सुप्रीम कोर्ट ने सांगानेर स्थित देश की पहली ओपन एयर जेल में 22 हजार 232 वर्गमीटर जमीन पर राज्य सरकार को 300 बेड का सैटेलाइट हॉस्पिटल बनाने की मंजूरी दे दी। साथ ही राज्य के सीएस को अवमानना की कार्रवाई से मुक्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार की सिफारिशों को भी स्वीकार कर लिया।
अदालत ने सरकार को निर्देश दिए कि वह एक हलफनामा दे और उसमें बताए कि रजिस्ट्रार की सिफारिशों के अनुसार ही जेल परिसर व हॉस्पिटल का निर्माण करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश प्रसून गोस्वामी की अवमानना याचिका पर दिया।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता व एएजी शिवमंगल शर्मा ने कहा कि रजिस्ट्रार की रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि 17,800+14,940 वर्ग मीटर जमीन में नए जेल ढांचे का निर्माण किया जाएगा। जब तक यह निर्माण पूरा नहीं होगा तब तक मौजूदा जेल भवन को खाली नहीं किया जाएगा। इसके अलावा हॉस्पिटल का निर्माण भी चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा, ताकि बंदियों के मौजूदा जीवन की स्थितियां प्रभावित ना हो।
इस मामले में रजिस्ट्रार ने 6 दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश की थी। इसमें कहा था कि मौजूदा 17,800 वर्ग मीटर और अतिरिक्त 14,940 वर्ग मीटर जमीन का उपयोग जेल के लिए किया जा सकता है। बाकी 22,232 वर्गमीटर जमीन पर सैटेलाइट हॉस्पिटल का निर्माण किया जाएगा।
दरअसल, अवमानना याचिका में कहा था कि खंडपीठ ने 17 मई 2024 के आदेश से राज्य सरकार को ओपन जेल की जमीन को कम नहीं करने और छह दशक से ओपन जेल के लिए काम आने वाली इस जमीन को संरक्षित करने के लिए कहा था, लेकिन जेडीए ने 30 जुलाई 2024 को ओपन जेल की इस जमीन पर सैटेलाइट हॉस्पिटल का आवंटन मंजूर किया है। राज्य सरकार व जेडीए का यह करना सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना है।





