राजस्थान में सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत करने के लिए नई पहल की जा रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सोमवार को राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकल (RRR) और सर्कुलर इकोनॉमी फोरम को संबोधित करते हुए कहा- राज्य में कचरा प्रोसेसिंग की क्षमता 21 लाख मैट्रिक टन से बढ़ाकर 45 लाख मैट्रिक टन करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, ग्रीन बजट के तहत 27,854 करोड़ रुपए की परियोजनाएं लागू की जा रही हैं। इससे सतत विकास को गति मिलेगी। उन्होंने कहा- पुराने वाहनों के निष्पादन, आरडीएफ और जैविक उर्वरक के उपयोग, ई-वेस्ट के निस्तारण और ट्रीटेड वॉटर की नीति पर राज्य सरकार काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया- राजस्थान में सर्कुलर इकोनॉमी को सशक्त करने के लिए कई नई योजनाएं लागू की जा रही हैं। सरकार निजी क्षेत्र और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग को भी प्रोत्साहित करेगी, ताकि संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जा सके। 250 करोड़ रुपए की लागत से सर्कुलर इकोनॉमी पार्क और स्वच्छ और हरित केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। इसके अलावा, ग्रीन बजट में 27,854 करोड़ रुपए की ग्रीन परियोजनाएं शामिल हैं, जिससे पर्यावरण को संरक्षित रखते हुए विकास को गति दी जाएगी।

लैंडफिल साइट्स से 88 लाख क्यूबिक मीटर कचरे का निष्पादन
राजस्थान में लैंडफिल साइट्स से 88 लाख क्यूबिक मीटर कचरे का निष्पादन किया जा चुका है। 326 एकड़ भूमि को दोबारा उपयोग के लिए तैयार किया गया है। एमआरएफ प्लांट्स के जरिए प्लास्टिक और ई-वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था की जा रही है। वेस्ट टू एनर्जी योजना के तहत आरडीएफ (रिफ्यूज डेराइव्ड फ्यूल) और जैविक उर्वरक के उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके अलावा, पानी के पुनः उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए ट्रीटेड वॉटर नीति बनाई जा रही है।
सद्भावना केंद्रों से नागरिकों को पुनः उपयोग की सुविधा
मुख्यमंत्री ने बताया- मुख्यमंत्री सद्भावना केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को अनुपयोगी वस्तुओं को दान करने और पुन उपयोग की सुविधा दी जा रही है। इससे संसाधनों की बर्बादी कम होगी। जरूरतमंद लोगों को लाभ मिलेगा। राजस्थान में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने की दिशा में ये कदम महत्वपूर्ण साबित होंगे। सरकार ने इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और नीति निर्माण के लिए शहरों, उद्योगों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है।
मनोहर लाल खट्टर बोले- सर्कुलर इकोनॉमी आज की जरूरत, वेस्ट मेटेरियल का सही उपयोग जरूरी
केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा- वेस्ट के भंडार को रिसाइकल और रीयूज करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने राजस्थान सरकार की पहल की तारीफ करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य में अपशिष्ट प्रबंधन और सर्कुलर इकोनॉमी की दिशा में बेहतरीन कार्य हो रहा है।
प्रदर्शनी को बताया- सर्कुलर इकोनॉमी का उदाहरण
खट्टर ने फोरम में लगी वेस्ट मेटेरियल से बनी वस्तुओं की प्रदर्शनी को सर्कुलर इकोनॉमी का खूबसूरत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास अपशिष्ट को मूल्यवान संसाधन में बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने फोरम में मौजूद प्रतिनिधियों से अपील की कि वे रिसाइकलिंग और सस्टेनेबल प्रैक्टिस को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
स्वच्छ भारत मिशन को बताया बड़ी उपलब्धि
उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन को भारत की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अभियान की शुरुआत की, जिसके तहत अब तक 10 करोड़ नए शौचालय बनाए जा चुके हैं। यह मिशन न सिर्फ स्वच्छता की दिशा में बल्कि पर्यावरण संरक्षण और संसाधनों के सही उपयोग की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारत करेगा ग्लोबल अलायंस का प्रस्ताव
खट्टर ने कहा- भारत वैश्विक स्तर पर सर्कुलर इकोनॉमी को आगे बढ़ाने के लिए एक नया ग्लोबल अलायंस बनाने का प्रस्ताव रखेगा। उन्होंने कहा कि हाल ही में भारत ने G20 की सफल मेजबानी की, जिसका उद्देश्य ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को बढ़ावा देना था। इसी विजन को आगे बढ़ाते हुए भारत ‘सिटीज पॉल्यूशन स्कैन फॉर सर्कुलरिटी’ नामक नई पहल को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव देगा।
सस्टनेबिलिटी जीवन जीने का तरीका बने’
उन्होंने कहा- 3आर (रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकल) की शुरुआत करते हैं, जहां सस्टनेबिलिटी सिर्फ एक लक्ष्य न होकर जीवन जीने का तरीका बन जाए। खट्टर ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को अपशिष्ट प्रबंधन और संसाधनों के कुशल उपयोग के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करना चाहिए। उन्होंने कहा- इस फोरम के माध्यम से भारत और अन्य देशों के बीच ज्ञान और तकनीक का आदान-प्रदान होगा, जिससे सर्कुलर इकोनॉमी को और मजबूती मिलेगी।
जापान के पर्यावरण मंत्री ने 3R इकोनॉमी फोरम में साझेदारी को अहम बताया
जापान के पर्यावरण मंत्री केइइचिरो असाओ ने RRR इकोनॉमी फोरम में कहा- भारत के नेतृत्व में सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के प्रयास महत्वपूर्ण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस साझेदारी को सभी प्रतिभागियों का समर्थन मिलेगा। असाओ ने बताया कि सर्कुलर इकोनॉमी को मजबूत करने के लिए विभिन्न देशों के साथ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए सहयोग जरूरी है।
12वें RRR और सर्कुलर इकोनॉमी फोरम में 1000 से ज्यादा प्रतिनिधि शामिल
बता दें कि जयपुर में 12वें क्षेत्रीय RRR और सर्कुलर इकोनॉमी फोरम का आयोजन 3 से 5 मार्च तक किया जा रहा है। इसका उद्घाटन आज मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने किया। इस फोरम में एशिया-प्रशांत देशों के 1000 से अधिक प्रतिनिधि, जिनमें नीति निर्माता, उद्योग जगत के नेता, शिक्षाविद और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के विशेषज्ञ शामिल हैं। आयोजन का नेतृत्व आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के स्वच्छ भारत मिशन-शहरी द्वारा किया जा रहा है, जिसमें जापान के पर्यावरण मंत्रालय, यूएन ईएससीएपी, यूएनसीआरडी, यूएनडीएसडीजी और यूएनडीईएसए सहयोग कर रहे हैं।
फोरम में इंडिया पवेलियन, नीति और महापौरों का संवाद, तकनीकी क्षेत्र का दौरा, अंतरराष्ट्रीय 3आर व्यापार और प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी और ‘जयपुर घोषणा’ को अपनाने जैसे प्रमुख कार्यक्रम शामिल हैं। इस फोरम का उद्देश्य सर्कुलर इकोनॉमी को मुख्यधारा में लाना और सतत विकास लक्ष्यों (SDG) और कार्बन न्यूट्रलिटी को बढ़ावा देना है।
फोरम की मुख्य विशेषताएं
- इंडिया पैवेलियन: भारत में सर्कुलर इकोनॉमी के प्रयासों और उपलब्धियों का प्रदर्शन। इसमें 15 केंद्रीय मंत्रालयों और राष्ट्रीय कमिशनों की प्रदर्शनियां शामिल की गई है।
- नीति और महापौर संवाद: एशिया-प्रशांत क्षेत्र के शहरी नेताओं और नीति-निर्माताओं के साथ विशेष सत्र, जिसमें सर्वोत्तम प्रथाओं और इनोवेटिव अप्रोच पर चर्चा होगी।
- तकनीकी क्षेत्र का दौरा: प्रतिनिधि जयपुर में ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाओं और प्रमुख विरासत स्थलों का दौरा करेंगे।
- अंतरराष्ट्रीय RRR व्यापार और टेक्नोलॉजी प्रदर्शनी: 40 से अधिक भारतीय और जापानी कंपनियां और स्टार्टअप्स वेस्ट मैनेजमेंट और सर्कुलर इकोनॉमी के लिए नई तकनीकों का प्रदर्शन करेंगी।
- ज्ञान उत्पादों का शुभारंभ: राष्ट्रीय शहरी मामलों के संस्थान (NIUA) की ओर से 100 से अधिक सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं का संकलन और अन्य महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी की जाएंगी।
- ‘जयपुर डिक्लेरेशन’ को अपनाना: एशिया-प्रशांत देशों को सर्कुलर इकोनॉमी की ओर ले जाने के लिए 2025-34 की नीति रूपरेखा। यह हनोई डिक्लेरेशन (2013-23) पर आधारित होगी।
फोरम में 15 केंद्रीय मंत्रालयों, सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, 60 से अधिक शहरों, 40 से अधिक व्यवसायों और 120 से अधिक एक्सपर्ट स्पीकर्स की भागीदारी हो रही है।
यह भारत में दूसरी बार हो रहा है, इससे पहले 2018 में इंदौर में इसका आयोजन हुआ था। पिछला फोरम 2023 में कंबोडिया में हुआ था।






