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नर्सिंग-पैरामेडिकल में एडमिशन NEET के करवाने के विरोध मे स्टूडेंट्स:RUHS के बाहर प्रदर्शन कर बोले- 12वीं बोर्ड के एग्जाम शुरू होने हैं, नीट की तैयारी करने का समय नहीं

राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंसेज (RUHS) और जोधपुर की मारवाड़ मेडिकल यूनिवर्सिटी के एक नोटिफिकेशन से उन स्टूडेंट्स को झटका लगा है, जो नर्सिंग और पैरामेडिकल डिग्री कोर्स के लिए तैयारी कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अब इन कोर्स के लिए एडमिशन NEET के जरिए करने का फैसला किया है। NEET एग्जाम में मिलने वाले अंक के आधार पर की जानी वाली काउंसलिंग और मैरिट कम चॉइस के आधार पर कॉलेजों आवंटित किए जाएंगे। इसके विरोध में आज सैंकड़ों स्टूडेंट्स RUHS कॉलेज पहुंचे और वहां कार्यवाहक वीसी धनंजय अग्रवाल के विरोध में प्रदर्शन कर नारेबाजी की।

यूनिवर्सिटी के इस निर्णय का अब 12वीं का एग्जाम दे रहे स्टूडेंट्स या जो पास हो चुके हैं। नर्सिंग एडमिशन के लिए तैयारी कर रहे हैं। वह सोशल मीडिया के जरिए इस निर्णय का विरोध जता रहे हैं। स्टूडेंट्स का कहना है कि ये आदेश नीट के लिए फॉर्म भरने की आखिरी तारीख से 7 दिन पहले निकाला है।

इससे अब स्टूडेंट्स नीट के स्तर की तैयारी भी नहीं कर सकेंगे, क्योंकि 6 मार्च से 12वीं बोर्ड के एग्जाम शुरू होने हैं। NEET का एग्जाम होने के लिए भी अब केवल 2 माह का ही समय बचा है। ऐसे में इन बच्चों के पास NEET स्तर की तैयारी करने का समय नहीं है। इसलिए अब स्टूडेंट्स ने सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाकर इस नियम को अगले सत्र 2026-27 से लागू करने की मांग की है।

पहले यूनिवर्सिटी स्तर पर होता था एंट्रेस एग्जाम

इससे पहले यूनिवर्सिटी अपने स्तर पर बीएससी नर्सिंग कोर्स, पैरामेडिकल यूजी कोर्स और बैचलर ऑफ फिजियोथैरेपी कोर्स के लिए प्रवेश परीक्षा ली जाती थी। इस प्रवेश परीक्षा में मिलने वाले अंकों के आधार पर काउंसलिंग और मेरिट लिस्ट के आधार पर कॉलेजों का आवंटन किया जाता है।

RUHS से 250 से ज्यादा कॉलेज मान्यता प्राप्त

RUHS यूनिवर्सिटी से अटैच कॉलेज और मान्यता प्राप्त 250 से ज्यादा कॉलेजों (नर्सिंग, पैरामेडिकल और BPT) हैं, जिनमें ये नियम लागू किया है। इन कॉलेजों में नर्सिंग की 10 हजार 780, BPT के लिए 650 और पैरामेडिकल कोर्स के लिए 256 सीटे है।

80 हजार बच्चों को होगा फायदा

आरयूएचएस के कार्यवाहक वाइस चांसलर डॉ. धनंजय अग्रवाल ने बताया- ये निर्णय राज्य सरकार के स्तर पर मंजूर करवाकर यूनिवर्सिटी ने लिया है। इस निर्णय से उन 80 हजार से ज्यादा बच्चों को फायदा होगा जो NEET देने के बाद सलेक्ट नहीं होते थे और नर्सिंग के लिए वापस एंट्रेस एग्जाम देते थे। इससे न केवल बच्चों की एग्जाम फीस बचेगी, बल्कि बार-बार एग्जाम देने का तनाव भी कम होगा। वहीं यूनिवर्सिटी को भी इतने बड़े स्तर पर एंट्रेस एग्जाम करवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि इस तरह से एडमिशन लेने की प्रक्रिया देश में कुछ अन्य राज्य भी कर रहे है।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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