पेयजल प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार पर एआई से लगाम लगेगी। विभाग पाइपलाइन डालने, टंकियां व ट्यूबवेल बनाने और कनेक्शन करने के कार्यों की निगरानी एआई से करेगा। जितना काम पूरा होगा उनता ही पेमेंट हो सकेगा। एमबी भरने का काम भी ऑनलाइन होगी। इसके लिए जलदाय विभाग अलग से ही सॉफ्टवेयर डवलप कर रहा है। इस पर 50 करोड़ रुपए खर्च होंगे। जलदाय विभाग के अतिरिक्त सचिव (आईटी इंचार्ज) संदीप शर्मा ने सॉफ्टवेयर का प्रस्ताव वित्त विभाग भेजा है। प्रस्ताव की मंजूरी के बाद यह लागू होगा। शेष | पेज 9
2500 करोड़ के घोटाले के बाद सख्ती
जल जीवन मिशन (जेजेएम) के टेंडरों, फर्जी प्रमाण पत्र, एडवांस पेमेंट और पाइपलाइन व टंकियां बनाने में हुए 2500 करोड़ के घोटाले से सबक लेते हुए जलदाय विभाग ने अब भ्रष्टाचार रोकने के लिए आईटी सिस्टम पर काम करने का फैसला किया है। आईटी सिस्टम से अब फील्ड में डाली जा रही पाइपलाइन व ट्यूबवेल सहित अन्य कार्य की मॉनिटरिंग की जाएगी। जिससे प्रोजेक्ट्स की मॉनिटरिंग सीधे दफ्तर से होगी।






