चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के मार्गदर्शन में चिकित्सा विभाग क्षय रोग मुक्त राजस्थान के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।इसी क्रम में टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत 25 दिसंबर 2025 से सक्रिय क्षय रोग खोज (Active Case Finding–ACF) अभियान का दूसरा चरण प्रारम्भ किया गया है, जो 15 जनवरी, 2026 तक संचालित किया जाएगा।
चिकित्सा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि यह अभियान 15 जनवरी 2026 तक संचालित किया जाएगा।अभियान का मुख्य उद्देश्य टीबी के छिपे हुए मामलों की शीघ्र पहचान कर समय पर उपचार उपलब्ध कराना है।उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत PLHIV, मधुमेह रोगी, 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग, कुपोषित व्यक्ति,धूम्रपान/मद्यपान करने वाले,प्रवासी श्रमिक,आदिवासी समुदाय, पूर्व टीबी रोगी,साथ ही खनन एवं निर्माण स्थलों,जेलों तथा शहरी झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों की घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की जा रही है।
जन स्वास्थ्य निदेशक डॉ.रवि प्रकाश शर्मा ने बताया कि अति संवेदनशील जनसंख्या की प्रभावी स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने हेतु राज्य एवं जिला स्तर पर अधिकारियों को स्पष्ट जिम्मेदारियाँ सौंपी गई हैं तथा अभियान की दैनिक प्रगति की समीक्षा की जा रही है।अभियान का यह दूसरा चरण राज्य में टीबी रोगियों की सक्रिय खोज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा नए रोगियों की पहचान कर टीबी उन्मूलन के प्रयासों में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा।
राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ.पुरुषोत्तम सोनी ने कहा कि राजस्थान में घर-घर जाकर क्षय रोग के लक्षणों की जांच का यह अभियान राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन लक्ष्य की दिशा में एक निर्णायक कदम है। जिला स्तरीय टीमों के सतत प्रयासों और आमजन की भागीदारी से अधिकतम संभावित रोगियों की समय पर पहचान संभव हो रही है,जिससे संक्रमण की श्रृंखला को प्रभावी रूप से तोड़ा जा सकेगा।
राज्य नोडल अधिकारी (टीबी मुक्त ग्राम पंचायत अभियान) डॉ.एस.एन. धौलपुरिया ने बताया कि सभी जिलों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में छूटे हुए परिवारों एवं आबादी की शीघ्र स्क्रीनिंग सुनिश्चित करें। चिकित्सा विभाग ने आमजन से अपील की है कि टीबी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच कराएं और इस अभियान में सक्रिय सहयोग प्रदान करें।






