जोधपुर जिला अपर सेशन कोर्ट ने पुलिस टीम पर हमला करने के 11 साल पुराने एक मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी पिता और दो पुत्रों को दो-दो साल की साधारण कारावास की सजा सुनाई है। जबकि, तीन अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
पीठासीन अधिकारी नेहा शर्मा ने अपने फैसले में स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस टीम पर हमला करने और सरकारी काम में बाधा डालने वाले अपराधियों के प्रति नरमी बरती गई तो समाज में गलत संदेश जाएगा और अपराधियों के हौसले बुलंद होंगे।
वारंट के तहत वांछित को गिरफ्तार करने गए थे
घटना 9 जुलाई 2014 की है। जोधपुर जिले के पीपाड़ शहर थाना क्षेत्र के गांव जालखां में पुलिस टीम किशोर न्याय बोर्ड, जोधपुर के आदेश पर अभियुक्त चेतनराम उर्फ शैतानराम को पकड़ने गई थी। उस समय पीपाड़ शहर थाने में तैनात सिपाही मनोज कुमार और सिपाही हरकेश को चेतनराम के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट की तामील की जिम्मेदारी दी गई थी।
वारंट की तामील के लिए दोनों सुबह 7:15 बजे चेतनराम के जालखां स्थित घर पहुंचे, जहां पुलिस ने जब आरोपी के पिता सुखाराम को वारंट की जानकारी दी और चेतनराम को साथ ले जाने लगे, तो सुखाराम ने कांस्टेबल की वर्दी का कॉलर पकड़ लिया। परिवार के सदस्यों ने गिरफ्तारी का विरोध किया और देखते ही देखते कहासुनी हाथापाई में बदल गई।
पुलिसकर्मियों का आरोप था कि चेतनराम के परिजनों ने उन्हें घेरकर मारपीट की, उनकी वर्दी फाड़ दी, मोबाइल फोन और सरकारी बेल्ट छीन लिए और सरकारी कामकाज में बाधा डाली। घटना के बाद पीपाड़ शहर थाने में एफआईआर दर्ज की। इसमें दंगा, लोकसेवक को चोट पहुंचाना, सरकारी ड्यूटी में बाधा, गिरफ्तार व्यक्ति को छुड़ाना और डकैती की धाराएं लगाई गईं।
पुलिस ने मेडिकल रिपोर्ट, बरामदगी मेमो, मौके का नक्शा और गवाहों के बयान के आधार पर प्रकाश पुत्र सुखाराम, चेतनराम उर्फ शैतानराम पुत्र सुखाराम, सुखाराम पुत्र मोडाराम, गुड्डी पत्नी चेतनराम, इंदू पत्नी प्रकाश और मोरकीदेवी पत्नी सुखाराम के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र पेश किया।
दोनों पक्षों की दलीलें
यह मामला जोधपुर जिला मुख्यालय स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (शासन) नेहा शर्मा की अदालत में चला। राज्य सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक मयंक रांकावत ने पैरवी की, जबकि अभियुक्त पक्ष की ओर से अधिवक्ता कान सिंह ओढ, चेतन प्रकाश, नरेश नागौरी और अमित दैया ने बचाव रखा। अभियोजन पक्ष ने कहा कि पुलिसकर्मी वारंट लेकर विधि-सम्मत तरीके से पहुंचे थे और उन पर सामूहिक हमला कर सरकारी कार्य में बाधा डाली गई, जो गंभीर अपराध है।
कोर्ट का फैसला: 3 दोषी करार, 3 बरी
लंबी सुनवाई और साक्ष्यों पर विचार के बाद कोर्ट ने 12 दिसंबर को फैसला सुनाया।
अदालत ने माना कि मुख्य हमलावरों के रूप में इन तीनों की भूमिका साक्ष्यों से प्रमाणित होती है। कोर्ट ने गवाहों और सबूतों के आधार पर माना कि आरोपियों ने लोक सेवक के साथ मारपीट कर उन्हें अपनी ड्यूटी करने से रोका है। इस पर कोर्ट ने सुखाराम (67) और उसके दोनों बेटों प्रकाश (36) व चेतनराम उर्फ शैतानराम (34) को दोषी करार दिया।
जबकि अन्य के खिलाफ अभियोजन पर्याप्त और पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सका। इस पर आरोपी गोरधनराम पुत्र मोडाराम और परिवार की महिलाएं (गुड्डी व इन्दु) को सबूतों के अभाव और संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। एक आरोपी मोरकी देवी की ट्रायल के दौरान मृत्यु हो चुकी है।
डकैती की धारा हटाई:
पुलिस ने जांच के बाद चार्जशीट में लूट/डकैती का भी मामला बनाया था, लेकिन कोर्ट ने माना कि बरामदगी खुले स्थान से हुई थी और कोई स्वतंत्र गवाह नहीं था, इसलिए डकैती का आरोप साबित नहीं हुआ।
कोर्ट ने तीनों दोषियों को अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई है, जो साथ-साथ चलेंगी:
अभियुक्त सुखाराम और प्रकाश: लोक सेवक को चोट पहुंचाना, राजकार्य में बाधा पहुंचाने और अपराधी को छुड़ाने के लिए दो-दो साल साधारण कारावास और कुल पांच-पांच हजार रुपए जुर्माना से दंडित किया।
अभियुक्त चेतनराम उर्फ शैतानराम: लोक सेवक को चोट पहुंचाना, राजकार्य में बाधा पहुंचाने और गिरफ्तारी में प्रतिरोध के लिए दो साल साधारण कारावास और कुल पांच हजार रुपए जुर्माना से दंडित किया।
कोर्ट ने आदेश दिया है कि यदि दोषी अर्थदंड (जुर्माना) नहीं भरते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।






