Home » राजस्थान » जनता बनी पुलिस की ‘आंख और कान’: राजस्थान में 2.45 लाख कम्युनिटी वॉलिंटियर्स संभाल रहे सुरक्षा का मोर्चा

जनता बनी पुलिस की ‘आंख और कान’: राजस्थान में 2.45 लाख कम्युनिटी वॉलिंटियर्स संभाल रहे सुरक्षा का मोर्चा

अपराध मुक्त राजस्थान के संकल्प को साकार करने के लिए राजस्थान पुलिस अब केवल लाठी और बंदूक के भरोसे नहीं, बल्कि जन-जन के सहयोग से आगे बढ़ रही है। महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देशन में पुलिस मुख्यालय की कम्यूनिटी पुलिसिंग शाखा ने समाज के विभिन्न वर्गों को पुलिस के साथ जोड़कर एक अभेद्य सुरक्षा चक्र तैयार किया है। वर्तमान में राज्य में सीएलजी मेंबर, पुलिस मित्र, ग्राम रक्षक, स्टूडेंट पुलिस कैडेट और सुरक्षा सखियों के रूप में करीब 2.45 लाख वॉलिंटियर्स पुलिस के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रहे हैं।
सी.एल.जी.: पुलिस को जनमित्र बनाने की सबसे मजबूत कड़ी
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (सिविल राइट्स, मानव अधिकार एवं कम्युनिटी पुलिसिंग लता मनोज कुमार ने बताया कि राजस्थान पुलिस अधिनियम 2007 के तहत गठित सामुदायिक सम्पर्क समूह (सी.एल.जी.) आज पुलिस और जनता के बीच सकारात्मक संवाद का सबसे बड़ा मंच बन चुका है। राज्य में जिला, थाना और वार्ड स्तर पर कुल 82,065 सी.एल.जी. सदस्य सक्रिय हैं। दिसंबर 2025 तक पुलिस ने इन सदस्यों के साथ 29,158 बैठकें आयोजित कर स्थानीय समस्याओं का समाधान किया है। ईद की नमाज हो या होली-दिवाली के मेले, ये सदस्य सौहार्द बनाए रखने में पुलिस के मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहे हैं।
पुलिस मित्र और ग्राम रक्षक: संकट के साथी और ग्रामीण प्रहरी
पुलिस मित्र योजना ने पुलिस के प्रति आमजन का नजरिया बदला है। प्रदेश में 40,867 पुलिस मित्र अपनी स्वेच्छा से यातायात संचालन, नाकाबंदी और सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुँचाकर उनकी जान बचा रहे हैं। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में अपराधों पर लगाम लगाने के लिए 24,443 ग्राम रक्षकों को सूचीबद्ध किया गया है। ये रक्षक ग्रामीण इलाकों में रात्रि गश्त और सूचना संकलन के जरिए पुलिस के सूचना तंत्र को मजबूत कर रहे हैं।
सुरक्षा सखी और कालिका यूनिट: महिलाओं के लिए सुरक्षा की नई ढाल
महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राजस्थान पुलिस ने सुरक्षा सखी के रूप में क्रांतिकारी पहल की है। वर्तमान में 21,953 महिलाएं सुरक्षा सखी के रूप में पुलिस और पीड़ित के बीच सेतु का कार्य कर रही हैं। इसके साथ ही, सार्वजनिक स्थानों पर छेड़छाड़ रोकने के लिए राज्य में 500 कालिका पेट्रोलिंग यूनिट्स का गठन किया गया है। यह संवेदनशील पहल न केवल अपराधों पर अंकुश लगा रही है, बल्कि समाज में निर्भीक नारी की संकल्पना को साकार कर रही है।
सशक्त बेटियां और अनुशासित युवा:
एडीजी लता मनोज कुमार ने बताया कि महिलाओं को शारीरिक रूप से सशक्त बनाने हेतु महिला शक्ति आत्मरक्षा प्रशिक्षण के तहत दिसंबर 2025 तक रिकॉर्ड 14,83,030 महिलाओं व बालिकाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है। वहीं भावी पीढ़ी में नैतिक मूल्यों के विकास हेतु स्टूडेन्ट पुलिस कैडेट (SPC) योजना के तहत वर्तमान सत्र 2025-26 में 75,571 विद्यार्थी (927 राजकीय एवं 78 केन्द्रीय विद्यालयों से) प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जो भविष्य के जिम्मेदार नागरिक बन रहे हैं।
ASP सुनीता मीना का विजन: पुलिसिंग में जन-भागीदारी ही असली ताकत
कम्युनिटी पुलिसिंग के बढ़ते प्रभाव और इसकी सफलता पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनीता मीना ने विशेष जोर दिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस और जनता के बीच की दूरी को कम करना ही इस शाखा का मुख्य ध्येय है। एएसपी मीना के अनुसार जब एक आम नागरिक, महिला या युवा सुरक्षा सखी या पुलिस मित्र के रूप में विभाग से जुड़ता है, तो वह केवल एक वॉलंटियर नहीं बल्कि खाकी का मददगार चेहरा बन जाता है।
उनके नेतृत्व में प्रदेश भर में आयोजित 26,129 पुलिस जन-सहभागिता कार्यक्रमों के जरिए अब तक 8,73,259 लोगों से सीधा संवाद स्थापित किया गया है। मीना ने बताया कि यह पहल साबित करती है कि जब पुलिस और जनता के बीच विश्वास का रिश्ता बनता है, तो कानून-व्यवस्था बनाए रखना आसान हो जाता है और सामाजिक समरसता बढ़ती है।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

0
0

RELATED LATEST NEWS

infoverse academy

Top Headlines

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 207 नवीन बसों को दिखाई हरी झण्डी

सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था होगी सुदृढ़,आमजन को मिलेगी बेहतर यातायात सुविधाएं मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को राजस्थान दिवस एवं हिन्दू नववर्ष की