नाबालिग से रेप केस में आरोपी को गलत काम के लिए कैफे देने वाले दोनों आरोपियों की कोर्ट ने जमानत खारिज कर दी हैं। पोक्सो कोर्ट नम्बर-2 जयपुर महानगर कोर्ट ने यह दोनों कैफे संचालकों की जमानत याचिका को खारिज किया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया।
आरोपी दीपांशु शर्मा संचालक और बाबूलाल के कैफे महेश नगर एरिया में चल रहे थे। इनके खिलाफ बीएनएस की धारा 483 और पोक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद जमानत याचिका को अस्विकार कर दिया। इस मामले में राजस्थान सरकार की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक राकेश महर्षि ने प्रभावी रूप से दलीलें प्रस्तुत।
जज तिरुपति कुमार गुप्ता ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि जयपुर शहर में संचालित कैफे और रेस्टोरेंट में कोचिंग सेंटर में पढ़ने वाली नाबालिग बच्चियों के साथ गलत और अनैतिक कार्य किए जा रहे हैं।
कोर्ट ने कहा- जमानत दिए जाने से समाज में गलत संदेश जा सकता है
कैफे रेस्टोरेंट की आड़ में नाबालिग बच्चियों से गलत काम करवाए जा रही हैं। उन्होंने अपने निर्णय में कहा- ऐसे मामलों में जमानत दिए जाने से समाज में गलत संदेश जा सकता है। पीड़ित नाबालिग बच्चियों को न्याय मिलने में बाधा उत्पन्न हो सकती है। कैफे और रेस्टोरेंट में अनैतिक गतिविधियों को रोकने के लिए पीटा एक्ट के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके लिए जयपुर कलेक्टर को निर्देश दिए गए हैं कि यदि किसी भी कैफे या रेस्टोरेंट में नाबालिगों के साथ शारीरिक शोषण जैसी गतिविधियां पाई जाती है। वह तुरंत उन प्रतिष्ठानों को पीटा एक्ट के तहत बंद करवाएं। कुछ कैफे मालिक अपने कैबिन के लिए अनुचित शुल्क वसूल रहे हैं। जो कि केवल कॉफी या नाश्ते के लिए नहीं, बल्कि अन्य उद्देश्यों नाबालिक बच्चियों से छेड़खानी करने के लिए लिया जाता है।





