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जोधपुर में RTO की मिलीभगत से चल रही अवैध बस:6 नंबर रूट पर 52 सिटी बस, नियमों की अनदेखी कर धड़ल्ले से दौड़ती

जोधपुर में इन दिनों सड़क परिवहन विभाग (RTO) की मिलीभगत से शहर के कई रूट पर अवैध बसें संचालित हो रही है। ये बसें बिना स्पीड गवर्नर, बिना नियमों की पालना किए अवैध रूट पर दौड़ाई जा रही है( इस पूरे मामले पर RTO आकांक्षा बैरवा ने भी चुप्पी साध रखी है।

जोधपुर में 6 नंबर रूट के लिए दो बसें चलती है। एक लाल पट्टी को और एक पीली पट्टी की बस है। इन बसों को 15-15 दिन की अवधि में दो रूट पर रोटेशन के आधार पर चलाया जाता है।

6 नंबर की पीली पट्टी की बस का रूट 1 से 15 तारीख तक तनावडा गांव से घंटाघर तक का रूट है। लाल पट्टी वाली बस का 16 से 30 तारीख तक खोखरिया से न्यू पॉवर हाउस भगत की कोठी तक का रूट परमिट है। हर पंद्रह दिन में ये क्रम बदलता है।

सिटी बसों के संचालन को लेकर जारी किया गया परमिट जिसमें एक बस का रूट खोखरिया ढाणी से न्यू पॉवर हाउस तक ही है।
सिटी बसों के संचालन को लेकर जारी किया गया परमिट जिसमें एक बस का रूट खोखरिया ढाणी से न्यू पॉवर हाउस तक ही है।

इस तरह से करते खेल बस के संचालक लाल पट्टी की 6 नंबर रूट की बस को तनावड़ा गांव तक रोकने के बजाय 6 किलोमीटर आगे सालावास गांव तक अवैध रूप से संचालित कर रहे हैं। पीली पट्टी लगी बस को न्यू पावर हाउस बिजलीघर तक रोकने के बजाय उसे दस किलोमीटर आगे भरमी पेट्रोल पंप तक अवैध तरीके से चलाया जा रहा है।

धन्नाराम ने बताया कि जोधपुर के तनावड़ा गांव से सालावास की तरफ 26 बसे अवैध रूप से चल रही है। जबकि न्यू पावर हाउस से तनावड़ा तक भी 26 बस मिलाकर कुल 52 बस अवैध रूप से चल रही है। इन बसों को लेकर हमने साल 2021 से शिकायत करना शुरू किया, लेकिन RTO जानबूझकर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

जिन बसों का स्टॉपेज न्यू पॉवर हाउस तक है उन बसों का संचालन 10 किलोमीटर दूर पेट्रोल पंप से किया जा रहा है।
जिन बसों का स्टॉपेज न्यू पॉवर हाउस तक है उन बसों का संचालन 10 किलोमीटर दूर पेट्रोल पंप से किया जा रहा है।

संपर्क पोर्टल भी बना मजाक रूट पर अवैध बसों के संचालन को लेकर RTO के अधिकारी संपर्क पोर्टल पर भी शिकायत के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। अब तक अलग अलग नंबरों से 7 बार शिकायत की गई है, लेकिन इसके बावजूद स्थाई रूप से इन बसों का अवैध संचालन नहीं रोका गया है।

स्पीड गवर्नर भी दिखावा तय रूट से आगे अवैध तरीके से दौड़ने वाली बसों में स्पीड गवर्नर से लेकर वाहनों के फिटनेस की भी जांच नहीं की जाती है। इन बसों में निर्धारित सीमा में अधिकतम स्पीड 40 किमी है, लेकिन ये सिर्फ कागजों में है।

तेज रफ्तार सिटी बसों की वजह से पूर्व में भी कई हादसे भी सामने आ चुके हैं, लेकिन विभाग बेपरवाह है। वहीं इतनी शिकायतों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर DTO छगनलाल मालवीय ने कहा कि हम कार्रवाई करते हैं, अब यदि आपने संज्ञान में दिलाया है तो जल्द इन बसों पर कार्रवाई की जाएगी।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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