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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में एसबीआई-शाखा और बीमा-कंपनी पर एफआईआर:मंत्री के खुलासे के बाद कार्रवाई, फर्जी पॉलिसियों से करोड़ों के क्लेम की साजिश

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने घोटाले का खुलासा किया है। पुलिस ने शनिवार को एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह मामला सालासर स्थित State Bank of India (एसबीआई) की शाखा से जुड़ा है।

फर्जी पॉलिसियों से करोड़ों के क्लेम की साजिश

आरोप है कि सालासर शाखा के शाखा प्रबंधक उमेश कुमार सारस्वत, बैंक कर्मचारी भागीरथ नायक सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों ने एग्रिक्लचर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड़ के अधिकारियों/प्रतिनिधियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी बीमा पॉलिसियां जारी कीं। इन पॉलिसियों के माध्यम से करोड़ों रुपये के बीमा क्लेम की तैयारी की गई।

अस्तित्वहीन जमीन पर कराया गया बीमा

जांच में सामने आया है कि बज्जू तेजपुरा पटवार मंडल और ग्राम बज्जू खालसा (तहसील गजनेर, जिला बीकानेर) के विभिन्न चकों की ऐसी भूमि का बीमा दिखाया गया, जो राजस्व रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं थी।

इन क्षेत्रों में कई चकों की काल्पनिक भूमि को कागजों में दर्शाकर बीमा पॉलिसियां बनाई गईं।

सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। माननीय कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने शुक्रवार को बैंक में छापा मारा था
सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। माननीय कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने शुक्रवार को बैंक में छापा मारा था

राजस्व रिकॉर्ड से नहीं हुआ मिलान

तहसीलदार गजनेर से प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित किसानों के नाम, सर्वे नंबर, मुरब्बा और खसरा नंबरों का मूल राजस्व रिकॉर्ड से कोई मेल नहीं पाया गया।

इसके बावजूद बैंक शाखा द्वारा 71 कथित किसानों के नाम पर फर्जी कृषि भूमि दर्शाकर करीब 13 लाख 51 हजार रुपए किसानों के प्रीमियम के रूप में केंद्र और राज्य सरकार के हिस्से के लगभग 15 लाख 76 हजार 348 रुपए जमा करवाए गए।

इस तरह कुल संभावित क्लेम राशि लगभग 9 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है।

किसानों को नहीं थी बीमा की जानकारी

जिन किसानों के नाम पर बीमा पॉलिसियां जारी की गईं, उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं थी। न तो उनसे कोई दस्तावेज लिए गए और न ही उनकी सहमति प्राप्त की गई।

कई किसानों ने बताया कि उन्होंने कभी फसल बीमा के लिए आवेदन ही नहीं किया था।

आरोप है कि सालासर शाखा के शाखा प्रबंधक उमेश कुमार सारस्वत, बैंक कर्मचारी भागीरथ नायक सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों ने एग्रिक्लचर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड़ के अधिकारियों/प्रतिनिधियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी बीमा पॉलिसियां जारी कीं। इन पॉलिसियों के माध्यम से करोड़ों रुपये के बीमा क्लेम की तैयारी की गई।
आरोप है कि सालासर शाखा के शाखा प्रबंधक उमेश कुमार सारस्वत, बैंक कर्मचारी भागीरथ नायक सहित अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों ने एग्रिक्लचर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड़ के अधिकारियों/प्रतिनिधियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी बीमा पॉलिसियां जारी कीं। इन पॉलिसियों के माध्यम से करोड़ों रुपये के बीमा क्लेम की तैयारी की गई।

गंभीर धाराओं में मामला दर्ज

प्रकरण में गंभीर आपराधिक षड्यंत्र, सरकारी धन की हानि और किसानों से धोखाधड़ी के आरोप पाए गए हैं। थाना सालासर में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

मामले की जांच में राजस्थान पुलिस और संबंधित एजेंसियां जुटी हुई हैं।

अन्य जिलों में भी होगी जांच

सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले के सामने आने के बाद प्रदेश के अन्य जिलों में भी फसल बीमा योजना से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कराई जाएगी।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और दोष सिद्ध होने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और आगे और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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