मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार बड़े निवेश के साथ-साथ प्रदेश के हस्तशिल्प, हथकरघा और एमएसएमई क्षेत्र के विकास के लिए भी कार्य कर रही है। इस क्रम में जनवरी, 2025 में एकीकृत क्लस्टर विकास योजना लागू की गई है। अब इस योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं।
राज्य में हस्तशिल्प, हथकरघा और एमएसएमई क्षेत्रों के विकास के लिए तकनीकी उन्नयन, कौशल विकास, गुणवत्ता में सुधार और बाजार विकास में सहयोग के लिए 100 फीसदी तक अनुदान का प्रावधान किया गया है।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त द्वारा 10 प्रोजेक्ट्स का अनुमोदन किया गया है। इसके तहत 9 जिलों के 10 क्लस्टर्स के उन्नयन के लिए खर्च होने वाले कुल 69 करोड़ रुपये में से करीब 58 करोड़ रुपये का अनुदान राज्य सरकार द्वारा दिया जाएगा।
उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्त सुरेश कुमार ओला ने बताया कि भरतपुर, हनुमानगढ़, फलोदी, कोटपूतली-बहरोड़, बालोतरा, दौसा और जयपुर में कॉमन फैसिलिटी सेंटर विकसित किए जाएंगे। इनमें आधुनिक मशीनें स्थापित की जाएंगी, जिनका उपयोग वहां की 100 से अधिक लघु और सुक्ष्म श्रेणी की औद्योगिक इकाइयां कर सकेंगी।
साथ ही, जयपुर, चूरू और झुंझनू के 300 से अधिक दस्तकारों को विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पर खर्च होने वाली पूरी राशि करीब 1.18 करोड़ रुपये राज्य सरकार द्वारा वहन की जाएगी।

राज्य सरकार द्वारा एमएसएमई एवं हस्तशिल्प विकास के लिए दिए जा रहे अनुदान और अन्य सहायता से गुणवत्ता तथा उत्पादन बढ़ेगा। साथ ही, उत्पाद को देश-विदेश में नई पहचान मिलेगी। यहां के उत्पादों की मांग बढ़ने से न केवल इन एमएसएमई इकाइयों की आय बढ़ेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
– सुरेश कुमार ओला, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग आयुक्त
कोटपूतली बहरोड़: आधुनिक मशीनों से उत्पादन में वृद्धि होगी
नीमराणा और बहरोड़ में इंजीनियरिंग फैब्रिकेशन का कार्य करने वाली 200 से अधिक इकाइयां कार्यरत हैं। इनमें से 15 इकाइयों ने एसपीवी बनाई है। इनके लिए एक कॉमन फैसिलिटी सेंटर विकसित किया जाएगा। इसमें सीएनसी प्रेस ब्रेक, फाइबर लेजर कटिंग और सीएनसी प्लाजमा मशीनें लगाई जाएंगी। इस पर होने वाले कुल खर्च 9.83 करोड़ रुपये में से 7.86 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा।
बालोतरा: कच्चे माल के लिए अन्य राज्यों पर निर्भरता खत्म होगी
बालोतरा, जसोल और बिथुजा में टैक्सटाइल प्रोसेसिंग की 600 से अधिक इकाइयां कार्यरत हैं। यहां 13 इकाइयों ने एक अलाभकारी कंपनी बनाकर योजना में आवेदन किया था। अब यहां कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाकर उसमें वाटर जेट लूम्स, वारपिंग मशीन लगाई जाएंगी। कपड़े से जुड़ा कार्य करने वाली इकाइयों को कच्चा माल अन्य राज्यों से लेना पड़ता है। इन मशीनों से अब यहीं पर कच्चा माल तैयार होगा। इस पर होने वाले कुल खर्च 9.75 करोड़ रुपये में से 8.76 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा।
दौसा और भरतपुर: अब आधुनिक मशीनों से पत्थर की नक्काशी होगी
दौसा के सिकंदरा, मानपुर और बांदीकुई क्षेत्र में पत्थर की नक्काशी का कार्य करने वाली 200 से अधिक औद्योगिक इकाइयों कार्यरत हैं। यहां की 15 इकाइयों ने कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाने के लिए आवेदन किया था। अब पत्थर की नक्काशी के लिए यहां स्टोन प्रोफाइलिंग, इनग्रेविंग और पिलर टर्निंग जैसी मशीनें लगाई जाएंगी। इस पर होने वाले कुल खर्च 10 करोड़ रुपये में से 8.30 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा।
भरतपुर के बयाना क्षेत्र में भी स्टोन प्रोसेसिंग का कार्य करने वाली 100 से अधिक इकाइयां कार्यरत हैं। इनमें से 15 इकाइयों द्वारा आवेदन के बाद एक कॉमन फैसिलिटी सेंटर बनाया जाएगा। इसमें स्टोन प्रोफाइलिंग, इनग्रेविंग और पिलर टर्निंग मशीनें लगाई जाएंगी। इस पर खर्च होने वाले 8.69 करोड़ रुपये में से 6.96 करोड़ रुपये अनुदान दिया जाएगा।
जयपुर: मशीन से बनेंगी रजाइयां
सांगानेर, मानसरोवर और सीतापुरा में होम फर्निशिंग के तकिया कवर, रजाई और बेडशीट बनाने वाली 60 से अधिक इकाइयां कार्यरत हैं। 15 इकाइयों के आवेदन के बाद अब यहां विकसित होने वाले कॉमन फैसिलिटी सेंटर में इन उत्पादों को बनाने वाली 3 आधुनिक मशीनें लगाई जाएंगी। इस पर होने वाले कुल खर्च 9.88 करोड़ रुपये में से 7.9 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा।
हनुमानगढ़: दूसरे राज्य से निर्भरता खत्म होने लागत कम होगी
सांगरिया में कृषि उपकरण बनाने वाली 50 से अधिक इकाइयां कार्यरत हैं। इनमें से 15 इकाइयों द्वारा किए गए आवेदन पर एक कॉमन फैसिलिटी सेंटर भी बनाया जाएगा। इसमें लेजर कटिंग, सीएनसी टर्निंग, प्रेस ब्रेक, लेजर वेल्डिंग, पाइप बेंडिग और आयरन वर्कर मशीनें लगाई जाएंगी। इस पर खर्च होने वाले करीब 10 करोड़ रुपये में 8 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा। इससे इन इकाइयों को दूसरे राज्यों से कार्य नहीं कराना पड़ेगा।
फलोदी: 15 फीसदी तक अपशिष्ट कम होगा
रीको क्षेत्र में सोनामुखी प्रसंस्करण से जुड़ी 50 से अधिक इकाइयां कार्यरत हैं। 14 इकाइयों के आवेदन पर बनने वाले कॉमन फैसिलिटी सेंटर में पूर्णतः स्वचालित प्रोसेस चेन और एग्रो वेस्ट ब्रिकेटिंग सिस्टम लगाया जाएगा। इसके लिए खर्च होने वाले कुल 10 करोड़ रुपये में करीब 9 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा। 15 फीसदी तक वेस्ट कम होने से उत्पादन में वृद्धि होगी।
लेदर और गोटा जरी के दस्तकारों को प्रशिक्षण
जयपुर के चाकसू और चूरू कस्बे में लेदर से जुती, चप्पल और बैग बनाने वाले 100-100 दस्तकारों को उत्पाद को और बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए क्रमशः 45.05 लाख और 47.69 लाख रुपये अनुमोदित किए गए हैं। साथ ही, झुंझुनू शहर और आस-पास के गांवों में गोटा जरी का कार्य करने वाली 100 महिलाओं के प्रशिक्षण पर 24.58 लाख रुपये व्यय किए जाएंगे।
योजना में आवेदन से स्थापना तक सहयोग
* एकीकृत क्लस्टर विकास योजना दिसंबर, 2024 में अधिसूचित और जनवरी, 2025 में विस्तृत दिशा- निर्देश जारी किए गए।
* इस योजना के तहत 3 वर्षों में राज्य में हथकरघा, हस्तशिल्प और एमएसएमई क्षेत्र के 50 क्लस्टर विकसित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
* प्रथम चरण में इस वर्ष 15 क्लस्टर के लिए 45 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे।
* एक ही स्थान पर कार्यरत कम से कम 20 समान उत्पादन वाले एमएसएमई उद्योग इकाइयां पात्र।
* योजना का लाभ लेने के लिए 10 से अधिक इकाइयों को एक अलाभकारी कंपनी बनाकर आवेदन करना होगा।
* उत्पादन, जांच, भंडारण, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग में सहयोग के लिए कुल लागत का 80 फीसदी तक अनुदान।
* हस्तशिल्पियों और बुनकरों के प्रशिक्षण के लिए 100 फीसदी तक अनुदान।
* आवेदन से लेकर प्रोजेक्ट स्थापना तक सहायता के लिए मुख्यालय पर विशेषज्ञों की एक टीम नियुक्त।
* जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र पर आवेदन और अन्य सहायता की सुविधा।






