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डोटासरा बोले- नेता प्रतिपक्ष जूली कहेंगे तो इस्तीफा दे दूंगा:स्पीकर देवनानी बड़े भाई की तरह, उनके घर जाकर खेद जताने को तैयार

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि हमारे सदन में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली अगर इस्तीफा देने को कहेंगे तो मैं इस्तीफा देने को तैयार हूं। विधानसभा का सदन राजस्थान के लोगों के मुद्दों के लिए है। इस हाउस का दुरुपयोग सत्ता पक्ष नहीं करे।

डोटासरा ने कहा- स्पीकर वासुदेव देवनानी बड़े भाई हैं, उन्हें किसी तरह का भ्रम हुआ है तो मैं उनके घर जाकर खेद प्रकट करने को तैयार हूं। वे और हम एक दूसरे के पारिवारिक आयोजनों, सुख-दुख में आते जाते रहे हैं। उनके प्रति मेरे मन में दुर्भावना होने का सवाल ही पैदा नहीं होता। उनके मन में कोई बात आई है तो उनके घर जाकर खेद प्रकट कर दूंगा।

पीसीसी चीफ ने कहा- मंत्री अविनाश गहलोत की इंदिरा गांधी पर टिप्पणी सदन के रिकॉर्ड में क्यों मौजूद है? डोटासरा ने विधानसभा में बने गतिरोध को लेकर बुधवार को कांग्रेस वॉर रूम में मीडिया से ये बातें कही।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा- मेरे मन में स्पीकर के प्रति भाव खराब होता तो क्या मैं इस तरह की बात कहता? फिर भी मैं कह रहा हूं अगर उनको किसी बात से कोई भ्रम हुआ है तो उनके घर जाकर खेद प्रकट कर लूंगा।

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मंत्री की टिप्पणी तो कार्यवाही से हटी नहीं और मेरे खिलाफ असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक काम करते हुए मेरी मर्यादा को तार-तार करना, मेरी इज्जत को मिट्टी में मिलाने जैसा काम करना, कहां तक उचित है? उन्होंने 10 विधायकों से बुलवाकर खुद ही व्यवस्था दे दी कि यह एमएलए बनने लायक ही नहीं है, यह लोकतंत्र है क्या?

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जिस बात के लिए मुझे सस्पेंड किया, उसके लिए देवनानी भी सस्पेंड हो चुके गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा- हमारे स्पीकर हैं जो कहते हैं यह सदन में आने लायक नहीं है। जिस बात के लिए मुझे निलंबित किया गया, वहां पर तो ये खुद ही आ चुके हैं। डायस पर आने के लिए उस समय के स्पीकर सीपी जोशी ने देवनानी को सस्पेंड किया था। उस समय के नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और इन्होंने तो खेद भी प्रकट नहीं किया था, मैं तो फिर भी खेद प्रकट कर चुका हूं।

वसुंधरा राजे और कैलाश मेघवाल के खिलाफ हमने क्या-क्या नारे नहीं लगाए डोटासरा ने कहा- यह बीजेपी और आरएसएस का असली चेहरा है कि इस तरह दुरुपयोग करो कि प्रतिपक्ष बोल नहीं पाए। इनके मंत्री जवाब देते नहीं है। मंत्री गीता पर हाथ रखकर कह दें कि स्पीकर के चैंबर में मेरे से व्यक्तिगत माफी की बात हुई थी क्या? संपूर्ण घटनाक्रम पर खेद प्रकट करने पर बात हुई थी। अब मेरे बारे में मेरी गैरमौजूदगी में कुछ भी कहते हैं। मैं चौथी बार विधायक बनकर आया हूं।

पीसीसी चीफ ने कहा- वसुंधरा राजे के समय मुझे बेस्ट एमएलए का अवॉर्ड दिया था। हम भी 9 दिन बाहर रहे थे, लेकिन कैलाश मेघवाल ने इस तरह की बातें मन में नहीं रखी। वैल में हमने वसुंधराजी के लिए पता नहीं क्या-क्या नारे लगाए? कैलाश मेघवाल के लिए लगाए हैं? उन्होंने हमें लोमड़ी और पता नहीं क्या-क्या बोला था, उसके बावजूद भी दूसरे दिन लड्डू खिलाते थे और मुद्दे की बात करने के लिए समय देते थे।

जूली बोले- सरकार नहीं चाहती सदन में मेरा भाषण हो नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा- मैंने मुख्यमंत्री को कहा था कि बुरा मत मानना, आप जब सरपंच थे उस समय नरेगा योजना थी ही नहीं फिर भी आपने सरपंचों के सम्मेलन में कह दिया। लगता है मुख्यमंत्री बुरा मान गए। उसके बाद तो जब भी मेरा सदन में भाषण देने का नंबर ही नहीं आ रहा है, उसके बाद मेरी स्पीच नहीं होने दे रहे। मेरा जब भी नंबर आता है मुख्यमंत्री गतिरोध पैदा कर देते हैं।

जूली ने कहा- पिछली बार राज्यपाल के अभिभाषण पर मेरे को बोलना था। फोन टैपिंग के किरोड़ी के आरोपों पर इन्होंने सदन में बयान नहीं दिया, इससे गतिरोध बना और मेरा भाषण नहीं हो पाया। जैसे ही मेरा टाइम निकल गया, अगले दिन आकर सर्वदलीय दिल्ली बैठक बुला ली और उसमें कह दिया कि मंत्री बयान दे देगा, वह बयान तो उसी दिन दिलवा देते।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा- अब बजट भाषण पर मेरी स्पीच है। सरकार के लोग नहीं चाहते हैं, बजट पर मेरी स्पीच हो। आप यह निकल जाने दो परसों ही आएंगे और समझौता करेंगे और सदन चलाएंगे ऐसा नहीं होना चाहिए। ये बड़ा मन रखते हुए गतिरोध खत्म करें, मेरा भी भाषण हो, वित्त मंत्री का रिप्लाई हो। अध्यक्ष को कोई बात बुरी लगी हो तो डोटासरा घर जाकर भी खेद प्रकट कर सकते हैं, मैंने खेद प्रकट कर दिया।

टीकाराम जूली ने कहा-

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आज भोले बाबा का दिन है, जिन्होंने जनता के लिए विष पीया था। राजस्थान की 8 करोड़ जनता के लिए इतना भी विष नहीं पी सकते कि सदन चले। ऐसा क्या अहम और घमंड हो गया।

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आज जो लोग पदों पर लोग बैठे हैं, उनको आगे बढ़कर इस गतिरोध खत्म करना चाहिए। उसके बारे में तो कोई सोच और विचार ही नहीं है। पता नहीं किस-किस प्रकार की टिप्पणी इनके मंत्री कर रहे हैं। वह चाहते ही नहीं कि गतिरोध दूर हो। सदन के नेता मुख्यमंत्री भजनलाल भले आदमी हैं, वो आगे आएं और स्पीकर से चर्चा करें। ऐसे गतिरोध वार्ता से टूट जाते हैं।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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