Home » राजस्थान » जननी एक्सप्रेस सेवा बंद,गर्भवती महिलाओं की मुश्किलें बढ़ीं:नहीं मिल रही एंबुलेंस,सरकार ने 108 एम्बुलेंस से प्रेग्नेंट को हॉस्पिटल पहुंचाने के दिए आदेश

जननी एक्सप्रेस सेवा बंद,गर्भवती महिलाओं की मुश्किलें बढ़ीं:नहीं मिल रही एंबुलेंस,सरकार ने 108 एम्बुलेंस से प्रेग्नेंट को हॉस्पिटल पहुंचाने के दिए आदेश

प्रदेश में गर्भवती महिलाओं को घर से सरकारी अस्पताल तक पहुंचाने के लिए शुरू की गई 104 जननी एक्सप्रेस सेवा (एम्बुलेंस) अब बंद हो चुकी है। अब आम लोगों को गर्भवती महिलाओं या प्रसव के बाद की महिलाओं को लाने-ले जाने के लिए 108 नंबर पर कॉल करके सेवा लेनी होगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के निदेशक ने 108 की टेलीकॉल सेवा देने वाली कंपनी को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं।

गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल रही एंबुलेंस

दरअसल, 104 जननी एक्सप्रेस सेवा का संचालन मॉडर्न इमरजेंसी सर्विसेज कंपनी के पास था, जिसका एग्रीमेंट पिछले महीने 10 दिसंबर को समाप्त हो गया। इस सेवा के तहत पूरे प्रदेश में लगभग 600 एम्बुलेंस चलाई जा रही थीं। इन एम्बुलेंसों से गर्भवती महिलाओं को घर से अस्पताल ले जाने और प्रसव के बाद उन्हें वापस घर पहुंचाने की सुविधा उपलब्ध थी। लेकिन पिछले कुछ दिनों से यह सेवा ठप पड़ी हुई है,इस कारण कुछ दिनों से गर्भवती महिलाओं को एम्बुलेंस की सेवाएं नहीं मिल रही।

एसएमएस हॉस्पिटल जयपुर
एसएमएस हॉस्पिटल जयपुर

इसी समस्या को देखते हुए नेशनल हेल्थ मिशन (NHM ने अस्थायी रूप से 108 एम्बुलेंस सेवा को यह जिम्मेदारी सौंपी है। निदेशक ने अत्यावश्यक मामलों में 108 पर एम्बुलेंस उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। यह व्यवस्था तब तक जारी रखने के निर्देश दिए है जब तक 104 सेवा में लगी तमाम एम्बुलेंस गाड़ियां संबंधित जिलों के सीएमएचओ या संबंधित अधिकारी को हैंडओवर नहीं कर दी जाती।

जयपुर जे.के.लोन हॉस्पिटल आईसीयू वार्ड
जयपुर जे.के.लोन हॉस्पिटल आईसीयू वार्ड

टेंडर में देरी पर उठे सवाल

इधर NHM अधिकारियों की इस लापरवाही पर अब सवाल उठ रहे है। जब अधिकारियों को पहले से पता था कि दिसंबर 2025 में 104 जननी एक्सप्रेस सेवा का कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने जा रहा है, तो ऐसे में समय रहते टेंडर की प्रक्रिया शुरू क्यों नहीं की गई।

अधिकारियों ने इस सेवा के लिए नवंबर के आखिरी सप्ताह में टेंडर ​लगाए, जिसकी प्रक्रिया अब भी जारी है। ऐसे में जब तक टेंडर की प्रक्रिया पूरी नहीं होती और किसी दूसरी कंपनी को 104 एम्बुलेंस गाड़ियों का हैंडओवर नहीं दिया जाता, तब तक ये समस्या बनी रहेगी।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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