जयपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता कैलाश वर्मा ने कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास द्वारा गौ हत्या के मुद्दे पर दिए गए बयान को दुर्भाग्यपूर्ण, भ्रामक और राजनीतिक अवसरवाद से प्रेरित बताया है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी का इतिहास गौ माता के नाम पर केवल राजनीति करने का रहा है,जबकि व्यवहार में उसने सदैव गौ-संरक्षण की उपेक्षा की है।
बगरू विधायक कैलाश वर्मा ने कहा कि वर्ष 1966 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासनकाल में गोरक्षा की मांग कर रहे साधु-संतों पर गोलियां चलवाई गईं,जिसमें सैकड़ों संतों ने अपने प्राण गंवाए।यह घटना कांग्रेस के इतिहास का काला अध्याय है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि केरल में यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा सार्वजनिक रूप से बछड़े की हत्या कर उसका प्रदर्शन करना कांग्रेस की विचारधारा का घिनौना उदाहरण है।
इसी प्रकार वर्ष 2023 में कर्नाटक की कांग्रेस सरकार के पशुपालन मंत्री के. वेंकटेश द्वारा दिया गया बयान यदि भैंस को काट सकते हैं तो गाय को क्यों नहीं? यह कांग्रेस पार्टी की तुष्टिकरण की मानसिकता को उजागर करती है I
यह केवल कर्नाटक या केरल तक सीमित नहीं है जहां भी कांग्रेस की सरकार होती है वहां गौ तस्करी एवं गौ हत्या की घटनाएं अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाती है।कैलाश वर्मा ने कहा कि राजस्थान में वर्ष 1995 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत के नेतृत्व में गौ हत्या पर सख्त प्रतिबंध का कानून लागू किया गया।वर्ष 2015 में वसुंधरा राजे सरकार ने इसे और अधिक कठोर बनाया।इसके विपरीत 2018 से 2023 के दौरान अशोक गहलोत सरकार ने इन प्रावधानों को कमजोर करने का कार्य किया।उन्होंने विशेष रूप से कांग्रेस शासनकाल में फैली लंपी डिजीज का उल्लेख करते हुए कहा कि उस भयावह दौर में लाखों गायें समय पर उपचार, पर्याप्त वैक्सीन और आवश्यक दवाओं के अभाव में तड़प-तड़प कर मर गईं। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालक अपनी गौ माता को बचाने के लिए प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन प्रभावी टीकाकरण और समुचित चिकित्सा व्यवस्था समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई।कई गौशालाओं में संक्रमित और स्वस्थ गोवंश को अलग रखने की व्यवस्था तक नहीं थी,जिससे संक्रमण बेकाबू होता गया।यह केवल बीमारी नहीं थी, बल्कि कांग्रेस सरकार की घोर लापरवाही और असंवेदनशीलता का परिणाम था।
कैलाश वर्मा ने कहा कि इसके विपरीत भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने गौ-संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। 1,42,781 निराश्रित गोवंश को सड़कों और सार्वजनिक स्थलों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। लगभग 3,174 गौशालाओं को 3,432.74 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई।वर्तमान भजनलाल शर्मा सरकार ने दर्जनों योजनाओं के माध्यम से करोड़ों रुपये गौ-संरक्षण हेतु स्वीकृत कर ठोस कार्य किए हैं।यह हमारी नीयत,नीति और प्रतिबद्धता का प्रमाण है।






