उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल ने सीमेंट निर्माण के सबसे महत्वपूर्ण घटक, क्लिंकर के लदान में सफलता का नया इतिहास रचा है। 2025-26 के शुरुआती 10 महीनों में ही मंडल ने क्लिंकर के लदान से 90 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित करने में सफलता प्राप्त की है।
जोधपुर डीआरएम अनुराग त्रिपाठी ने बताया- यह आय पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में लगभग 53 प्रतिशत अधिक है। रेलवे ने माल लदान के लिए निर्धारित वार्षिक लक्ष्य को न केवल समय से दो महीने पहले प्राप्त किया है, बल्कि उसे बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया है।
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राजस्व की छलांग: रेलवे को मात्र 10 महीनों में 90 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछले साल 2024-25 की तुलना में 31 करोड़ रुपए अधिक है।
लक्ष्य से बड़ा धमाका: जोधपुर मंडल को इस साल 4.64 लाख टन क्लिंकर लदान का लक्ष्य मिला था, जिसके जवाब में जनवरी 2026 तक ही 8.17 लाख टन लदान कर लिया गया, जो लक्ष्य से 73% अधिक है।
रैकों की डबल सेंचुरी: मारवाड़ मूंडवा स्थित गति शक्ति कार्गो टर्मिनल से अब तक 200 रैकों का लदान किया जा चुका है।
उत्तर भारत की कनेक्टिविटी: यहां से क्लिंकर का लदान विशेष रूप से अंबाला, दिल्ली और लखनऊ जैसे औद्योगिक क्षेत्रों की विभिन्न साइडिंग्स के लिए किया गया है।
गति शक्ति टर्मिनल और मारवाड़ मूंडवा का योगदान
डीआरएम त्रिपाठी ने बताया कि मेड़ता रोड-बीकानेर रेलखंड पर स्थित मारवाड़ मूंडवा में मैसर्स अंबुजा सीमेंट लिमिटेड की गति शक्ति कार्गो टर्मिनल साइडिंग से क्लिंकर लदान के सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं।
इसी टर्मिनल की वजह से लदान की गई रैकों की संख्या और राजस्व में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है।
सीनियर डीसीएम हितेश यादव के अनुसार, पिछले साल के मुकाबले इस साइडिंग से 84 अतिरिक्त रैक लोड किए गए हैं, जो रेलवे की परिचालन दक्षता को दर्शाता है।
सीमेंट निर्माण का प्रमुख आधार है क्लिंकर
सीनियर डीसीएम यादव ने क्लिंकर का महत्व समझाते हुए बताया कि यह सीमेंट निर्माण का आधार है, जिसे जिप्सम और अन्य खनिजों के साथ पीसकर मजबूत सीमेंट तैयार की जाती है। इसी क्लिंकर से तैयार सीमेंट का उपयोग देश के बड़े पुलों, बांधों, रेलवे प्रोजेक्ट्स और अन्य आधारभूत ढांचों के निर्माण में किया जा रहा है। वित्त वर्ष के अभी दो माह शेष हैं, जिससे राजस्व के इस आंकड़े में और बड़ी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।





