विधानसभा में सोमवार को RLD विधायक सुभाष गर्ग के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश होने पर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया। सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग का तर्क था कि सुभाष गर्ग ने 24 फरवरी को विधानसभा में शून्यकाल के दौरान भरतपुर के लोहागढ़ में रहने वालों को नोटिस देने के मामले को उठाया।
गलत तथ्य देकर विधानसभा का समय जाया किया। यह विशेषाधिकारों का हनन है। इसकी आड़ में कुछ फायदा उठाने की साजिश हो सकती है। लोगों में डर पैदा किया।
कांग्रेस विधायकों ने सुभाष गर्ग के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाए जाने का कड़ा विरोध करते हुए सदन में जमकर हंगामा किया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि विधानसभा में उठाए गए मामलों के आधार पर इस तरह विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाया गया तो कोई विधायक अपने इलाके के मामले ही नहीं उठा पाएगा।
कल को आप मुकदमे दर्ज करवाना शुरू कर देंगे। यह विपक्ष का ही नहीं सत्ता पक्ष के विधायक भी ऐसे तो कोई मामला नहीं उठा सकेगा।
जूली ने कहा कि यह लोकतंत्र की हत्या जैसा है। कांग्रेस विधायक रोहित बोहरा, हरिमोहन शर्मा, उपनेता प्रतिपक्ष रामकेश मीणा ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की हत्या जैसा है।

प्रदेश में बिगड़ी कानून व्यवस्था को भी मुद्दा बनाएगा विपक्ष विधानसभा में आज (सोमवार) पुलिस और जेल से जुड़ी अनुदान मांगों पर बहस के दौरान विपक्ष के विधायक बिगड़ी हुई कानून व्यवस्था का मुद्दा उठाएंगे। इसके साथ ही मंत्री किरोड़ीलाल के फोन टैपिंग के आरोपों को लेकर भी सरकार को घेरेंगे। इसको लेकर हंगामे के आसार हैं। बीजेपी विधायक कांग्रेस राज के अपराध के आंकड़ों से तुलना करके जवाबी हमला करने की तैयारी में हैं। आम तौर पर विधानसभा में जब भी कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दे पर बहस होती है तो खूब आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता है। आज भी शून्यकाल के बाद अनुदान मांगों पर बहस के दौरान दिन भर सदन का माहौल गर्माएगा।
पिछली बार भी कांग्रेस विधायकों ने सदन में फोन टैपिंग के आरोपों पर सरकार से जवाब की मांग करते हुए हंगामा किया था। इस मुद्दे पर गतिरोध बन गया था। कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री के राज्यपाल के अभिभाषण पर हुई बहस के दौरान भी वैल में हंगामा किया था। नेता प्रतिपक्ष का भाषण भी नहीं हुआ था।






