक्ष के साथ ही प्रदेश से 25 राष्ट्रीय परिषद सदस्यों का भी निर्वाचन हुआ, जो राष्ट्रीय अध्यक्ष की चुनाव प्रक्रिया में शामिल होंगे। इससे पहले शुक्रवार को प्रदेशाध्यक्ष पद के चुनाव के लिए मदन राठौड़ के अलावा किसी भी दूसरे नेता ने फॉर्म नहीं भरा था। उसके बाद से ही उनका फिर से अध्यक्ष बनना तय हो गया था।
25 राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों के नाम की घोषणा पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, डिप्टी सीएम दीया कुमारी, प्रेमचंद बैरवा, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी, अशोक परनामी, सतीश पूनिया, सीपी जोशी, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़, ओंकार सिंह लखावत, नारायण लाल पंचारिया, मंत्री मदन दिलावर, जोगाराम पटेल, सीआर चौधरी, अलका गुर्जर, प्रभुलाल सैनी, अनीता भदेल, रमेश यादव, जसवंत सिंह गुर्जर, कनकमल कटारा, रामकिशोर मीणा, अजय पाल सिंह, निर्मल कुमावत, प्रसनजीत मेहता, प्रताप लाल, ओमप्रकाश के नाम शामिल है।

मदन राठौड़ का प्रदेशाध्यक्ष बनना पहले से तय था मदन राठौड़ की पहली बार प्रदेशाध्यक्ष पद पर 26 जुलाई 2024 को नियुक्ति हुई थी। ऐसे में उन्हें इस पद पर करीब 7 महीने का समय ही हुआ था। प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल संगठन की बैठकों में इस बात के संकेत दे चुके थे कि प्रदेशाध्यक्ष के पद पर मदन राठौड़ ही निर्वाचित होंगे।

प्रभारी बोले- 3 लोगों ने राजस्थान में मेरे से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी
प्रदेश प्रभारी राधामोहन दस अग्रवाल ने कहा- 3 लोगों ने राजस्थान में मेरे से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी। मैंने उन्हें प्रदेश कार्यालय भेजा, लेकिन जब वे यहां आए तो बिना पर्चा भरे ही लौट गए। उन्होंने कहा कि राजस्थान में आपके लिए चुनौती भी है। क्योंकि प्रदेश में बीजेपी की सरकार है।
कभी-कभी ऐसा भी होता है, जब मुख्यमंत्री के पैर में पैर डालने से लगता है, सब कुछ काम हो गया, लेकिन ऐसा नहीं होता है। राजस्थान का हर नागरिक जब तक भाजपा का समर्थक और वोटर न बन जाए, तब तब संगठन का काम लगातार जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि आज भी विपक्ष में कुछ विधायक बचे हुए हैं। 11 कांग्रेसी सांसद हैं, लेकिन हमें राजस्थान में गुजरात जैसी स्थिति पैदा करनी है। 10 में से 5 निगम ही हमारे पास है। 10 नगर परिषद हमारे पास है, 21 नगर परिषद हमारे पास नहीं है। नगर पालिका में 49 हमारे हैं, जबकि 100 कांग्रेस के है। इसी तरह के हालत पंचायतों के भी है। इसमें सुधार करना ही हमारी चुनौती है।
नगर निकाय में हमें ऐसे लड़ाई लड़नी है, कि दिल्ली भी कहे राजस्थान में भजनलाल है। ये हमारी लड़ाई है। इतना मजबूत संगठन है। इतनी संख्या में कार्यकर्ता है। काम करने वाला मुख्यमंत्री है। मुख्यमंत्री को सपोर्ट करने वाली वसुंधरा राजे हैं। लोग कुर्सियों से हटते हैं तो उनका नाम खत्म हो जाता है। नाम लेने वाला नहीं होता। हम गर्व से कह सकते हैं। वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री नहीं हैं, लेकिन आज पूरे राजस्थान में आपकी लोकप्रियता है। आपने तय किया है, हम कदम से कदम मिलाकर भजनलाल शर्मा के हाथों को मजबूत करेंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि आज सर्वसम्मति के साथ मदन राठौड़ को प्रदेशाध्यक्ष चुना गया है, लेकिन इनका राजनीतिक जीवन उतार-चढ़ाव के साथ रहा है। हम तब भी आपके साथ थे, आज भी आपके साथ खड़े हैं। जो पार्टी के साथ चलता है, पार्टी उसे जरूर देखती है। इससे पहले जब आपने प्रदेशाध्यक्ष पद को संभाला था, तो मैंने पद, मद और कद पर कहा था।
राधा मोहन जी आप बेबाक बोलते हो, सबको अपनी जगह बता देते हो। डिप्लोमैसी के बिना सीधे सच बोल देते हो। आपने सत्ता और संगठन को बराबर रखा है। यही हमारी पार्टी की शक्ति है। राजे ने मदन राठौड़ से कहा कि आप जो भी टीम बनाए, वो काबिल,जिम्मेदार ओर पार्टी को साथ लेकर चलने वाली हो।
उन्होंने कहा कि गुजरात और राजस्थान की तुलना नहीं की जा सकती। राजस्थान एक अलग विचारधारा वाला राज्य है। जहां जनता काम करने वाले को मानती है। भैरोंसिंह शेखावत के बाद 120 और फिर 163 और अब फिर से राजस्थान की जनता ने एक बार फिर मुख्यमंत्री बनाने का मौका दिया है। राजे ने आखिर में एक जुट, नो गुट, एक मुख का नारा देकर अपने संबोधन को खत्म किया।







