उदयपुर जिले के गोगुंदा में सेमटाल गांव के किसान कपिलदेव पालीवाल पथरीली जमीन को उपजाऊ बनाकर आंवले की बागवानी कर रहे हैं। उनके 3 बीघा के बंजर खेत में अभी आंवले के 250 पेड़ भरपूर फल दे रहे हैं।
कपिलदेव बताते हैं कि हमारी जमीन बरसों से बंजर पड़ी थी। बंजर होने तथा पानी की उपलब्धता कम होने से ज्यादा खेती नहीं हो पाती। एक बार गुजरात से रिश्तेदार आम का पौधा लेकर आए। शुरुआत में यहां आम का पौधा लगाया। यह चल निकला तो उन्होंने सोचा कि दूसरी खेती संभव है। इसके बाद यहां आंवले लगाने आइडिया। आसपास में कहीं आंवले नहीं होते हैं। बंजर जमीन को जेसीबी मशीन से कुछ समतल करवाई।

टीले पर बनाया फार्म पौंड
पौधों तक पहुंचाने के लिए पहाड़ीनुमा टीले पर फार्म पौंड बनवाया। बारिश से एक महीने पहले गड्ढे खोद दिए ताकि अच्छी धूप लगे। बारिश से पहले गड्ढे खोदने का फायदा यह हुआ कि धूप से कीड़े या दूसरे जीवाणु मर जाते हैं।
बाद में देसी खाद के साथ आंवले के पेड़ बो दिए। आंवले की हाईब्रिड किस्म के पौधे उदयपुर की नर्सरी से मंगवाए। पालीवाल बताते हैं कि वैज्ञानिक तरीके से बंजर भूमि को तैयार करने का पौधों की बढ़वार में लाभ मिला। उन्होंने 3 फीट चौड़ा, 3 फीट गहरे गड्ढे खोदे। कई दिन तक धूप लगने के बाद इनमें पहली-दूसरी बारिश का पानी भरने दिया।
इसका फायदा यह हुआ कि पौधों की बढ़वार ज्यादा हुई। हाईब्रिड किस्म होने से ये तेजी से बढ़े। वे अब अन्य किसानों के साथ मिलकर औषधीय गुण वाले पौधे लगा रहे हैं। इसका नाम बालिका वन मजावड़ी रखा है।
आंवलों में कुछ सिंचाई बारिश के पानी से करते हैं तो कुछ सिंचाई फार्म पौंड से मिल जाती है। पालीवाल बोले कि पहाड़ी पर आंवले की बागवानी देखने आसपास के किसान आते हैं। आंवले के और पौधे उगाऊंगा। अभी इनकी सप्लाई के बारे में सोचा नहीं है। बागवानी की सफलता को देखकर आसपास के किसान अपने खेतों पर आंवले उगाने की तैयारी में है।
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