देश में फिलहाल हरियाणा के फरीदाबाद में बरामद हुए 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट और दिल्ली में हुए ब्लास्ट की चर्चा है। 6 माह पहले जयपुर के बस्सी थाना क्षेत्र में हाईवे पर मोहनपुरा पुलिया किनारे मई 2025 में लावारिस पिकअप में मिला 2075 किलो अमोनियम नाइट्रेट और ऑप्टी स्टार एक्सप्लोसिव मिला था, जो फरीदाबाद से 5 गुना ज्यादा था। इसके बावजूद आज तक यह पता नहीं चल पाया कि ये कहां से लाया गया था और कहां सप्लाई होना था। चौंकाने वाली बात तो यह है कि पुलिस की नाकामी के बाद भी जांच थाना स्तर पर ही चल रही है। इसके लिए न तो कोई स्पेशल टीम गठित की गई और ना ही एनआईए को सौंपी गई।
बिना लाइसेंस के अमोनियम नाइट्रेट नहीं बिक सकता, फिर कैसे पहुंचा 2 टन माल?
अमोनियम नाइट्रेट सिर्फ विस्फोटक लाइसेंस धारकों को ही सप्लाई किया जा सकता है। इसके बावजूद बिना अनुमति और प्रमाणन के इतनी बड़ी मात्रा में बस्सी हाईवे पर लावारिस हालत में कैसे पहुंच गया, यह अब तक रहस्य है। तब पुलिस ने मामले को यह कहकर ठंडे बस्ते में डाल दिया था कि यह दौसा के पहाड़ों में पत्थर तोड़ने के काम में उपयोग लिया जाता है। अब दिल्ली और हरियाणा में विस्फोटक बरामद होने के बाद इस दलील पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अब तक मात्र 2 गिरफ्तारी, क्यों लाए पता नहीं पिकअप के नंबर के आधार पर पुलिस ने भीलवाड़ा के शिवपुर नरेली मांडल निवासी ईश्वर सिंह को पकड़ लिया था। उसने बताया था कि वाहन चालक इसे लेकर निकला था। स्टेयरिंग लॉक लगा हुआ था और चालक फरार था। एफएसएल और पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन की टीम ने पुष्टि की थी कि यह अत्यधिक संवेदनशील विस्फोटक सामग्री है।
- पुलिस ने छह माह में क्या जांच की?
- आखिर इतना विस्फोटक बिना किसी रिकॉर्ड के कैसे सप्लाई हुआ?
- अमोनियम नाइट्रेट बनाने वाली फैक्ट्री विस्फोटक लाइसेंस धारक काे सप्लाई कर सकती है। बड़ी मात्रा में विस्फोटक मिलना गंभीर मामला बता जांच ट्रांसपोर्ट नगर थानाधिकारी काे दी गई थी। थानाधिकारी अरुण चौधरी का कहना है कि जांच जारी है, फरार आरोपियों काे पकड़ने के लिए टीम लगाई हुई है।






