राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी को रविवार को संस्कृत काव्यग्रंथ ‘संजीवनी शतक भेंट की गई। यह कृति पण्डित रामस्वरूप दोतोलिया, आचार्य राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय, बिलोंची द्वारा रचित है। श्री सालासर बालाजी हनुमान जी का स्वरूप सेवा, शौर्य, त्याग और श्रद्धा का जीवंत प्रतीक है। बालाजी की भक्ति परंपरा में लोकभाव और शास्त्रीय चेतना का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है, जिसे संजीवनी शतक में संस्कृत काव्य की सशक्त एवं भावप्रवण भाषा में प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया है।
यह ग्रंथ केवल स्तुति-काव्य नही, बल्कि भक्त के जीवन में आध्यात्मिक चेतना, आशा और ऊर्जा का संचार करने वाली संजीवनी है। ‘संजीवनी शतक’ में सालासर धाम, महर्षि दधीचि, सालासर बालाजी के संस्थापक मोहनदासजी महाराज तथा दधिमति माता के पावन प्रसंगों के साथ सालासर बालाजी के चरित्र का सुसंगठित एवं काव्यात्मक वर्णन किया गया है। इस ग्रंथ का संपादन सुश्री मिताक्षरी दोतोलिया एवं सोमप्रभा दोतोलिया द्वारा किया गया है। इस अवसर पर विधायक बालमुकुंदाचार्य, नीरज वशिष्ठ सहित अनेक लोग उपस्थित थे।





