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डॉग ऑन रेंट:जलेबी, लड्डू, बर्फी, समोसा, कीवी, फीणी के नाम वाले डॉग्स के साथ लोग बिता पाएंगे क्वालिटी टाइम

जलेबी, लड्डू, बर्फी, समोसा, कीवी, फीणी, मिश्री, काजू ये नाम सुनते ही आपको किसी मिठाई की शॉप का ख्याल आएगा। लेकिन हम बात कर रहे हैं डॉग्स की, जिनके ये अनूठे नाम हैं। इन्हें आप रेंट पर ले सकेंगे। इसके लिए जयपुर में सर्विस लॉन्च हुई है। यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए शुरू की गई है, जो किसी वजह से घर पर पेट नहीं रख सकते, लेकिन डॉग्स के साथ समय बिताने की ख्वाहिश रखते हैं। यहां से आप कुछ घंटों के लिए डॉग रेंट पर ले सकेंगे।

डॉग का रेंट उनकी उम्र, ब्रीड, नेचर, साइज, वज़न के हिसाब से तय होगा। ये डॉग्स 499 से लेकर 999 रुपए प्रति घंटे के रेंट पर उपलब्ध हैं। इन डॉग्स को 1 से 6 घंटे तक रेंट पर ले सकेंगे। ये सभी थेरेपी डॉग्स एक से छह साल की उम्र के हैं और इतने ट्रेंड हैं कि ये आसानी से अजनबियों से घुल मिल जाते हैं। इस स्कीम से होने वाली आय भी इन्हीं डॉग्स के एडॉप्शन, रखरखाव में खर्च की जाएगी। इंटरनेशनल डॉग बाजार के वीरेन शर्मा ने यह सर्विस लॉन्च की है। वीरेन ने बताया कि रेंट पर मिलने वाले जितने भी डॉग्स हैं, वे सब अपने मालिकों द्वारा छोड़े हुए हैं। जापान, कोरिया और चाइना में यह ट्रेंड बहुत पॉपुलर है।

ये हैं डॉग के रेंट और ब्रीड

ब्रीड नाम उम्र रेंट

पग ठरकु 2, 499 रुपए

बीगल बटकु 3, 499 रुपए

जैक रसेल मिर्ची 2, 499 रुपए

पूडल जलेबी 2, 599 रुपए

हस्की लाडो 2, 699 रुपए

शेफर्ड समोसा 4, 499 रुपए

शिहत्ज़ु फीणी 1, 499 रुपए

मिक्स किशमिश 4, 799 रुपए

पहले लेनी होगी डॉग प्रोटेक्शन की शपथ

डॉग को रेंट पर ले जाने से पहले कुछ फॉर्मेलिटी पूरी करनी होगी। सबसे पहले उन्हें शपथ दिलाई जाएगी कि वे हमेशा डॉग्स की रक्षा करेंगे। उन्हें एक किट दी जाएगी, जिसमें डॉग फूड, डॉग की लीश और वैक्सीनेशन डिटेल्स होंगी। साथ ही सभी डॉग्स में माइक्रोचिप इंप्लांट किए हुए हैं, जिससे उनकी पहचान हो सके। इसके अलावा, उनके कॉलर में जीपीएस ट्रैकर भी लगाया जाएगा, जिससे उनकी लाइव लोकेशन मिलती रहे।

जब हम पेट्स के साथ कनेक्ट करते हैं, तो हमारे अंदर छुपे हुए इमोशन बाहर आने लगते हैं। साइकोलॉजिस्ट डॉ. अमिता श्रृंगी ने बताया कि उनके साथ समय बिताने और खेलने से “हैप्पी हार्मोन” रिलीज होते हैं, जो हमें मानसिक रूप से अच्छा महसूस कराते हैं। थैरेपी में भी डॉग थैरेपी और पेट थैरेपी की सलाह दी जाती है, खासकर उन लोगों के लिए जो खुद को व्यक्त नहीं कर पाते। रिसर्च और अनुभवों से यह भी देखा गया है कि जिन लोगों के घर में पेट्स होते हैं, वे आमतौर पर ज्यादा खुश रहते हैं।

नेशनल पेट डे – जापान, कोरिया और चाइना की तरह घंटों के हिसाब से ले सकेंगे डॉग को रेंट पर, जयपुर में सर्विस लॉन्च

रेंट पर मिलने वाले डॉग्स को दी ट्रेनिंग

रेंट पर मिलने वाले जितने भी डॉग्स हैं वे सब मालिकों द्वारा छोड़े गए हैं, जो अब आईडीबी के वीरेन के साथ परिवार की तरह रहते हैं। इनको बिहेवियरल स्पेशलाइजेशन की ट्रेनिंग दी गई है।

पेट्स के साथ समय बिताने से “हैप्पी हार्मोन’ रिलीज होते हैं

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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