जोधपुर में आज सुबह डीजीजीआई (जीएसटी इंटेलिजेंस डायरेक्टरेट) की जयपुर से आई टीमों ने इवेंट, टैंट, डेकोरेशन, साउंड और कैटरिंग कारोबारियों पर बड़ी कार्रवाई की है। विभागीय सूत्रों का मानना है कि पिछले शादी के सीजन में जोधपुर में हुई हजारों शादियों की बुकिंग और इन फर्मों की ओर से भरे गए जीएसटी रिटर्न में भारी अंतर के संकेत मिले थे।
जीएसटी चोरी के इनपुट के बाद शहर के 8 प्रमुख ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की जा रही है। टीम मौके से कंप्यूटर सिस्टम, हार्ड डिस्क, पैन ड्राइव, डायरियां और कच्चे बिल खंगाल रही है। माना जा रहा है कि शाम तक इस कार्रवाई में करोड़ों रुपए की जीएसटी चोरी उजागर हो सकती है। कार्रवाई डीजीजीआई जयपुर के एडिशनल डायरेक्टर रामसिंह गुर्जर के नेतृत्व में की जा रही है।

सिंघवी टैंट सहित कई बड़े नाम रडार पर डीजीजीआई की राडार पर शादी-समारोहों में सेवा देने वाले शहर के वे सभी बड़े नाम हैं, जो टैंट, डेकोरेशन, साउंड और कैटरिंग का काम करते हैं। जिन फर्मों और जगहों पर टीमें पहुंची हैं, उनमें प्रमुख रूप से सिंघवी टैंट, बॉबी टैंट, श्री लवली टैंट, श्री अक्षिता टैंट, सुनीता टेंट, अक्षत दीप टैंट, अमृतम मैरिज गार्डन, राजन एम्लिफायर (साउंड), अमर कैटर्स (कैटरिंग) और मींटू कोलकाता फ्लॉवर्स है।
डीजीजीआई की टीमों ने जोधपुर शहर के सरदारपुरा के अलग-अलग इलाकों में स्थित सिंघवी टैंट और उनसे जुड़े ऑफिस, गोदाम, मकान और फार्म हाउस पर छानबीन शुरू की है। अधिकारियों ने दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की।

आखिर क्यों रडार पर आया जोधपुर का इवेंट बाजार? जीएसटी इंटेलिजेंस की यह कार्रवाई केवल एक सामान्य जांच नहीं है, बल्कि इसके पीछे इवेंट इंडस्ट्री में चल रहे बड़े ‘खेल’ का पर्दाफाश करना है। इस कार्रवाई के संभावित तकनीकी और व्यावहारिक कारण इस तरह बताए जा रहे हैं:
1. ‘कच्ची पर्ची’ का खेल: इवेंट मैनेजमेंट और टेंट व्यवसाय में आज भी 70-80% लेन-देन नकद (Cash) में होता है। ग्राहक को बिना जीएसटी वाला ‘कच्चा बिल’ देकर उसे टैक्स बचाने का लालच दिया जाता है, जबकि असल में यह सरकार के राजस्व की चोरी है। डीजीजीआई को शक है कि यहां करोड़ों का टर्नओवर बुक्स में दिखाया ही नहीं गया।
2. इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) में गड़बड़ी: अक्सर टेंट व्यवसायी सामान खरीदने पर जो जीएसटी चुकाते हैं, उसका आईटीसी क्लेम तो ले लेते हैं, लेकिन आगे सर्विस देने पर जो 18% जीएसटी सरकार को जमा कराना होता है, उसे नकद लेन-देन के जरिए दबा जाते हैं।
3. शादी के सीजन का डेटा मिलान: पिछले शादी के सीजन में जोधपुर में हजारों शादियां हुईं। संभव है कि विभाग ने मैरिज गार्डन्स की बुकिंग लिस्ट और इन फर्मों द्वारा भरे गए जीएसटी रिटर्न का मिलान किया हो, जिसमें भारी अंतर पाया गया।
4. जयपुर कनेक्शन: हाल ही में जयपुर के बड़े इवेंट कारोबारियों पर भी ऐसी ही कार्रवाई हुई थी। वहां मिले दस्तावेजों और डायरियों में जोधपुर के इन फर्मों के साथ लेन-देन (सब-कॉन्ट्रैक्टिंग) के सुराग मिले हो सकते हैं, जिसके बाद यह कड़ी जुड़ी है।






