उपचार व्यवस्थाओं की समीक्षा की, कहा — प्रकरण में होगी सख्त से सख्त कार्रवाई
न्यूज इन राजस्थान जयपुर/कोटा सुनील शर्मा
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ सोमवार शाम को कोटा पहुंची और कोटा न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक में उपचाररत प्रसूताओं एवं उनके परिजनों से मिलीं। उन्होंने चिकित्सकों से प्रसूताओं के स्वास्थ्य के बारे में विस्तार से जानकारी ली। प्रसूताओं के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें बेहतर उपचार का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि प्रकरण में जो भी दोषी पाया जाएगा, सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रमुख शासन सचिव ने आईसीयू में उपचाररत प्रसूता पिंकी, धन्नी बाई एवं आरती के परिजनों से बातचीत की। परिजनों ने वर्तमान उपचार व्यवस्था पर संतोष जताया। राठौड़ ने कहा कि वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. धनंजय अग्रवाल की निगरानी में उपचार किया जा रहा है। इलाज में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रखी जाएगी। प्रमुख शासन सचिव ने आईसीयू में भर्ती में प्रसूता रागिनी मीणा से बात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। रागिनी की हालत में काफी सुधार हुआ है। मेडिकल कॉलेज, कोटा के नेफ्रोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. विकास खंडेलिया ने सभी प्रसूताओं के वर्तमान में चल रहे इलाज के बारे में जानकारी दी।
गायत्री राठौड़ ने नेफ्रोलॉजी वार्ड में शिफ्ट की गई प्रसूता चंद्रकला एवं सुशीला से बात कर उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछा। दोनों प्रसूताओं के परिजनों ने बताया कि अभी उनकी स्थिति पहले से काफी बेहतर है और वरिष्ठ चिकित्सकों के निर्देशों के अनुसार इलाज चल रहा है।प्रमुख शासन सचिव ने भरोसा दिलाया कि आईसीयू में भर्ती प्रसुताओं का जयपुर से आए वरिष्ठ चिकित्सकों एवं मेडिकल कॉलेज कोटा के वरिष्ठ चिकित्सकों की निगरानी में प्रॉपर तरीके से इलाज किया जाएगा।
प्रसूताओं से मिलने के बाद प्रमुख शासन सचिव ने न्यू मेडिकल कॉलेज स्थित एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक के हॉल में उच्च स्तरीय बैठक ली। उन्होंने सभी वरिष्ठ चिकित्सकों से जानकारी ली एवं इस दुर्भाग्यपूर्ण घटनाक्रम के सभी कारणों पर चर्चा की।बैठक में उन्होंने निर्देश दिए कि अस्पतालों में इरमजेंसी ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू आदि में ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल की सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल एवं ऑपरेशन थिएटर संक्रमण मुक्त हों इसका ध्यान जिला अस्पतालों एवं पीएचसी-सीएचसी स्तर पर भी रखा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रमुख शासन सचिव ने कहा कि अस्पतालों में प्रोटोकॉल्स की पालना की मॉनिटरिंग की जाएगी। जहां सुधार की आवश्यकता हो, वहां तत्काल सुधार की कार्यवाही की जाएगी। श्रीमती राठौड़ ने कहा कि कोटा के इस प्रकरण में हर पहलू पर निष्पक्ष एवं गहन जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए चिकित्सकों एवं नर्सिंग कार्मिकों पर सख्त कार्रवाई की गई है। आगे कभी भी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हुई तो संस्थान प्रभारी एवं यूनिट हेड इसके लिए उत्तरदायी होंगे। राठौड़ ने कहा कि सभी अस्पताल प्रभारी आपातकालीन इकाई, आईसीयू एवं ओपरेशन थियेरटर की व्यवस्थाओं की गहन जांच करें। यह सुनिश्चित करें कि इन इकाइयों में नियमित रूप से स्टरलाइजेशन हो, ताकि संक्रमण फैलने की आशंका नहीं रहे। उपचार में काम लिए जाने वाले उपकरणों एवं मशीनों का भी प्रोटोकॉल के अनुरूप स्टरलाइजेशन हो। अस्पताल प्रभारी एवं यूनिट हेड नियमित रूप से मॉनिटरिंग करें कि अस्पताल में उपचार के सभी प्रोटोकॉल पूरे किए जा रहे हैं या नहीं। राठौड़ ने कहा कि अस्पतालों में चिकित्सक एवं नर्सिंग स्टाफ जिम्मेदारी से अपनी ड्यूटी का निर्वहन करे। यह सुनिश्चित हो कि सर्जरी के लिए वरिष्ठ सर्जन उपस्थित रहें। ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू, आपातकालीन इकाई सहित अन्य संवेदनशील स्थानों पर सीनियर डॉक्टर आवश्यक रूप से उपस्थित रहें।
बैठक में जिला कलक्टर पीयूष समारिया, पुलिस अधीक्षक शहर तेजस्वनी गौतम, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्त डॉ. टी. शुभमंगला, निदेशक जनस्वास्थ्य डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, कोटा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. निलेश जैन, एसएमएस के वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. धनंजय अग्रवाल एवं जयपुर से आए वरिष्ठ चिकित्सकों सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
Author: newsinrajasthan
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