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अब विधानसभा के चुनावी रण पर “गुरुओं” की नजर, राजस्थान यूनिवर्सिटी के 80 सहायक प्रोफेसर को मिली चुनाव लड़ने की हरी झड़ी

जयपुर: यूनिवर्सिटी में राजनीति का पाठ पढ़ाने वाले प्रोफेसर अब चुनावी मैदान (Rajasthan Election 2023) में अपनी किस्मत आजमाते हुए नजर आएगे. राजस्थान विश्वविद्यालय (Rajasthan University) के 81 प्रोफेसर इस बार चुनावी मैदान में ताल ठोकने जा रहे हैं, जिसकी सभी तैयारियां पूरी हो चुकी है. साथ राजस्थान यूनिवर्सिटी में हुई सिडिकेट की बैठक में 81 सहायक प्रोफेसरों (Assistant Professor) को एनओसी (NOC) दे दी गई. दरअसल, चुनाव लड़ने की इच्छा जताते हुए इन सभी सहायक प्रोफेसरों ने करीब एक महीने पहले एनओसी के लिए यूनिवर्सिटी में आवेदन किया था.

प्रोफेसर                         विषय

डॉ संजय कुमार             फिजिक्स
डॉ राजेंद्र प्रसाद             ड्रांइग एंड पेंटिग
डॉ चतुर्भुज यादव           पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन
डॉ गजेंद्र सिंह               पॉलिटिकल साइंस
डॉ विरेंद्र यादव              हिंदी
दिनेश कुमार शर्मा         इतिहास

राजस्थान यूनिवर्सिटी ने कल विशेष सिंडीकेट की बैठक बुलाकर 80 सहायक प्रोफेसर और 1 अशैक्षणिक कार्मिक को चुनाव लड़ने की एनओसी मांग पर मुहर लगा दी, यूनिवर्सिटी की ओर से 30 अक्टूबर से लेकर आचार संहिता जारी रहने तक इन सभी 81 कार्मिकों को अवैतनिक अवकाश पर एनओसी दी गई है. ऐसा पहला बार हुआ है जब इतनी बड़ी तादाद में विधानसभा चुनाव लड़ने की इच्छा सहायक प्रोफेसरों की ओर से जताई गई है.

प्रोफेसर                            विषय

दीप कुमार मित्ततल            हिंदी
घनश्याम बैरा                    विधि
दलपत मीणा                     भौतिक शास्त्र
अरिवन्द कुमार                  भौतिक शास्त्र
दिनेश कुमार                     भौतिक शास्त्र
भरतलाल मीणा                  भौतिक शास्त्र
छगन लाल                        भौतिक शास्त्र

राजस्थान यूनिवर्सिटी की ओर से हालांकि 81 कार्मिकों को एनओसी की हरी झडी तो मिल गई लेकिन अब एक सवाल इन दिनों वेहद चर्चाओं में है वो ये है कि क्या ये सभी 81 कार्मिक विधानसभा चुनाव लडे़गें. क्योंकि सूत्र ये भी बताते है कि इनमें से ज्यादातर शिक्षकों ने चुनावी ड्यूटी से बचने के लिए ये तरीका निकाला है जिससे चुनाव ड्यूटी से बचा जा सके. हालांकि ये शिक्षक चुनाव ड्यूटी से तो बच जाएगे लेकिन इन शिक्षकों को मिलने वाले वेतन यूनिवर्सिटी नहीं देगा क्योंकि राजस्थान यूनिवर्टिी ने इन्हे अवैतनिक अवकाश पर ही एनओसी दी है.

विश्वविद्यालय के अध्यादेश 384-ए के तहत हालांकि शिक्षकों ने चुनाव लड़ने को लेकर एनओसी तो ले ली है लेकिन क्या वाकई में इन शिक्षकों की मंशा चुनाव लड़ने की है या फिर किसी ओर कारण के चलते इन्होंने ये तरीका आजमाया है लेकिन आने वाले वक्त में पूरी तस्वीर जल्द ही साफ हो जाएगी.

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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