जोधपुर जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नेहा शर्मा ने 15 साल पुराने दिनेश हत्याकांड में तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई है। कोर्ट ने 17 दिसंबर को सुनाए फैसले में आरोपी भागीरथ, किशोर उर्फ किशोरसिंह और रामप्रकाश उर्फ गुट्टा को आजीवन कारावास और प्रत्येक को 1.56 लाख जुर्माने की सजा दी है।
28 फरवरी 2010 को होली के दिन जोधपुर के पीपाड़ शहर थाना क्षेत्र के खांगटा गांव में पालड़ी चौराहे पर शराब के पैसे को लेकर हुए विवाद में दिनेश की चाकू और कांच की टूटी बोतलों से हमला कर हत्या कर दी गई थी।
सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक मयंक रांकावत ने पक्ष रखा। इसमें बताया गया कि परिवादी कानाराम ने पीपाड़ शहर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 28 फरवरी 2010 की शाम करीब 7:45 बजे ग्राम खांगटा के पालड़ी चौराहे पर स्थित शराब की दुकान पर राजूराम पुत्र केसाराम सेल्समैन था। उस समय दिनेश, रामकरण, सांवरराम आदि खड़े थे, तभी पूर्व नियोजित तैयारी के साथ एकराय होकर एक बोलेरो जीप में सवार होकर आए 8-9 लोग उतरकर दुकान पर आए।
इनमें से रामनिवास मुंडेल, माधुराम, रामप्रकाश, किशोर, भागीरथ और इनके साथ 3-4 अन्य व्यक्तियों ने दुकान पर आकर शराब मांगी। शराब के पैसे मांगने पर उन लोगों ने यह कहकर मना कर दिया कि वे पैसे नहीं देंगे। वे जबरदस्ती शराब की बोतलें उठाकर दुकान के भीतर घुसकर गल्ले से जबरदस्ती 3 हजार 500 रुपए छीनकर बोलेरो में चले गए।
इसके बाद राजूराम दुकान बंद करके दिनेश, रामकरण, सांवरराम के साथ घर जाने के लिए रवाना हुआ। जैसे ही वे पालड़ी चौराहे पर आए तभी रामनिवास व उसके साथी बोलेरो लेकर आड़े फिरे और नीचे उतरकर चारों पर जानलेवा हमला कर दिया। रामनिवास व माधुराम के पास चाकू, रामप्रकाश के पास गुप्ती व भागीरथ के पास चाकू व टूटी हुई बोतल थी।
इन लोगों की ओर से किए गए इस हमले से दिनेश की छाती से पीठ तक आर-पार चोट आई एवं शरीर पर जगह-जगह उसे चाकुओं से गोद दिया। रामकरण के पेट व शरीर पर बोतल व चाकू से जगह-जगह चोटें आईं। राजू उर्फ राजेंद्र के शरीर को जगह-जगह चाकुओं से छलनी कर दिया। सांवरराम के हिचकी पर चाकू की चोट आई। इस हमले से दिनेश की मौके पर ही मृत्यु हो गई तथा शेष सभी गंभीर घायल अवस्था में होने से अधिक खून बहने लगा।
पिता और एक साथी की ट्रायल के दौरान मौत
इस मामले में पुलिस ने जांच के बाद पांच आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया। इनमें मुख्य आरोपी तीनों भाई (भागीरथ, किशोर उर्फ किशोरसिंह और रामप्रकाश उर्फ गुट्टा) के अलावा उनके पिता माधुराम और एक अन्य साथी रामनिवास भी नामजद थे। ट्रायल के दौरान माधुराम (2014 में) और रामनिवास (2022 में) की मौत हो गई। इसी कारण उनके खिलाफ कार्यवाही क्रमशः 9 अक्टूबर 2014 व 15 सितंबर 2022 को बंद कर दी गई।
कोर्ट ने कहा- अपराध गंभीर, नरमी का रुख नहीं अपना सकते
कोर्ट ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत 24 गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों का गहन अध्ययन किया। बचाव पक्ष ने दो गवाह पेश किए। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में सफल रहा कि आरोपियों ने मिलकर दिनेश, राजूराम, रामकरण व सांवरराम की हत्या करने के इरादे से धारदार हथियार, चाकू व कांच की टूटी हुई बोतलों से हमला किया।
कोर्ट ने कहा कि घटनास्थल पर खून के धब्बे मौजूद होना प्रमाणित हुआ और पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपितगण द्वारा दी गई सूचना के अनुसार बरामद की गई खून से सनी फूटी हुई कांच की बोतल एवं चाकू की फॉरेंसिक जांच से भी आरोपों की पुष्टि हुई। कोर्ट ने कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए नरमी का रुख अपनाया जाता है तो इससे समाज में विपरीत संदेश जायेगा एवं अपराधियों के हौसले बुलंद हो सकते हैं।
कोर्ट की टिप्पणी: गवाहों के शरीर पर लगे घाव सबसे बड़ा सबूत
बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि उन्हें राजनीतिक रंजिश के कारण झूठा फंसाया गया है और घटना के वक्त वे दूसरी जगह थे। लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। जज नेहा शर्मा ने कहा कि –
“घायल गवाहों की गवाही को आसानी से खारिज नहीं किया जा सकता। उनके शरीर पर मौजूद चोटें ही उनकी उपस्थिति और घटना की सच्चाई का सबसे बड़ा सबूत हैं।”
कोर्ट के फैसले में क्रूरता का जिक्र: पेट फाड़ दिया, सीने के आर-पार किया खंजर
कोर्ट के फैसले में मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए घटना की क्रूरता का जिक्र किया गया है –
- मृतक दिनेश: आरोपियों ने दिनेश के सीने पर चाकू से इतना गहरा वार किया कि 17 सेंटीमीटर गहरा घाव हो गया, जो आर-पार निकल गया। उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
- घायल रामकरण: आरोपी किशोर ने रामकरण के पेट में टूटी हुई बीयर की बोतल घोंप दी, जिससे उसकी आंतें बाहर आ गईं।
- घायल राजूराम: सेल्समैन राजूराम के शरीर पर चाकूओं से करीब 20 वार किए गए, जिससे वह छलनी हो गया।
कोर्ट ने कहा –प्रकरण के सभी तथ्यों व परिस्थितियों एवं अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपितगण को दोषसिद्ध कर दंडित किया जाना न्यायोचित है। इसके लिए तीनों दोषियों को धारा 302/34 (हत्या) के तहत आजीवन कारावास और 1-1 लाख रुपए जुर्माना, धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत 10 वर्ष कठोर कारावास और 50-50 हजार रुपए जुर्माना, धारा 325 के तहत 7 वर्ष कठोर कारावास और 3-3 हजार रुपए जुर्माना, धारा 324 के लिए 3 वर्ष कठोर कारावास और 2-2 हजार रुपए जुर्माना और धारा 323 के तहत 1 वर्ष कठोर कारावास और 1-1 हजार रुपए जुर्माना से दंडित किया जाता है। उपरोक्त सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।






