बुधवार को लोक सभा में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष व नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने रेल परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण हेतु उचित मुआवजा देने से जुड़ा प्रश्न पूछा,सांसद द्वारा पुष्कर मेड़ता व रास – मेड़ता रेलवे लाइन सहित अन्य परियोजनाओं में दिए जा रहे मुआवजे को लेकर पूछे गए सवाल का लिखित जवाब देते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भूमि अधिग्रहण हेतु मुआवजे का भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जाता है जो भूमि अधिग्रहण अधिनियमों के प्रावधानों के अनुसार मुआवजे की राशि संबंधी निर्णय लेती है,मंत्री ने कहा कि
पुष्कर-मेड़ता और रास-मेड़ता नई लाइन परियोजनाओं में संरेखण संबंधी अभ्यावेदन प्राप्त हुए थे।तदनुसार,सभी तकनीकी-आर्थिक कारकों पर विचार करने के बाद ही संरेखणों को अंतिम रूप दिया गया था जिसमें सुनिश्चित किया गया है कि रेल लाइन निर्माण हेतु न्यूनतम भूमि का अधिग्रहण किया जाए। पुष्कर-मेड़ता (कात्यासानी) नई लाइन (51.346 कि.मी.) और मेड़ता सिटी-रास नई लाइन (51.40 कि.मी.) के लिए भूमि अधिग्रहण रेल अधिनियम, 1989 के तहत शुरू किया गया है वहीं
राजस्थान राज्य में अधिग्रहण के लिए भूमि का कुल क्षेत्र 4711 हेक्टेयर है, जिनमें से 2462 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया है और शेष 2248 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है।सांसद के मूल प्रश्न का जवाब देते हुए मंत्री ने यह भी बताया कि राजस्थान राज्य में पूर्णतःअंशतःपड़ने वाली अवसंरचना परियोजनाओं और संरक्षा कार्यों के लिए वर्ष 2009 से 2014 तक 682 करोड़ रुपए तथा 2025-26 में 9960 करोड़ रुपए का बजट आवंटन किया गया |
सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मूल प्रश्न को भ्रमित करने वाला जवाब दिया,उन्होंने कहा कि मेड़ता से पुष्कर व रास-मेड़ता तक अवाप्त होने वाली कृषि भूमि के एवज में अच्छा मुआवजा किसानों को देने का वादा प्रतिनिधिमंडल के समक्ष खुद मंत्री ने किया मगर बाद में वो वादे से मुकर गए,सांसद ने कहा कि रेल मंत्री खुद राजस्थान से आते हैं मगर यह दुर्भाग्य है कि उन्हें धरातल पर रेल परियोजनाओं से प्रभावित होने वाले किसानों के भविष्य की कोई चिंता नहीं है|






