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चिकित्सा शिक्षा विभाग में सुशासन के लिए अभिनव पहल ‘ई-स्वास्थ्य संवाद’ डिजिटल मंच शुरू हर स्तर तक विभागीय समन्वय होगा मजबूत

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल एवं चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के निर्देशन में प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को निरंतर तकनीकी नवाचारों के माध्यम से सुदृढ़ किया जा रहा है।इसी कड़ी में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सुशासन, पारदर्शिता एवं प्रशासनिक दक्षता को बेहतर करने की दिशा में अभिनव पहल करते हुए डिजिटल संवाद मंच ‘ई-स्वास्थ्य संवाद’ शुरू किया है।यह मंच चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े सभी हितधारकों के लिए एक समर्पित,प्रभावी और संवादपरक ई-मीटिंग ईको—सिस्टम के रूप में कार्य करेगा।इससे निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक विभागीय समन्वय मजबूत होगा और स्वास्थ्य कार्यक्रमों की प्रभावी क्रियान्विति सुनिश्चित की जा सकेगी।

चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि स्वास्थ्य जन—जन से जुड़ी महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील विषय है।विभाग का कामकाज बेहतर समन्वय और दक्षता के साथ हो सके।इस सोच के साथ ‘ई-स्वास्थ्य संवाद’ जैसी पहल की गई है। इसके माध्यम से चिकित्सा शिक्षा विभाग, राज-मेस के अधिकारी,सरकारी मेडिकल,नर्सिंग एवं डेंटल कॉलेजों के प्राचार्य,चिकित्सा अधीक्षक,पीएमओ, विभागाध्यक्ष,फैकल्टी सदस्य, चिकित्सक,नर्सिंग एवं अन्य स्टाफ,छात्र तथा आमजन—सभी को त्वरित,पारदर्शी और समाधान-उन्मुख संवाद का सशक्त मंच प्राप्त होगा।

सप्ताह में दो दिन सीधा संवाद

चिकित्सा शिक्षा आयुक्त नरेश गोयल ने बताया कि यह डिजिटल संवाद मंच प्रत्येक मंगलवार एवं गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित किया जाएगा,जिससे विभागीय समन्वय और निर्णय प्रक्रिया को नई गति मिलेगी।यह संवाद दो चरणों में होगा।प्रथम चरण में शाम 5:00 बजे प्राचार्य,मेडिकल सुपरिटेंडेंट,पीएमओ एवं विभागाध्यक्षों के साथ संवाद होगा।द्वितीय चरण में शाम 6:00 बजे से मेडिकल कॉलेजों,संबद्ध अस्पतालों की फैकल्टी,डॉक्टर्स,नर्सिंग व अन्य स्टाफ,छात्र एवं आमजन के साथ खुला संवाद होगा।सुशासन दिवस पर प्रारंभ किए गए इस नवाचार को पहले ही दिन जबरदस्त समर्थन मिला। 150 से अधिक लोकेशन से अधिकारियों, चिकित्सकों एवं विद्यार्थियों ने आनलाइन संवाद किया।

इन विषयों पर होगा संवाद

बजट घोषणाओं एवं मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी दिशा—निर्देश,संपर्क पोर्टल, सीएमआईएस,मेडलीपआर,सीपी-ग्राम्स सहित विभिन्न माध्यमों पर प्राप्त शिकायतों का त्वरित निराकरण,स्वास्थ्य योजनाओं एवं पहलों का समयबद्ध क्रियान्वयन,नवाचार को प्रोत्साहन तथा कॉलेजों व अस्पतालों की दैनिक समस्याओं का समाधान,नए मेडिकल व नर्सिंग कॉलेजों सहित अन्य निर्माण कार्यों की समीक्षा तथा मशीनरी एवं उपकरणों की खरीद सहित प्रशासनिक एवं वित्तीय विषयों पर इस डिजिटल संवाद में चर्चा की जाएगी।

पारदर्शी प्रक्रिया एवं त्वरित कार्यवाही का उद्देश्य होगा पूरा

इस मंच के माध्यम से हितधारक अपनी समस्याएं एवं सुझाव पूर्व निर्धारित गूगल फॉर्म पर अग्रिम रूप से प्रस्तुत कर सकते हैं,हालांकि बिना एजेंडा के भी सहभागिता संभव होगी।
बैठक में लिए गए निर्णयों को ‘इंस्टेंट मिनट्स’ के रूप में रिकॉर्ड किया जाएगा तथा संबंधित अधिकारियों द्वारा 72 घंटे के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।सभी प्रकरणों की सतत निगरानी आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा कार्यालय द्वारा की जाएगी।इस दौरान गोयल ने बताया कि ‘ई-स्वास्थ्य संवाद’ चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता,जवाबदेही और त्वरित निर्णय प्रक्रिया को सुदृढ़ करेगा।मेडिकल कॉलेज की फैकल्टी,चिकित्सकों,नर्सिंग स्टाफ की समस्याओं का प्रभावी समाधान होगा। मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सुशासन की अवधारणा को धरातल पर साकार करने की दिशा में यह एक मील का पत्थर सिद्ध होगा।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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