ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से जुटी है। दूरदर्शी सोच के साथ लगातार मजबूत निर्णय लिए जा रहे हैं। जिसका परिणाम है कि अक्षय ऊर्जा एवं सौर ऊर्जा में राजस्थान अग्रणी राज्य है। प्रदेश की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता 41,189 मेगावाट हो गई है। विगत दो वर्षों में अक्षय ऊर्जा क्षमता में 17,820 मेगावाट की बढ़ोतरी की गई है।
मंत्री नागर गुरूवार को विद्युत भवन में ऊर्जा विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों को लेकर मीडिया प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उत्पादन, प्रसारण एवं वितरण, ऊर्जा क्षेत्र के इन सभी महत्वपूर्ण आयामों को मजबूती दी गई है। सौर ऊर्जा में भी राजस्थान देश में सिरमौर है। राज्य की स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता 35,337 मेगावाट है। बीते दो वर्षों में सौर ऊर्जा क्षमता में 17,325 मेगावाट का इजाफा हुआ है।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि प्रदेश के 22 जिलों में दिन के दो ब्लॉक में किसानों को विद्युत आपूर्ति की जा रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वर्ष 2027 तक किसानों को कृषि कार्य के लिए दिन में बिजली देने का संकल्प लिया है। इसकी क्रियान्विति के लिए हम मिशन मोड पर काम कर रहे हैं।
कुसुम योजना को दी गति—
मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि पीएम-कुसुम योजना में पूर्ववर्ती सरकार के समय 122 मेगावाट क्षमता के 92 सौर ऊर्जा संयंत्र ही स्थापित हुए थे। विगत दो वर्ष में ही इस योजना में 2345 मेगावाट क्षमता के 1048 सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए गए हैं। इससे सस्ती एवं सुलभ सौर ऊर्जा का कृषि क्षेत्र में उपयोग संभव हुआ है। कुसुम कम्पोनेन्ट-ए में राजस्थान देश में प्रथम तथा कम्पोनेन्ट-सी में तीसरे स्थान पर है।
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि विगत दो वर्ष में 1 लाख 95 हजार 825 कृषि कनेक्शन जारी किए गए जबकि प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकार ने अपने शुरूआती दो वर्षों में मात्र 1 लाख 63 हजार 258 कृषि कनेक्शन ही जारी किए थे।
प्रसारण तंत्र को किया सुदृढ़—
मंत्री नागर ने बताया कि प्रसारण तंत्र के सुदृढीकरण के लिए राज्य सरकार ने 400 केवी के 2, 220 केवी के 5 तथा 132 केवी के 41 सहित कुल 48 जीएसएस स्थापित किए हैं। जबकि पूर्ववर्ती सरकार के पूरे पांच वर्ष में प्रसारण के क्षेत्र में मात्र 44 जीएसएस ही स्थापित हो पाए थे।
उन्होंने कहा कि विगत दो वर्षों में प्रदेश में उपयोग हेतु कुल उत्पादन क्षमता में 6,839 मेगावाट की बढ़ोतरी हुई है। जबकि पूर्ववर्ती सरकार के पूरे पांच वर्षों में राज्य में उपयोग के लिए मात्र 3 हजार 958 मेगावाट उत्पादन बढाया गया था।
थर्मल इकाइयों को मिल रहा भरपूर कोयला—
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि उच्च स्तरीय प्रयासों से सरकार ने पीईकेबी कोल ब्लॉक से कोयले का खनन पुनः प्रारंभ करवाया। आज प्रदेश की थर्मल इकाइयों को भरपूर कोयला मिल रहा है। माह दिसम्बर, 2024 में कुल 775 कोल रैक प्राप्त हुई है, जो अब तक किसी माह में प्राप्त हुई सर्वाधिक कोल आपूर्ति है।
मार्च 2026 से केंटें एक्सटेंशन से कोयला खनन संभावित
मंत्री नागर ने बताया कि परसा कोल ब्लॉक से मार्च, 2025 से खनन प्रारंभ किया जा चुका है। एक अन्य कोल ब्लॉक ‘‘केंटें एक्सटेंशन’’ से भी लंबित स्वीकृतियां निरन्तर प्राप्त हो रही हैं। पर्यावरण एवं वन स्वीकृति के पश्चात मार्च 2026 से उक्त कोल ब्लॉक्स से खनन आंरभ किया जाना संभावित है। वर्तमान में पर्याप्त कोयले की आपूर्ति हो रही है।
उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर फोकस—
मंत्री नागर ने बताया कि सरकार ने विद्युत उत्पादन बढ़ाने पर पूरा फोकस किया है। केंद्रीय उपक्रमों के साथ संयुक्त उद्यम के अंतर्गत 42,438 मेगावाट क्षमता (4,095 मेगावॉट क्षमता की परंपरागत तथा 38,343 मेगावॉट क्षमता की अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं) को विकसित करने हेतु 1.93 लाख करोड़ रुपये के एमओयू हस्ताक्षरित किए गए। इनमें से 1.20 लाख करोड़ रूपये के निवेश की जॉइंट वेंचर कंपनी गठित की जा चुकी है। अक्षय ऊर्जा निगम एवं उत्पादन निगम को सरकार ने 22,987 मेगावाट क्षमता के सोलर पार्कां के लिए 44,247 हेक्टेयर भूमि आवंटित की है।
विकसित कर रहे देश का सबसे बड़ा सोलर पार्क—
उन्होंने बताया कि देश का सबसे बड़ा सोलर एनर्जी पार्क राजस्थान के पूगल में विकसित किया जा रहा है।
मंत्री नागर ने बताया कि बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित करने में भी राजस्थान आगे हैं। करीब 6 हजार मेगावाट ऑवर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम की निविदा प्रक्रिया में प्रदेश को सर्वाधिक न्यूनतम टैरिफ प्राप्त हुई है। इससे पीक ऑवर्स में महंगी बिजली खरीद से मुक्ति मिलेगी।
एटीएंडसी हानियों को लाए न्यूनतम स्तर पर—
मंत्री नागर ने बताया कि विद्युत वितरण तंत्र को सुदृढ़ किया गया है। जिससे जयपुर एवं अजमेर विद्युत वितरण निगम के एटीएण्डसी लॉसेज क्रमशः 14 प्रतिशत एवं 9.19 प्रतिशत के निचले स्तर पर आ गए हैं। जोधपुर डिस्कॉम की सकल वाणिज्यिक एवं तकनीकी हानि को भी लगभग 21 प्रतिशत तक लाया गया है। जयपुर डिस्कॉम के 18 में से 13 सर्किल डिफेक्टिव मीटर शून्य घोषित किए जा चुके हैं। माह जनवरी, 2025 मे अधिकतम मांग 19,165 मेगावाट रही जो कि अब तक की सर्वकालिक उच्चतम मांग है, जिसे बिना किसी विद्युत कटौती के पूरा किया गया।
इस अवसर पर ऊर्जा विभाग के प्रमुख शासन सचिव अजिताभ शर्मा, चेयरमैन डिस्कॉम्स आरती डोगरा, अक्षय ऊर्जा निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक रोहित गुप्ता, ऊर्जा विकास निगम के प्रबंध निदेशक ओम कसेरा, उत्पादन निगम के सीएमडी देवेन्द्र श्रृंगी भी मौजूद रहे।






