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जूली बोले-भाजपा सरकार के मुंह में राम बगल में छुरी:मनरेगा का नाम ‘जी राम जी’ कर खत्म करने की साजिश, केंद्र अब केवल 60% पैसा देगा

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा- केंद्र सरकार ने मनरेगा को खत्म करने की साजिश के तहत ही इसमें बदलाव किए हैं। भाजपा ने योजना का नाम बदलकर ‘जी राम जी’ कर दिया है। उन्होंने कहा-

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योजना का नाम ‘जी राम जी’ और मजदूरों के लिए काम का भी ‘जी राम जी’ कर दिया आपने, मतलब अंत कर दिया है।

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जूली प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। जूली ने कहा- महात्मा गांधी के अंतिम शब्द हे राम थे, लेकिन भाजपा इस नाम का राजनीतिक लाभ लेना चाहती है। भगवान श्रीराम तो तभी खुश हैं, जब गरीबों को रोजगार मिल रहा है। अब नाम बदल कर उसमें राम का नाम लेने से ‘मुंह में राम, बगल में छुरी वाली’ कहावत आप पर 100% सच साबित होती है।

पहले मनरेगा अधिकार था, अब वो नहीं रह गया नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा- जो पहले श्रमिकों का अधिकार था, राइट टू वर्क जो अब अधिकार नहीं रहा है। पहले यह कानून था कि श्रमिक फॉर्म नंबर छह भरेंगे और पंद्रह दिन में रोजगार मिलेगा। यदि नहीं मिला तो अधिकारी के खाते से पैसा कटेगा और उनको बेरोजगारी भत्ता मिलेगा। लेकिन आज अब वो बात नहीं रही।

जूली ने कहा- मनरेगा के फंडिंग पैटर्न में बदलाव कर 60:40 कर दिया है। पहले 90 फीसदी पैसा केंद्र देता था। अब केवल 60 प्रतिशत ही देंगे।
जूली ने कहा- मनरेगा के फंडिंग पैटर्न में बदलाव कर 60:40 कर दिया है। पहले 90 फीसदी पैसा केंद्र देता था। अब केवल 60 प्रतिशत ही देंगे।

योजना में अब 40 फीसदी पैसा राज्यों को देना होगा जूली ने कहा- मनरेगा के फंडिंग पैटर्न में बदलाव कर 60:40 कर दिया है। पहले 90 फीसदी पैसा केंद्र देता था। अब केवल 60 प्रतिशत ही देंगे। इस सरकार की साजिश है मनरेगा को खत्म करने की, क्योंकि राज्यों के पास इतना पैसा नहीं है कि अपना हिस्सा भी दे पाएंगे। केंद्र आधारित योजना हो जाए कि वह फंड तय करेंगे कि हमें मनरेगा में इतना पैसा देना है, वह उतना ही देंगे। उससे ऊपर का पैसा राज्यों को वहन करना पड़ेगा। जब डिमांड आधारित योजना है, मजदूरों को काम चाहिए तो उतना काम देना पड़ेगा।

दो महीने काम पर पाबंदी क्यों, जहां खेती नहीं होती, वहां का मजदूर कहां जाएगा? नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा- फसल कटाई के सीजन में मनरेगा काम पर रोक लगाना तर्कहीन है। कई पहाड़ी और बंजर इलाकों में खेती नहीं होती। ऐसे में वहां का मजदूर उन दो महीनों में अपने परिवार का पेट पालने के लिए कहां जाएगा? भाजपा को इस देश के गरीब और मजदूर से आखिर दिक्कत क्या है? पहले किसानों के खिलाफ काले कानून लाए गए। फिर लेबर कोड के जरिए श्रमिकों के हक छीने गए और अब मनरेगा मजदूरों पर प्रहार किया जा रहा है।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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