कोटा वन विभाग ने भैसरोडगढ़ टाइगर सेंचुरी, शेरगढ़ सेंचुरी और अभेड़ा सेंचुरी में वाटर होल पद्धति से वन्यजीवों की गणना की। विभाग ने पूर्व तैयारी के तहत अभेड़ा सेंचुरी के वाटर होल के पास 32 कैमरे स्थापित किए, जिनसे वन्यजीवों की गतिविधियों और फोटो रिकॉर्ड किए गए।
वन विभाग के अधिकारी अनुराग भटनागर ने बताया कि इस वर्ष की गणना में वन्यजीवों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। कैमरा ट्रैप से प्राप्त तस्वीरों में विशेषकर रात्रि के समय लेपर्ड, खरगोश, नीलगाय, जंगली सूअर और चिंकारा जैसे वन्यजीव पानी पीते हुए नजर आए।
वन विभाग इन कैमरों से प्राप्त तस्वीरों और वीडियो के माध्यम से वन्यजीवों की गतिविधियों का रिकॉर्ड तैयार कर रहा है, जिससे विभिन्न प्रजातियों की संख्या का सटीक आकलन किया जा सके। यह गणना वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


हाड़ौती के जंगलों में बढ़ी वन्यजीवों की संख्या, दुर्लभ प्रजातियों की वापसी
दुर्लभ वन्यजीवों की मौजूदगी से खुश वन विभाग देशभर में लुप्त हो रहे वन्यजीवों की मौजूदगी कोटा के जंगलों में देखी गई है। भैंसरोगढ़ में भेड़िये और पोरक्यूपाइन जैसे दुर्लभ जीव दिखे हैं। मुकंदरा टाइगर रिजर्व में हायना, भेड़िया, जैकाल, चीतल, भालू, पैंथर और नीलगाय की संख्या में वृद्धि हुई है। विशेष रूप से, देश में मात्र 3000 बचे भेड़ियों की संख्या हाड़ौती क्षेत्र में बढ़ी है। वन्यजीव गणना में लेपर्ड और जैकाल के बच्चे भी दिखाई दिए।
61 प्वाइंट पर हुई व्यापक गणना डीएफओ अनुराग भटनागर के अनुसार, वन्यजीव गणना 2025 के लिए विभिन्न वॉटर पॉइंट पर काउंटिंग की गई। वन्यजीव मंडल के अंतर्गत भैंसरोडगढ़, शेरगढ़ सेंचुरी, अभेड़ा तालाब और उम्मेदगंज पक्षी विहार में कुल 61 से अधिक स्थानों पर सुबह से रात तक गणना की गई।
विभिन्न क्षेत्रों में वन्यजीवों की उपस्थिति भैंसरोडगढ़ में 33 और शेरगढ़ सेंचुरी में 19 गणना बिंदु बनाए गए। अभेड़ा बायोलॉजिकल पार्क और उम्मेदगंज पक्षी विहार में 2-2 वाटर प्वाइंट पर गणना की गई। अभेड़ा में राजस्थान का स्टेट एनिमल चिंकारा, नीलगाय और जंगली सूअर दिखे। भैंसरोडगढ़ व शेरगढ़ में पैंथर और भालू जैसे बड़े वन्यजीवों की उपस्थिति दर्ज की गई।






