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स्टेट जीएसटी का कोटा, नागौर में बड़ी छापेमारी:पान मसाला निर्माताओं की 1580 करोड़ कर चोरी पकड़ी, 2 गिरफ्तार

एसजीएसटी ने राज निवास पान मसाला और जर्दा निर्माताओं पर बड़ा एक्शन लेते हुए कोटा व नागौर में छापेमारी की। इसमें 1580 करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी पकड़ी गई है। बागपत के गौरव ढाका और कोटा के कमल किशोर अग्रवाल को गिरफ्तार भी किया गया है। इन्हें आर्थिक अपराध न्यायालय ने 28 मई तक न्यायिक अभिरक्षा में भेजा है। जांच टीमों के 50 से अधिक अधिकारी, कर्मचारियों ने कोटा-नागौर के 9 ठिकानों पर 120 घंटे सर्च की।

एसजीएसटी के मुख्य आयुक्त कुमारपाल गौतम के अनुसार बिना बिल के पान मसाला, जर्दा बिक्री की जानकारी मिली थी। इसके तहत कोटा में 3 फैक्ट्रियों पर सर्च की। इसमें भारी मात्रा में अघोषित सुपारी, पिपरमेंट, एसेंस, कृत्रिम कत्था, तंबाकू, कच्चा जर्दा, फिनिश्ड तंबाकू आदि जब्त हुए हैं। यहां करीब 600 कट्टों में सिंथेटिक कत्था केमिकल गैंबियर जैसा पाउडर मिला है जो प्राणघातक है।

गिरफ्तार कमल नागोरी उर्फ कमल किशोर अग्रवाल पिछले कई वर्षों से राजस्थान में सिगरेट, बीड़ी, गुटका, पान मसाला और जर्दा के व्यवसाय के लिए चर्चित है। नागोरी अगस्त 2020 में केंद्रीय एजेंसी की कार्रवाई में जेल भी जा चुका है। मालूम हो कि राजस्थान की एकमात्र कंपनी है, जिसका पान मसाला व जर्दा तमिलनाडु, असम, सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा और दक्षिण भारत के राज्यों में बिना रोक-टोक सप्लाई होता है। इसकी सूचना विभाग को काफी समय से प्राप्त हो रही थी।

50-50 बाउंसर थे फैक्ट्री की सुरक्षा में

विभाग के अनुसार कोटा स्थित तीनों इकाइयों में 6-7 साल से 24 घंटे काम होता था। इन फैक्ट्रियों में 50- 50 बाउंसर सुरक्षा में लगे रहते थे। विभाग को इस करचोर नेक्सस को तोड़ने में इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी का प्रयोग करना पड़ा ।

भांग के कारोबार में भी गोलमाल

भांग के ठेके में टैक्स चोरी, करोड़ों मेंलाइसेंस, पर बिक्री लाखों में ही दिखाई

राज्य में लाइसेंस की आड़ में भांग का अवैध धंधा बेरोकटोक चल रहा है। ठेकेदार करोड़ों रुपए शुल्क देकर लाइसेंस ले रहे हैं और बिक्री सिर्फ लाखों में ही दिखा रहे हैं। जितना ये कागजों में घाटा दिखा रहे हैं इसके मुकाबले खपत कई गुना अधिक है। यानी जीएसटी और परमिट शुल्क की चोरी की जा रही है।

भास्कर पड़ताल में आया ठेके के लिए भांग के स्टॉक रिकॉर्ड में हेरफेर होती है। ठेकेदार 7 माह में 43 हजार किलो भांग बेचना दिखाते हैं जबकि जितना लाइसेंस शुल्क वे जमा करा रहे हैं वह 1.87 लाख किलो भांग बेच कर ही जमा करा पाना संभव है। प्रदेश में भांग के ठेके 30 समूह में दिए जाते हैं। वर्ष 2024-25 में चार समूह नागौर, करौली, सवाई माधोपुर व श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़ में ठेके नहीं छूटे। अन्य 26 भांग समूहों में 414 दुकानें इस वित्तीय वर्ष में संचालित थी। इनमें सर्वाधिक 5.07 करोड़ का ठेका कोटा प्रथम तथा सबसे कम 7.45 लाख का ठेका चूरू में छूटा था।

रिकॉर्ड में 7979 किलो भांग, मौके पर 5641 किलो मिली

विभाग की एक टीम ने जयपुर में अंबाबाड़ी स्थित गोदाम पर पड़ताल की तो हतप्रभ रह गई। कागजों में 7979 किलो भांग का स्टॉक दिखाया गया जबकि मौके पर 5641 किलो भांग ही मिली। जयपुर समूह की वर्ष 2024-25 की वार्षिक लाइसेंस फीस 4.22 करोड़ रुपए से अधिक है। ऐसे में फरवरी 2025 तक का शुल्क 3.87 करोड़ रुपए बनता है, जबकि रिकॉर्ड के अनुसार इस अवधि में मात्र 2370 किलो भांग बेची गई। इसका राज्य की औसत दर (1600 रुपए किलो) से बाजार मूल्य 52 लाख रुपए बनता है। जबकि रिकॉर्ड में भांग की कीमत शहर में 1700 रुपए तथा ग्रामीण में 600 रुपए प्रति किलो बताई गई है।

दूसरी ओर, आबकारी आयुक्त शिव प्रसाद नकाते का कहना है कि परमिट आफ लाइन दिए जाते हैं। सभी जिला आबकारी अधिकारियों को इस मुद्दे पर समीक्षा के लिए कहा गया है।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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