राजस्थान हाईकोर्ट ने नगर निगम हेरिटेज, जवाहर नगर जयपुर की सरकारी भूमि पर वार्ड 93 के पार्षद नीरज अग्रवाल द्वारा बिना अनुमति निर्मित ऑफिस को गैरकानूनी और पूर्णतः अवैध कब्जा मानते हुए सख्त कार्रवाई के आदेश दिए। कोर्ट के निर्देश पर उक्त ऑफिस को खाली कराकर सील किया गया तथा ऑफिस की चाबी कोर्ट में ही नगर निगम हेरिटेज के अधिवक्ता को सुपुर्द की गई।
यह महत्वपूर्ण कार्रवाई पिटीशनर अंकित गुप्ता एडवोकेट द्वारा दायर पीआईएल पर की गई, जिसकी प्रभावी पैरवी एडवोकेट विष्णु खण्डेलवाल, लवेंदर सिंह शेखावत, मंजीत सैनी एवं पंकज शर्मा की टीम ने संयुक्त रूप से की।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी और स्पष्ट निर्देश
हाईकोर्ट की खंडपीठ—माननीय एक्टिंग चीफ जस्टिस एस. पी. शर्मा एवं माननीय न्यायमूर्ति बलजिंदर सिंह ने आदेश में कहा कि पार्षद द्वारा बिना NOC, बिना विधिक अलॉटमेंट तथा बिना निगम की स्वीकृति के ऑफिस का निर्माण करना कानूनन अवैध है सरकारी भूमि पर निजी कार्यालय चलाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है इसलिए कब्जा तत्काल खत्म कर निगम के अधीन सौंपा जाए।
कोर्ट ने निगम को निर्देशित किया कि अनुपालन रिपोर्ट और ऑफिस की चाबी कोर्ट में प्रस्तुत की जाए।
अवैध ऑफिस को सील कर कब्जा निगम को सौंपा गया
निर्देशों के अनुपालन में, नगर निगम हेरिटेज की टीम ने दिनांक 10/11/2025 को मौके पर जाकर ऑफिस को मौके पर खाली करवाया,पूरे परिसर को सील किया, तथा कब्जा निगम के अधीन लिया आज की कार्यवाही में निगम द्वारा सील की चाबी व अनुपालन रिपोर्ट कोर्ट में पेश की गई।
भविष्य में उपयोग पर कोर्ट की सख्त चेतावनी कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि
“यदि पार्षद नीरज अग्रवाल भविष्य में बिना अनुमति उक्त भूमि या ऑफिस का उपयोग करते पाए गए, तो पिटीशनर नई एप्लिकेशन प्रस्तुत कर सकता है, जिसके आधार पर कठोर कानूनी कार्यवाही की जाएगी।” यह निर्देश भविष्य में किसी भी अवैध पुनः-कब्जे के प्रयास पर तत्काल रोक सुनिश्चित करता है।
पिटीशनर की ओर से एडवोकेट विष्णु खण्डेलवाल के कोर्ट में तर्क :- सरकारी जमीन पर बिना स्वीकृति निर्माण एवं कब्जा गंभीर अवैधता है।
जनप्रतिनिधि होने के नाते पार्षद की जिम्मेदारी आम नागरिक से कहीं अधिक होती है अवैध कब्जा न केवल प्रशासनिक व्यवस्था के विरुद्ध है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन भी है।
कोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए निर्णायक आदेश पारित किया।
जनहित में बड़ा फैसला — अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त संदेश
यह निर्णय जयपुर शहर में अवैध कब्जों के विरुद्ध एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।
हाईकोर्ट की इस कार्रवाई ने स्पष्ट संदेश दिया है कि: “कानून के सामने सभी बराबर हैं — चाहे पद कोई भी हो।”






