मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की किसान हितैषी पहलों ने प्रदेश के कृषि क्षेत्र में समृद्धि को अप्रत्याशित रूप से बढ़ाया है। कृषकों की आय में वृद्धि, उत्पादकता में बढ़ोतरी, फसलों के उचित मूल्य, सिंचाई अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण, खाद्य प्रसंस्करण को प्रोत्साहन, कृषि विपणन प्रणालियों में सुधारके लिए राज्य सरकार द्वाराकिए गए विशेष प्रयासों से सुखद परिणाम सामने आए हैं। इसी कड़ी में बजट 2026-27 में कई निर्णायक और दूरगामी प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिससे राजस्थान देश का अग्रणी कृषि राज्य बनेगा।
वर्ष 2026-27 बजट में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए 1 लाख 19 हजार 408 करोड़ 11 लाख रुपये के रिकॉर्ड बजट का प्रावधान किया है।यह राशि गत वर्ष से 7.59 प्रतिशत अधिक है, जो किराज्य सरकार की किसानों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है। बजट में ब्याज मुक्त अल्पकालीन फसली ऋण वितरण योजना के अन्तर्गत 35 लाख से अधिक किसानों को 25 हजार करोड़ रुपये के ऋण वितरण का प्रावधान किया गया है। इसके लिए राज्य सरकार 800 करोड़ रुपये ब्याज अनुदान पर व्यय करेगी। वहीं, दीर्घकालीन सहकारी कृषि एवं नॉन फार्मिंग सेक्टर के लिए 590 करोड़ रुपये का ऋण 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान पर दिया जाएगा। इससे लगभग 26 हजार किसान एवं लघु उद्यमी लाभान्वित होंगे।
डिग्गी, पाइपलाइन और फार्म पॉण्ड के लिए 585 करोड़ से अधिक का अनुदान
खेतों की बुनियादी जरूरतों एवं सुविधाओं पर भी बजट में विशेष ध्यान दिया गया है। लगभग 50 हजार किसानों को विभिन्न कृषि यंत्रों के लिए 160 करोड़ रुपये के अनुदान और 500 कस्टम हायरिंग सेंटर्स स्थापित करने की महत्वपूर्ण घोषणा की है।साथ ही, आगामी वर्ष में 8 हजार डिग्गियों एवं 15 हजार किमी. सिंचाई पाइपलाईन तथा आगामी 2 वर्षों में 36 हजार फार्म पॉण्ड्स के लिए 585 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान दिया जाएगा। इससे 80 हजार से अधिक किसान लाभान्वित होंगे। वहीं, नीलगाय, जंगली जानवरों आदि से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए 50 हजार किसानों को 20 हजार किलोमीटर तारबंदी हेतु 228 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जायेगा। साथ ही, सामुदायिक तारबंदी में कृषकों की न्यूनतम संख्या 10 से घटाकर 7 की गई है।
3 हजार 496 ग्राम पंचायतों में वर्मी कम्पोस्ट इकाइयां होंगी स्थापित
प्रदेश में उन्नत बीज, बायो एजेन्ट्स एवं माइनर मिलेट्स को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आगामी वर्ष में 5 लाख कृषकों को मूंग, एक लाख कृषकों को मोठ तथा एक लाख कृषकों को ज्वार, बाजरा व बरसीम फसल के मिनिकिट वितरित किए जाएंगे। इसी प्रकार,2 लाख 50 हजार से अधिक किसानों को दलहनी एवं तिलहनी फसलों के बीजों का वितरण किया जाएगा। बजट में5 हजार से अधिक आबादी वाली 3 हजार 496 ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध रूप से वर्मी-कम्पोस्ट इकाइयां स्थापित करने का महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है।इसके लिए प्रथम चरण में 2 हजार 98 ग्राम पंचायतों में लगभग 270 करोड़ रुपये से अधिक व्यय किए जाएंगे।
फसलों को जलवायु जोखिम से बचानेके लिए ‘राज कृषि सूचना एवं प्रबंधन प्रणाली’
आधुनिक युग में तकनीक की बढ़ती महत्ता के मद्देनजर इस बजट में किसानों की सहूलियतों के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) केन्द्रित नवाचार के विशेष प्रावधान किए गए हैं। डिजिटल कृषि मिशन के अन्तर्गत ‘राज कृषि सूचना एवं प्रबंधन प्रणाली’ विकसित करने की पहल की गई है। इसके अन्तर्गतएआईएमएल, जीआईएस, रिमोट सेंसिंग एवं सेटेलाइट इमेजरी आदि तकनीकों द्वारा किसानों को जलवायु जोखिम से बचाव, मौसम आधारित बुवाई, फसल स्वास्थ्यकीनिगरानी संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं, प्रदेश के विशिष्ट कृषि उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए मिशन राज गिफ्ट प्रारम्भ किया जायेगा।
मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना में 700 करोड़ रुपये का अनुदान
प्रदेश की डेयरी इकोनॉमी को प्रोत्साहित करने के लिए भी बजट में विशेषप्रावधान किए गए हैं। राजस्थान कॉपरेटिव डेयरी इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट फंड के लिए राशि 1 हजार करोड़ से बढ़ाकर 2 हजार करोड़ रुपये की गई है। वहीं, सरस ब्राण्ड को राष्ट्रीय डेयरी ब्राण्ड के रूप में स्थापित करने के क्रम मेंनेशनल केपिटल रीजन, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में सरस उत्पादों के आउटलेट्स खोलने की घोषणा की गई है। वहीं, मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना के अंतर्गत 5 लाख पशुपालकों को लाभान्वित करने के लिए 700 करोड़ रुपये के अनुदान का प्रावधान किया गया है। विकसित राजस्थान-2047 विजन के क्रम में प्रदेश में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता 200 लाख लीटर प्रतिदिन तथा दुग्ध और दुग्ध उत्पाद बिक्री केन्द्रों की संख्या एक लाख किये जाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
पशुधन क्षेत्र का सकल राज्य मूल्यवर्धन (जीएसवीए) 2.17 लाख करोड़ रुपये
आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों का प्रदेश के सकल राज्य मूल्यवर्धन में 25.74 प्रतिशत का योगदान है। वहीं, पशुधन क्षेत्र का सकल राज्य मूल्यवर्धन 2.17 लाख करोड़ रुपये है, जो कि कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की कुल जीएसवीए का 49.35 प्रतिशत है।इस समीक्षा मेंखरीफ दलहनों का उत्पादन बढ़कर 20.50 लाख मैट्रिक टन (2.34 प्रतिशत वृद्धि) तथा रबी दलहनों का उत्पादन 26.61 लाख मैट्रिक टन (22.34 प्रतिशत वृद्धि) होने का अनुमान है। वहीं, मुख्यमंत्री बीज स्वावलम्बन योजना के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में खरीफ एवं रबी सीजन के दौरान 1.13 लाख क्विंटल के लक्ष्य के मुकाबले 1.12 लाख क्विंटल बीज (लगभग 99 प्रतिशत) वितरित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, नई फसल किस्मोंके भी 31.50 लाख बीज मिनीकिट निःशुल्क वितरित किए गए हैं।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 6 हजार 206 करोड़ रुपये का भुगतान
मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना में 10.63 लाख पशु और 5.54 लाख परिवारों को लाभान्वित किया गया है। साथ ही, राज्य सरकार देशी पशुधन के लिए 100 प्रतिशत प्रीमियम वहन कर रही है और इसमें वर्ष 2025-26 में 42 लाख पशुओं को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, राज सरस सुरक्षा कवच बीमा योजना में दिसंबर 2025 तक 1.12 लाख दूध उत्पादकों को बीमित किया जा चुका है।इसी प्रकार राज्य सरकार ने नमो ड्रोन दीदी योजना के अंतर्गत महिला स्वयं सहायता समूहों को 1 हजार 70 कृषि ड्रोन खरीदने के लिए 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों को लगभग 6 हजार 206 करोड़ रुपये के कुल बीमा दावों का भुगतान किया है।





