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विधानसभा में हंगामे पर 6 सदस्यों के निलंबन के बाद अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से बातचीत

विधायकों के निलंबन की नौबत आखिर क्यों आई ?

विपक्षी सदस्य डायस पर चढ़कर आसन को ललकारने लगे। हाथों के एक्शन ऐसे थे कि जैसे उनकी मंशा आसन पर हमला करने की हो। विपक्षी सदस्यों का यह रवैया बेहद की अशोभनीय था। विपक्ष के इस आचरण को लेकर सत्ता पक्ष की ओर से निलंबन का प्रस्ताव आया, जिसे सदन ने मंजूर कर दिया।

आपसी सहमति से विवाद को समाप्त क्यों नहीं करवाया जा सका?

दोपहर 12.30 बजे विपक्षी सदस्य चैंबर में मेरे पास आए थे। मैंने आग्रह किया कि माफी मांग लीजिए। लेकिन, उन्होंने कहा कि ऐसे कैसे माफी मांग लें। अभी तो और हंगामा करेंगे। आसानी से मानने वाले नहीं है। कुल मिलाकर विपक्षी सदस्य सदन में किए गए अपने आचरण पर अडिग थे।

पक्ष और विपक्ष के बीच नोंक-झोंक में आसन निशाने पर क्यों आ गया? इसकी जिम्मेदारी किसकी है ?

मेरे अपने राजनीतिक जीवन में विपक्षी सदस्यों का ऐसा नजारा नहीं देखा। विपक्षी आसन तक पहुंचकर हाथ लहराने लगे। मैं भी पांचवीं बार सदन का सदस्य बना हूं। सदन की गरिमा के विपरीत आचरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

गतिरोध ऐसे ही होते रहे तो फिर सदन चलेगा कैसे?

मेरा इतना ही कहना है कि जिस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आसन को धमकाने की कोशिश करते हैं। गरिमा के विपरीत व्यवहार करते हैं। वे अन्य सदस्यों को क्या संदेश देंगे। उनका आचरण कतई मर्यादित नहीं कहा जा सकता।

कांग्रेस कह रही है कि आप माफी मांगें, मांगेंगे?

मंत्री अविनाश गहलोत – मैं माफी क्यों मांगू. क्या कांग्रेस दादी शब्द को असंसदीय मानती है

विपक्ष का आरोप है कि आपने पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का अपमान किया?

किसी को दादी, नानी, काकी, काका, चाचा आदि कहना सम्मान का सूचक होता है, न कि अपमान का। ऐसा हम आमतौर पर गांवों में, परिवार के बीच आते-जाते हैं तो कहते ही हैं। इसमें उनको सम्मान के ही भाव होते हैं। विपक्ष को हर बात में अपमान क्यों महसूस होता है।

माफी मांगने को कह रहे हैं, क्या मांगेंगे?

जूली जी ने प्रेस के सामने कहा है कि हां, इंदिरा जी हमारी दादी हैं, तो यहां उन्हें आपत्ति क्यों है? आज हम महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता नहीं मानते क्या? वे खुद ही जो शब्द बोल रहे हैं, वही मैंने भी कहा है, तो मुझे माफी किस बात के लिए माननी चाहिए।

यदि शब्द कार्यवाही से निकाल दिए जाएं तो आपको कोई हर्ज है क्या?

कांग्रेसी यह कह दें कि इंदिरा गांधी उनकी दादी समान नहीं हैं तो मैं भी कहने को तैयार हूं कि मैंने जो कहा वह गलत है। इंदिरा गांधी हमारी सम्माननीय हैं।

आपको नहीं लगता कि आपकी इस टिप्पणी से पूरा दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया?

मुद्दों को भटकाने के लिए कांग्रेस के अपने ही विधायक व्यवधान करते हैं। इसके लिए मैं जिम्मेदार नहीं हूं।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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