अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने चित्तौड़गढ़ से नेता संदीप शर्मा का निष्कासन रद्द कर दिया है। संदीप शर्मा की पार्टी में वापसी के बाद लोकल राजनीति में हलचल है। राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को निष्कासन रद्द करने के आदेश जारी किए।
इस आदेश में बताया गया कि राज्य अनुशासन समिति की अनुशंसा के अनुसार पार्टी से निकाले गए 4 नेताओं के मामले की समीक्षा की गई। इनमें चित्तौड़गढ़ के संदीप शर्मा, सीकर के बलराम यादव, बांसवाड़ा के अरविन्द डामोर और नागौर के तेजपाल मिर्धा शामिल हैं।
समीक्षा के बाद पार्टी ने चारों का निष्कासन रद्द कर दिया है और तत्काल प्रभाव से उन्हें फिर से कांग्रेस में शामिल कर लिया गया है।

महिला कर्मचारी ने लगाया था यौन शोषण का आरोप
संदीप शर्मा का मामला खास तौर पर सुर्खियों में रहा। वे पूर्व नगर परिषद सभापति रह चुके हैं। उन पर अपनी ही एक महिला कर्मचारी के साथ यौन शोषण करने का आरोप लगा था।
यह मामला अदालत में चल रहा था। पुलिस ने कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट (FR) भी पेश कर दी थी। आरोप लगने के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने संदीप शर्मा को पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
संदीप शर्मा ने कहा-उस समय प्रदेश कांग्रेस पर यह आरोप भी लगा कि बिना उनकी बात सुने दबाव में आकर कार्रवाई की गई।
अब जबकि जांच में साफ हो गया कि मामला राजनीतिक दबाव में दर्ज हुआ था और इसमें दम नहीं है, तो कांग्रेस ने निष्कासन वापस ले लिया है।

राजनीतिक दबाव में दर्ज हुआ था झूठा मुकदमा
संदीप शर्मा की घर वापसी के बाद जिले की राजनीति में नई हलचल मच गई है। पार्टी में वापस शामिल होने के बाद वे निंबाहेड़ा पहुंचे। उन्होंने पूर्व सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना से मुलाकात की और उन्हें धन्यवाद दिया। आंजना ने शर्मा का स्वागत किया और उनके समर्थन में खड़े नजर आए।
इस मौके पर संदीप शर्मा ने कहा- जनता हमेशा से जानती थी कि मुझ पर लगाए गए आरोप निराधार हैं। राजनीतिक दबाव के कारण झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया था, लेकिन अब अदालत में सच्चाई सामने आ चुकी है।
मैं हमेशा से पार्टी के सिपाही रहा हूं। आगे भी पार्टी की सेवा करता रहूंगा। मेरी मदद पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना ने की। मेरी बात कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं तक पहुंचाई। इसी कारण दोबारा पार्टी में सक्रिय होने का अवसर मिला।
मैंने कभी पार्टी से दूरी नहीं बनाई, बल्कि परिस्थितियों के कारण बाहर जाना पड़ा।
संदीप शर्मा की वापसी से स्थानीय राजनीति में नए समीकरण
चित्तौड़गढ़ की राजनीति में संदीप शर्मा का नाम पहले पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्र सिंह जाड़ावत के करीबी के रूप में जाना जाता था।
लेकिन इस बार उनकी वापसी का श्रेय उदयलाल आंजना को मिला है। इससे स्थानीय राजनीति के समीकरण बदलते हुए दिखाई दे रहे हैं।
पार्टी के भीतर यह चर्चा भी तेज हो गई है कि अब चित्तौड़गढ़ जिले में नेतृत्व और गुटबाजी की तस्वीर पहले जैसी नहीं रहेगी।
कांग्रेस में इस निर्णय को बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। चार नेताओं की वापसी से जहां संगठन को मजबूती मिलेगी, वहीं कई जिलों में समीकरण बदल सकते हैं। खासकर चित्तौड़गढ़ में, जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला रहता है, वहां संदीप शर्मा की सक्रियता पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।






