उदयपुर की मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के एक रिटायर्ड अधिकारी को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 68 लाख रुपये की साइबर ठगी का शिकार बनाया गया। अब पुलिस ने इस मामले में दूसरे आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
साइबर क्राइम डीएसपी विनय चौधरी ने बताया कि आरोपी सुखराम (23), पिता करनाराम, निवासी खींवसर (नागौर) को पकड़ा गया है। इसने अपना बैंक खाता साइबर ठगों को बेचा था। पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर खाता खरीदने वाले एक और आरोपी को नामजद किया गया है, जिसकी तलाश जारी है।
इससे पहले पहले आरोपी यादवेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि जांच के तार जुड़ते जा रहे हैं, और आगे और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

वीडियो कॉल पर फर्जी CBI एएसपी ने धमकाया, जज ने दोषी ठहराया
पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, न्यू केशवनगर निवासी भरत व्यास, जो मोहनलाल सुखाड़िया यूनिवर्सिटी के पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी हैं, और उनकी पत्नी आशा व्यास को ठगों ने व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए फंसाया। फिर कुल 67.90 लाख रुपए हड़प लिए गए। साइबर थाने में दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक 28 दिसंबर 2025 को भरत व्यास के मोबाइल पर एक अज्ञात व्यक्ति का कॉल आया, जिसमें कहा गया कि उनके नाम से शिकायत दर्ज हुई है।
थोड़ी देर बाद व्हाट्सऐप कॉल पर एक व्यक्ति ने खुद को दिल्ली सीबीआई से लक्ष्मण बताते हुए कहा कि उनका मनी लॉन्ड्रिंग केस में नरेश नाम व्यक्ति से 20 लाख का लेनदेन हुआ है। बाद में उसने कहा कि आपसे सीबीआई चीफ बात करेंगे और फिर लक्ष्मण ने ज्वाइंट कॉल में समाधान पंवार जोड़ा, जो खुद को सीबीआई दिल्ली ब्रांच का अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बता रहा था। पंवार ने भरत व उनकी पत्नी से संपत्ति, बैंक बैलेंस, जेवर आदि की जानकारी ली।
फिर फर्जी मजिस्ट्रेट के कॉल से जोड़ा। जिसमें मजिस्ट्रेट बोला-आप मनी लॉन्ड्रिंग में दोषी पाए गए हो। मजिस्ट्रेट ने कहा कि बैंक बैलेंस और जेवरों की कुल 11.90 लाख रुपए की रकम तुरंत कोर्ट के बैंक अकाउंट में जमा कराएं। जिससे आपकी जमानत स्वीकार की जा सके। इस तरह पति-पत्नी पैसा ट्रांसफर करते रहे और खाते खाली हो गए।




