एसीबी की दौसा चौकी पर तैनात डीएसपी के सामने रीडर ने फुलेरा थाने के कॉन्स्टेबल से रिश्वत के 10 लाख रुपए मांगे थे। रिश्वत की पहली किस्त 2 लाख लेने के बाद रीडर ने केस से निकालने का विश्वास दिलाया था। बोला- लिखित में गारंटी ले लो, मैं करवाऊं तुम्हारे काम को 100 परसेंट। एसीबी में शिकायत के शक पर रिश्वत में लिए रुपए वापस लौटा दिए थे। एसीबी ने मिले सबूतों के आधार पर रीडर के खिलाफ रिश्वत मांगने का केस दर्ज कर सस्पेंड कर दिया। डीएसपी की संदिग्ध भूमिका पर दौसा चौकी से हटा दिया।
डीजी (एसीबी) गोविंद गुप्ता ने बताया- साइबर क्राइम के एक केस में 2 अक्टूबर को फुलेरा थाने के थानाधिकारी चंद्रप्रकाश और दलाल हैप्पी माथुर को 70 हजार रुपए की रिश्वत लेते ट्रैप किया था। एसीबी में दर्ज केस की जांच एसीबी चौकी दौसा के डीएसपी नवल किशोर मीणा के पास थी। डीएसपी नवल किशोर मीणा के रीडर हरभान सिंह ने फुलेरा थाने के एक कॉन्स्टेबल को पूछताछ के लिए बुलाया था। 4 नवम्बर को एसीबी चौकी पर कॉन्स्टेबल अपने भाई के साथ पहुंचा।
केस में नाजायज फसाने की दी धमकी एसीबी सूत्रों के मुताबिक, आरोप है कि डीएसपी नवल किशोर मीणा के सामने ही उनके रीडर हरभान सिंह ने नाजायज फसाने के लिए डराया-धमकाया। केस में नामजद नही करने के एवज में 10 लाख रुपए की घूस मांगी। कॉन्स्टेबल को कहा- तेरा भाई आकर मुझसे मिल लेगा। रिश्वत की खुलकर बातचीत रीडर हरभान सिंह ने कॉमन फ्रेंड के मार्फत की। कॉमन फ्रेंड की मौजूदगी में ही भाई से रिश्वत की पहली किश्त के 2 लाख रुपए लिए।
कॉल पर बातचीत में दिलाया विश्वास 10 लाख रुपए घूस के लिए परेशान करने की शिकायत पीड़ित कॉन्स्टेबल ने 12 नवम्बर को एसीबी हेड क्वार्टर में दी। एसीबी की ओर से ट्रैप कार्रवाई के लिए शिकायत का सत्यापन करवाया। कॉमन फ्रेंड के मोबाइल से कॉन्स्टेबल के भाई और डीएसपी नवल किशोर के रीडर हरभान सिंह की बात करवाई गई। कॉल पर बातचीत करने पर रीडर ने केस से निकालने का विश्वास दिलाया।
रीडर हरभान सिंह – कॉन्स्टेबल का जो नमूना आवाज का सम्मन भेजा है, उसमें 13 नवम्बर को कोर्ट में तारीख होने। तारीख पर नहीं भेजने के बारे में मना करता है। कॉन्स्टेबल का भाई – अब कैसे बचाव होवे? रीडर हरभान सिंह – देखो कुछ बिगड़ भी नही रहा है, इस चीज की गारंटी ले लो। लिखित में मेरे से भलई। कॉन्स्टेबल का भाई – अब यार कर सको तो कर लो बात। भाई हम तो दुखी है देखो। रीडर हरभान सिंह – नहीं, देखो विश्वास की चीज है ये। खुद में लीगल में जाके वो करके खुद वो करूंगा इसको कॉन्स्टेबल का भाई – अब यार भाई साहब तो यू कह उन वापिस ले लो (पूर्व में दिए 2 लाख रुपए)। अब वापिस तो यार लेके भी क्या फायदा ये बताओं। रीडर हरभान सिंह – मैं तो तैयार हूं भले ही आपको विश्वास नहीं हो तो कोई दिक्कत नहीं है, मैं तो तैयार बैठा हूं। कोई दिक्कत नहीं है। कॉन्स्टेबल का भाई – भाई और कोई उनके डिमांड हो तो डिमांड के हिसाब से बता दो यार। ऐसी बात तो है नहीं। देखों हम आपसे दूर तो है नहीं। रीडर हरभान सिंह – मैं करवाऊं तुम्हारे काम को 100 परसेंट। निश्चिंत रहो, कोई दिक्कत नहीं है। कल भेजना मत उसको, कहीं भेज दे। कॉन्स्टेबल का भाई – चलो नहीं भेजेंगे हम तो। ऐसा नही हो कल पैसे भी चले जाए और दोनों ही काम हो जाए। वो ही तो डिप्टी साहब से और बात कर लेना यार। रीडर हरभान सिंह – देखो सुनो मैं तो खुद ही यू कह रहा था कि कुछ भी हो जाए मैं स्पष्ट कराऊंगा। इनको आज मैंने सारे बयानों में आप भले ही कल फाइल पढ़ लेना। सब में लिख दी कि ये आवाज इसकी नहीं है, इसकी नहीं है, इसकी नहीं है। साहब से कह दी कि अगर हो तो बता दो।
शिकायत की भनक लगी तो लौटा दिए रुपए एसीबी में शिकायत की भनक लगने पर रीडर हरभान सिंह ने कॉमन फ्रेंड को रिश्वत की ली पहली किश्त 2 लाख रुपए देकर चला गया। पीड़ित कॉन्स्टेबल के भाई के कॉन्टैक्ट करने पर रीडर हरभान सिंह ने खुद को जयपुर आने की बताकर जांच चेंज करवाने की कहा। कॉमन फ्रेंड से मिलने पर उसने बताया- रीडर हरभान सिंह कुछ देर पहले उसके साथ आया था। रिश्वत के लिए 2 लाख रुपए देकर आपको देने की कहकर तुरंत चला गया था। डीआईजी आनंद शर्मा के नेतृत्व में टीम ने जांच की और केस दर्ज कर लिया। डिप्टी एसपी नवल मीणा की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई, इसलिए उन्हें चौकी से हटा दिया गया।






