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राजस्थान में खराब एम्बुलेंस के मामला, 19 CMHO को नोटिस:राजस्थान में संचालित एम्बुलेंस की जांच रिपोर्ट नहीं भेजने पर एक्शन, 5 दिन में मांगा जवाब

राजस्थान में संचालित 104 और 108 एम्बुलेंस में खामियां मिलने के बाद अब नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) निदेशक ने प्रदेश के 19 जिलों के सीएमएचओ को नोटिस जारी किया है। ये नोटिस दिए गए लक्ष्य के मुताबिक इन एम्बुलेंस की समय पर जांच नहीं करने के कारण जारी किया है। इस कारण बताओ नोटिस का पांच दिन में जवाब मांगा है। जवाब नहीं देने पर विभागीय कार्रवाई करने की अनुशंषा करने की चेतावनी जारी की है।

दरअसल, सभी जिलों के सीएमएचओ को जनवरी से मार्च तक अपने-अपने क्षेत्र में संचालित तमाम 108 और 104 एम्बुलेंस का सर्वे करना था। इस सर्वे की रिपोर्ट विभाग के बनाए मोबाइल ऐप पर अपलोड करनी थी। 19 जिले के सीएमएचओ ने सर्वे पूरा नहीं किया और न उसकी रिपोर्ट मोबाइल ऐप के जरिए विभाग को पहुंचाई।

एक माह में 4 बार करना था सर्वे

NHM से जारी निर्देशों के मुताबिक हर सीएमएचओ को अपने-अपने क्षेत्र में संचालित एम्बुलेंस का सर्वे माह में 4 बार करने के निर्देश थे। इन सर्वे को करवाने का मुख्य उद्देश्य संचालित एम्बुलेंस में खामियां होने पर उन्हें चिह्नित करना और ठीक करवाना है, ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो।

इन सीएमएचओ को दिया नोटिस

अलवर जिला सीएमएचओ डॉ. योगेश कुमार शर्मा, प्रतापगढ़ डॉ. जीवराज मीना, फलौदी डॉ. धीरज बिस्सा, जैसलमेर के डॉ. राजेन्द्र पालीवाल, डूंगरपुर के डॉ. अलंकार गुप्ता, बूंदी के डॉ. ओ.पी. समर, बालोतरा के डॉ. वाकाराम चौधरी, सीकर के डॉ. अशोक कुमार महरिया, उदयपुर के डॉ. अशोक आदित्य, सिरोही के डॉ. दिनेश खराड़ी, सवाई माधोपुर के डॉ. अनिल कुमार जैमिनी, खैरथल-तिजारा के डॉ. अरविंद गैट, कोटपूतली-बहरोड़ के डॉ. आशीष सिंह शेखावत, डीग के डॉ. विजय कुमार सिंघल, हनुमानगढ़ सीएमएचओ डॉ. नवीत शर्मा, टोंक डॉ. शैलेन्द्र सिंह चौधरी, पाली डॉ. विकास मारवाल, दौसा डॉ. सीताराम मीना और करौली सीएमएचओ डॉ. दिनेश चंद मीना को नोटिस जारी किया है।

100 से ज्यादा एम्बुलेंस में मिली खामियां

NHM की ओर से अपनी एक टीम लगाकर प्रदेश में संचालित सभी एम्बुलेंस का सर्वे करवाया गया। ये सर्वे इसी माह 3 से 9 अप्रैल के बीच करवाया गया। इस सर्वे में सामने आया कि 100 से ज्यादा एम्बुलेंस (108 और 104 एम्बुलेंस) में कुछ न कुछ खामियां मिली। इसमें 8 एम्बुलेंस ऐसी मिली, जिनके टायरों की स्थिति खराब थी। उनमें स्टेपनी तक नहीं मिली। इसी तरह 6 एम्बुलेंस ऐसी थी, जिनमें जरूरी दवाइयां और मेडिकल उपकरण नहीं थे। जबकि 108 सेवा के तहत लगी 28 एम्बुलेंस ऐसी मिलीं, जिनमें एयर कंडीशन तो लगा था, लेकिन वह काम ही नहीं कर रहा था।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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