Home » राजस्थान » जयपुर में बारिश के बीच राम कथा साकार:श्रीराम राज्यभिषेक में लोगों ने लगाए जयकारे; 80 कलाकारों ने भूमिका निभाई

जयपुर में बारिश के बीच राम कथा साकार:श्रीराम राज्यभिषेक में लोगों ने लगाए जयकारे; 80 कलाकारों ने भूमिका निभाई

‘राम नाम आधार जिन्हें वे जल में राह बनाते हैं।’ गीत की यह पंक्तियां गुरुवार को जवाहर कला केन्द्र में चरितार्थ होती नजर आई। मौका रहा, दशहरा नाट्य उत्सव के दूसरे दिन का। दर्शकों में मानस रामलीला के मंचन को देखने का भारी उत्साह रहा, समय से पहले सभी ने अपनी जगह रोक ली। मौसम ने करवट ली और बारिश होने लगी। श्रीराम में दर्शकों की अटूट भावना ने उन्हें रोके रखा। इस बीच केन्द्र में मौजूद दर्शक और कलाकार श्रीराम नाम का कीर्तन करते दिखाई दिए।

बादल छटने के बाद सेट पुनः तैयार हुआ और सफल टेक्निकल ट्रायल के बाद मध्यवर्ती में मानस रामलीला का मंचन किया गया। कलाकारों और दर्शकों के जज्बे और श्रीराम के आशीर्वाद फलस्वरूप रामलीला मंच पर साकार हुई, ये अद्भुत दृश्य इस बात को साबित करता है, ‘होइहि सोइ जो राम रचि राखा।’ इसी के साथ अधर्म पर धर्म की जीत, नैतिक सीख और श्रीराम के आदर्शों की पुनर्स्थापना का संदेश भी मंच से दिया गया।

अधर्म पर धर्म की जीत, नैतिक सीख और श्रीराम के आदर्शों की पुनर्स्थापना का संदेश भी मंच से दिया गया।
अधर्म पर धर्म की जीत, नैतिक सीख और श्रीराम के आदर्शों की पुनर्स्थापना का संदेश भी मंच से दिया गया।

मानस रामलीला अभिनय, विजुअल व साउंड इफेक्ट्स के संयोजन के साथ तैयार अद्भुत प्रस्तुति है। जिसकी पटकथा वरिष्ठ रंगकर्मी और उपन्यासकार अयोध्या प्रसाद गौड़ ने लिखी है जबकि निर्देशन अरु स्वाति व्यास (एनएसडी) का है। प्रस्तुति में नए प्रयोगों के साथ श्रीराम की कथा का प्रभावी मंचन हुआ जिसे देखकर सभी भावुक हो उठे।

केवट इस कथा के सूत्रधार है। जय श्रीराम के नारों की गूंज के बीच रघुवर के जन्म के साथ प्रस्तुति की शुरुआत होती है। एलईडी वॉल पर चल रहे विजुअल से हर दृश्य जीवंत होता है। अभिनय के साथ वाइस ओवर डायलॉग प्रस्तुति को खास बनाते हैं। एक-एक कर मंच पर सीता स्वयंवर, कैकई-दशरथ संवाद, वनगमन, सीता हरण, सुग्रीव-बाली युद्ध, सीता की खोज, लंका दहन, रावण वध, श्रीराम राज्यभिषेक जैसे प्रसंग मंच पर साकार होते हैं। प्रस्तुति 5 से 7 गीत और लगभग 30 चौपाइयों से सुशोभित रही।

प्रस्तुति 5 से 7 गीत और लगभग 30 चौपाइयों से सुशोभित रही।
प्रस्तुति 5 से 7 गीत और लगभग 30 चौपाइयों से सुशोभित रही।

हालांकि आधे समय तक एलईडी बंद रखी गई। युद्ध के दृश्य को रोमांचक बनाने के लिए विजुअल इफेक्ट्स, स्टंट्स का बखूबी प्रयोग किया गया। साथ ही पात्र की एंट्री, पात्र का जाना और तुरंत दूसरा दृश्य प्रकट होना दर्शकों को आकर्षित करता है। रावण वध के बाद राज्याभिषेक होने पर आतिशबाजी सभी का ध्यान खींचती है, जय श्रीराम के उद्घोष के साथ दर्शक विदा लेते हैं।

केन्द्र में मौजूद दर्शक और कलाकार श्रीराम नाम का कीर्तन करते दिखाई दिए।
केन्द्र में मौजूद दर्शक और कलाकार श्रीराम नाम का कीर्तन करते दिखाई दिए।

गौरतलब है कि निर्देशक अरु स्वाति व्यास ने बताया कि गोस्वामी तुलसीदास जी कृत रामचरित मानस के अध्ययन के पश्चात वरिष्ठ रंगकर्मी, उपन्यासकार और मोटिवेशनल स्पीकर अयोध्या प्रसाद गौड़ ने इसकी स्क्रिप्ट लिखी है। इसे तैयार करने में 4 साल का समय लगा है।

प्रसिद्ध गायक पद्मश्री सुरेश वाडकर और दिव्य कुमार ने गीतों में अपनी आवाज दी है। वाइस ओवर इस प्रस्तुति को खास बनाता है, निर्देशक ने मुंबई जाकर रामानंद सागर निर्देशित रामायण में राम का किरदार निभाने वाले अभिनेता अरुण गोविल को राम के संवादों को अपनी आवाज देने के लिए तैयार किया।

इसके अतिरिक्त जयपुर के कलाकारों में सुरेश शर्मा ने दशरथ, भानु प्रिया भाटिया ने ​सीता, ईश्वर दत्त माथुर, मनोज स्वामी, श्याम बिहारी शर्मा, डॉ. मुकेश सैनी ने केवट, रेणु शर्मा ने मंथरा, वर्तिका ने सरस्वती, सर्वेश व्यास ने हनुमान, विनोद कृष्ण भट्ट ने रावण, उमेश पंत ने कुंभकरण, सौरभ भट्ट, वासुदेव भट्ट और विशाल भट्ट ने क्रमश: मेघनाथ, जामवंत और विभीषण के किरदार में अपनी आवाज दी है। इस प्रस्तुति में अहमदाबाद, जयपुर, जोधपुर, पाली, जालौर समेत राजस्थान के अन्य जिलों के लगभग 80 कलाकारों ने मुख्य रूप से भूमिका निभाई।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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