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राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र जारी, वासुदेव देवनानी ने आज विधायकों दी हिदायत, कहा-सदन में बैठे-बैठे ना बोले

जयपुर: राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र जारी है. विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने आज विधायकों हिदायत देते हुए कहा कि सदन में बैठे-बैठे ना बोले. यदि किसी सदस्य को लगता है उत्तर सही नहीं है, तो पुस्तक में उसके भी प्रावधान दिए हुए. प्रावधान के अंतर्गत आए मैं आपको आवश्यक समय दूंगा और चर्चा जरूरी हुई तो चर्चा भी करवाऊंगा. हर तरफ के अनुकूल उत्तर आए संभव नहीं है. यदि उत्तर गलत है तो मैं आपको सही उत्तर दिलाने का प्रयत्न करूंगा. सदन में जब हम भाषण करते हैं तो कोई किसी को टोके नहीं हमारी भाषा में शालीनता रहे. गणेश घोघरा की भाषा सही नहीं थी सही भाषा काम में ले. इसी दौरान कोई सदस्य खड़ा हुआ तो एक्शन लिया जाएगा. विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने नाराजगी जताते हुए कहा​ कि आसन पैरों पर है और आप खड़े कैसे हो रहे?  वासुदेव देवनानी ने सख्त हिदायत देते हुए कहा कि सत्ता पक्ष के संसदीय कार्य मंत्री पर भी नाराजगी जताई. नियम सभी पर लागू होंगे. आसन जब भी पैरों पर हो तो बाहर से कोई आकर न बैठे. आसन के बोलते वक्त कोई सीट पर बैठे नहीं ना ही प्रवेश करें. कोई सदस्य बोल रहा हो तो उनके सामने से कोई सदस्य ना गुजरे. सदन में फोन पर बात करना प्रतिबंधित है. नाम पुकारे जाने पर ही बोले वरना अवसर आने पर बोलते नहीं दिया जाएगा. संबंधित अधिकारी दीर्घा में रहे वरना एक्शन लिया जाएगा.

विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने कहा-मैंने सभी के विचार सुने:
विधानसभा सदस्य सुभाष गर्ग ने कहा कि प्रश्न था प्रशासन के द्वारा, प्रशासन में नगर निगम नहीं होता है. आर्कियोलॉजिकल डिपार्मेंट भी होता है. 36131 वर्ग मीटर जमीन जो की 5 से 7 लोगों के ग्रुप की थी. जिसका एक समझौता किया गया. उसे एग्रीमेंट की कॉपी है जरूरत पड़ेगी तो कॉपी भी दूंगा. उसको बेचने का सौदा हुआ जो 26000 वर्ग मीटर से ज्यादा की. 26 करोड़ की जमीन को 3 करोड़ 75 लाख में जो एग्रीमेंट किया. मैंने मामला उठाया तो वीडियो के माध्यम से सोशल मीडिया पर लोगों ने वीडियो जारी किया. हमें नोटिस देकर धमकाया जा रहा, जरूरत पड़ी तो मैं वीडियो भी उपलब्ध करवा दूंगा. नोटिस की जहां तक बात है तो वहां वर्षों से लोग रह रहे थे. उनमें से 22 लोगों को नोटिस दिए गए. कितने सालों बाद आखिर सड़क क्यों चौड़ी की जा रही? अतिक्रमण है तो गर्ल्स कॉलेज सरकारी भवन चल रहा है, तो फिर आर्कियोलॉजिकल डिपार्मेंट ने उन्हें परमिशन क्यों दे दी ? प्रशासन के लिए सरकारी विभाग और लोग बराबर है. इसमें बहुत बड़े-बड़े लोग इंवॉल्व है उनकी सब की कलई खुल जाएगी. विधानसभा अध्यक्ष देवनानी ने कहा-‘मैंने सभी के विचार सुने. प्रस्ताव को विशेष अधिकार समिति के पास भेजा गया.

सदस्य सुभाष गर्ग को भी बोलने का मौका दिया जाना चाहिए:
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा मिक सदस्य सुभाष गर्ग को भी बोलने का मौका दिया जाना चाहिए. इस तरीके के प्रश्न भी आते हैं स्थगन भी आते हैं. सरकार स्वतंत्र है जवाब देने के लिए. यदि किसी ने सवाल लगा भी दिया तो सरकार जवाब देकर उसे निरस्त कर सकती थी. 1 मिनट में ही खंडन हो जाता. इस प्रस्ताव की जांच कर निरस्त करने की कृपा करें.

आप हमारी आवाज को दबाना चाहते हो:
विधायक सुभाष गर्ग के समर्थन में कांग्रेस और भाजपा विरोध में आ गई. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि ऐसे तो कोई आवाज ही नहीं उठा पाएगा. आप हमारी आवाज को दबाना चाहते हो. हम कोई मामला नहीं उठा पाएंगे क्या ? अध्यक्ष जी हमें आपका संरक्षण चाहिए? इस तरीके की समस्याएं कई बार सदन में उठाई जाती रही. पहली बार सदन में नहीं उठाया गया है. हमे दबाने के लिए आप विशेष अधिकार हनन लेकर आए. अभी आप विशेष अधिकार हनन लेकर आए. अगली बार आप हमारे ऊपर मुकदमा दर्ज करेंगे यह कोई बात नहीं हुई.

हमारी सरकार बहुत संवेदनशील:
सुभाष गर्ग के मामले को लेकर मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने कहा कि गंभीर विषय पर प्रतिपक्ष का उद्वेलित होना स्वाभाविक था. मैं सरकार की तरफ से निवेदन करूंगा कि यह प्रस्ताव क्यों आया? हमारी सरकार बहुत संवेदनशील है. आपकी तरफ से जो भी बोला ठीक है. क्या हम अपनी गंभीरता को खुद ही कम कर रहे? इस प्रस्ताव को लाकर मैं यह संदेश देना चाहता हूं. कुछ भी लाने से पहले तथ्यों की जानकारी कर ले हवा में ना बोले. 24 फरवरी को मामला उठाया. उसी दिन सरकार एक्शन में आई. नगर निगम CEO ने उसी दिन प्रेस नोट जारी किया. एक भी व्यक्ति को नोटिस जारी नहीं किया गया. कौन लोग थे? जो जमीन की अफवाह फैलाकर जमीन सस्ते में लेना चाहते थे. राजकीय कन्या महाविद्यालय का नाम लिया जाना का भी कोई उद्देश्य था क्या? बहुत सोच समझ कर मैं सरकार की तरफ से प्रस्ताव लेकर लाया हूं. इस मामले को विशेष अधिकार समिति को सौंप कर पूरी जांच करनी चाहिए

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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