जयपुर की मुहाना मंडी में टमाटर, गोभी, मटर जैसी सब्जियों के दाम गिर गए हैं, जिससे किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। मुहाना मंडी में व्यापारियों के लिए भी मुश्किलें बढ़ गई हैं। मंडी में इतनी सब्जी आ रही है कि न तो किसानों को सही दाम मिल पा रहे हैं। न ही व्यापारी इन्हें आसानी से बेच पा रहे हैं। टमाटर 4 से 5 रूपए किलो मिल रहा है। उसे खरीदने वाला कोई नहीं है। हालात ये है कि इन सब्जियों को फेंकना पड़ रहा है।
जयपुर फल एवं सब्जी थोक विक्रेता संघ मुहाना के अध्यक्ष योगेश तंवर ने बताया- 14 दिसंबर से मलमास शुरू होने के बाद से मंडी में भारी मात्रा में सब्जियां पहुंच रही हैं। मांग के मुकाबले ज्यादा सप्लाई होने से कीमतें लगातार गिर रही हैं। हमें उम्मीद थी कि मलमास के बाद सावे शुरू होंगे। इसके बाद सब्जियों के दाम में तेजी आएगी। ऐसा नहीं हुआ। इसके विपरीत बाजार में सब्जियों की डिमांड कम और सप्लाई ज्यादा हो गई। इससे उम्मीद के अनुरूप भाव नहीं मिल पा रहा। मंडी में सब्जियां इतनी आ गई है कि इन्हें फेंकनी पड़ रही है।
योगेश तंवर ने बताया- नींबू को छोड़कर बाकी सभी सब्जियों के दाम गिर गए हैं, जिससे किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। यहां तक की 300 से 400 रूपए किलो तक बिकने वाला लहसुन भी 80 से 100 रूपए किलो के भाव पर बाजार में बिक रहा है। प्याज और आलू के भाव भी कम हुए हैं।
बाहर से आने वाली सब्जियों की मांग घटी
गुजरात से तुरई, मिर्ची, करेला, कद्दू और लौकी जैसी सब्जियां आ रही हैं, लेकिन लोकल उत्पादन बढ़ने से इनकी मांग कम हो गई है। व्यापारी भी अधिक माल खरीदने से बच रहे हैं, जिससे किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है।
सब्जियों के थोक भाव
| सब्जी | थोक कीमत प्रति किलो |
| हाइब्रिड टमाटर | 8 से 10 रुपए |
| देसी टमाटर | 4 से 5 रुपए |
| गोभी | 2 से 5 रुपए |
| मटर | 10 से 15 रुपए |
| गाजर | 8 से 12 रुपए |
| पत्ता गोभी | 2 से 6 रुपए |
| कद्दू | 6 से 7 रुपए |
| आलू | 8 से 10 रुपए |
| प्याज | 20 से 30 रुपए |
| लहसुन | 80 से 100 रुपए |
| बैंगन | 3 से 8 रुपए |
| लौकी | 10 से 12 रुपए |
| नींबू | 40 से 45 रुपए |
गायों को खिलानी पड़ रही सब्जी
मुहाना के व्यापारी महेश कुमार ने बताया- 40 साल से मंडी में व्यापार कर रहा हूं, लेकिन ऐसी मंदी नहीं देखी। सब्जियों के दाम ही नहीं मिल रहे। हमारी कोशिश रहती है कि किसानों को कम से कम किराया तो मिले। बाजार से मांग ही नहीं हो रही है। ऐसे में हम उन्हें भाव क्या दें। स्थिति ये हो गई है कि प्लेटफार्म पर सब्जियां पड़ी हुई हैं। खरीददार नहीं है। सब्जियां खराब हो जाती है। ऐसे में गौशालाओं को भेजनी पड़ रही है। सब्जियों के भाव में गिरावट इतने दिनों तक इससे पहले देखने को नहीं मिली।
तीन महीने से मंदी का सामना कर रहे गुजरात के पालमपुर से आए किसान खालिद ने बताया- हम पिछले तीन महीने से मंदी का सामना कर रहे है। मैं लौकी, कद्दू लेकर आया था। लेकिन हमें लागत भाव भी नहीं मिल रहा। दो दिन से मंडी में सब्जियों के बिकने का इंतजार कर रहे हैं।
सस्ते दामों के बावजूद आम जनता को नहीं मिल रहा लाभ
मंडी में सब्जियां सस्ती होने के बावजूद इसका सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंच पा रहा है। बाजार में सब्जियों के रेट ज्यादा हैं, जबकि किसान घाटे में हैं। किसानों और व्यापारियों का कहना है कि जिस तरह सरकार टमाटर, प्याज और आलू के दाम बढ़ने पर सहकारी समितियों के माध्यम से सस्ती दरों पर बिक्री करवाती है, उसी तरह अब किसानों के हित में कदम उठाने चाहिए। अगर सरकार हरी सब्जियों और टमाटर को सीधे जनता तक उपलब्ध कराए तो किसानों को कम से कम उनकी लागत तो मिल सकेगी।






