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आज जोधपुर सर्किट हाउस में नवनियुक्त जिला अध्यक्षों के संबंध में अशोक गहलोत मीडिया से हुए रूबरू

बहुत ही अच्छा सिलेक्शन हुआ है। प्रयास किया गया है। जो अभिनव प्रयोग राहुल गांधी जी और खड़गे साहब ने किया, उसमें पूरे देश में जिलों में अधिकांश जगह पर बहुत सीनियर लोगों को भेजा गया, और ये प्रयास कर रहे हैं कि लोगों से बात करके और कार्यकर्ताओं से पूछ करके देखें और बाकायदा छह-छह नाम का सलेक्शन किया गया ,उसके बाद में पूरा प्रोसेस हुआ तथा उसके बाद फैसला हुआ है।
तो मैं समझता हूं राजस्थान में अच्छे फैसले हुए हैं। अब हमारे सामने चुनौती का समय है। देखिए, फैसला हुआ एक बात है, अब दो बातें हैं, एक तरफ तो हाईकमान ने, खड़गे साहब ने, राहुल जी ने नए अध्यक्षों पर विश्वास किया है , और दूसरा अब जो है उनको बधाई है, हमारी शुभकामनाएं हैं। जो बन गए हैं उनको मेरा संदेश और आग्रह रहेगा कि वो आप सबको साथ लेकर वहां पर संगठन को मजबूत करें, ब्लॉक, मंडल और बूथ कमेटी बनाएं।
अभी चल रहे एसआईआर में भागीदारी निभाएं और राहुल जी इस फासिस्ट गवर्नमेंट का मुकाबला कर रहे हैं इसका लोकतंत्र में कोई यकीन नहीं है, तो इस काम के लिए राहुल जी के हाथ कैसे मजबूत करें, इसका संकल्प करें और सबको साथ लेकर चलें। यह मेरा कहना रहेगा।

पूर्व विधायकों एवं विधायकों को भी जिम्मेदारी मिलने पर प्रश्न का जवाब :

ये छोड़िए, वो तो पार्टी के लोग हैं। सोच समझ के फैसले हुए हैं। अब सबका तो हो नहीं सकता देखिए, शिकायत तो रहेगी। इन जिलों में दूसरे बन जाते तो और लोगों की शिकायतें होती। वो तो होगा ही होगा देखिए।

मैं खुद जिला अध्यक्ष बना था जोधपुर के अंदर, ठीक है? पचास साल हो गए मुझे। मेरे लिए पर्यवेक्षक कौन थे मालूम है आपको? शिवचरण माथुर जी, जो पहले बाद में मुख्यमंत्री बने, हीरालाल देवपुरा जी जो बहुत ही सीनियर नेता थे। दोनों पर्यवेक्षक आए थे जोधपुर के अंदर।

मुझे बनाया गया तो उस वक्त भी लोग नाराज हुए थे। पर मैंने क्या किया? मैं तमाम जो नाराज लोग थे, उनको मैंने लगातार संपर्क में रखा, उनका आशीर्वाद लिया। हर मीटिंग के लिए मैं टेलीफोन को करता था बुलाने के लिए। कभी आते, कभी नहीं आए होंगे, पर धीरे-धीरे ऐसी स्थिति बन गई कि पूरी कांग्रेस, जिला कांग्रेस कमेटी एकजुट हो गई।

इंदिरा गांधी जी का जेल भरो अभियान था, सब लोगों ने भाग लिया, उस समय के लोगों ने। और मौका ऐसा आया कि जब पार्लियामेंट चुनाव आए, वही लोग जो मेरे खिलाफ थे यहां पर, तत्कालीन समय के अंदर, उन सब ने मेरा साथ दिया और सब ने मिलकर मुझे लोकसभा का उम्मीदवार बनवाया। यह होता तरीका काम करने का।

मैं उम्मीद करता हूं कि अब जो बने अध्यक्ष वो भी उसी रूप में काम करेंगे। कोई नाराज है या राजी है, सबको साथ लेकर चलें, नाराज है उनका दिल जीतें। ये तरीका होता है काम करने का।

संगठन है, मंत्री बनना आसान है। मंत्री किसी को बना दीजिए केंद्र में, राज्यों में, पर संगठन का प्रदेश अध्यक्ष बनाना हो, जिला का बनाना हो या ब्लॉक का बनाना, बड़ा मुश्किल काम होता है। जब तक उनमें कैपेसिटी नहीं होती है कि सबको साथ लेकर मैं चल सकूं, तब तक वह कामयाब हो ही नहीं सकता।

राहुल गांधी जी ने फैसला कर रखा है — अब जो नए बने हैं, ये अगर काम नहीं करेंगे तो इनको हटाते जाएंगे साथ-साथ में। ये भी एक नई बात शुरू कर ली है। और इनके कैंप लगता है आजकल, दस-दस दिन के कैंप लगते हैं। बाकायदा राहुल गांधी जी खुद एक दिन, दो दिन जाते हैं।

तो कहने का मतलब कांग्रेस के अंदर ये जो नया प्रयोग शुरू हुआ है, मैं उम्मीद करता हूं इसके परिणाम अच्छे आएंगे।

पूर्व जिलाध्यक्ष के तौर पर नए को राय देने संबंधी प्रश्न गहलोत का जबाव
अच्छा काम किया हमारे सलीम साहब ने भी और महेश जी ने भी, बहुत अच्छा काम किया था। अच्छा काम लंबे समय तक कई लोगों ने। जुगल काबरा जी नहीं हमारे बीच में है, बहुत शानदार काम उन्होंने किया था। उसके बाद लक्ष्मीनारायण योगानंद जी थे, भंवरलाल पंवार जी थे, अंसारी साहब थे। जब मौका जिनको मिला, उन्होंने अपना प्रयास किया, अच्छे काम करें।
नरेश जी और सलीम जी अभी अभी तक रहे हैं, आज तक रहे हैं, कल तक रहे हैं। मैं समझता हूं कि अधिकांश प्रोग्राम किए, ट्रेनिंग कैंप तक कर दिया यहाँ पर। अच्छे कैंप लगाए यहाँ पर। तो मुझे खुशी है कि जोधपुर में कांग्रेस संगठन मजबूत रहा हमेशा। इस बात का मुझे भी गर्व है।
और मैं उम्मीद करता हूं कि ओंकार वर्मा जी के नेतृत्व में , ये संगठन के आदमी हैं, जमीन से जुड़े हुए हैं। अभी बात करें तो पांच सौ पार्षदों के साथ इनका संपर्क रहा है, क्योंकि चार बोर्ड में रहे हैं मेंबर। नगर परिषद में, नगर निगम में, तो चार तो किसे कहते हैं? इनको सब तरह का अनुभव है, उनका अनुभव काम आएगा।
जोधपुर में कांग्रेस मजबूती से काम करेगी और संघर्ष करेगी।

निकायों के परिसीमन को लेकर अशोक गहलोत ने कहा कि परिसीमन जो हुआ है, वो तो आप देख लीजिए कि दादागिरी है इन लोगों की, पंचायतों में भी और नगर पालिकाओं में भी, नगर परिषद में भी मनमाने ढंग से किया गया है परिसीमन।
चुनाव जीते कैसे बीजेपी, माइनॉरिटी की सीटें कम कैसे हो जाए, वो हथकंडे अपनाए गए हैं। ये बीजेपी के, एनडीए गवर्नमेंट के एजेंडा के अंदर है।
ये सब पूरा देश जानता है, पूरा प्रदेश जानता है। वक्त आने पर इनको सबक मिलेगा, इतना कह सकते हैं।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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