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प्रवर्तन शाखा के मुखिया का प्रस्ताव:3 हजार वर्गकिमी में फैला है जेडीए रीजन, इंस्पेक्टर 8 ही, रोज 60 शिकायतें, फिर कैसे रुके अतिक्रमण

जयपुर शहर में जेडीए रीजन 3 हजार वर्गकिमी क्षेत्र में फैला है, जिस पर अभी तक मात्र 8 इंस्पेक्टर ही लगे हैं। वहीं रोज 50 से 60 शिकायतें मिल रही हैं, ऐसे में अवैध अतिक्रमण रोकना मुश्किल हो रहा है। इसी को लेकर प्रवर्तन शाखा के मुखिया ने अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस थानों को अधिकृत करने का प्रस्ताव जेडीसी को दिया है। उन्होंने कहा है कि जेडीए में अवैध निर्माण इनमें बालकानी, छज्जे निकालने सहित कई शिकायतें अवैध निर्माण और अतिक्रमण की मिलती है, लेकिन प्रवर्तन शाखा में मैन पावर की कमी होने से समय से निस्तारण नहीं हो पा रहा है।

अवैध बिल्डिंग में करोड़ों खर्च लेकिन जुर्माना राशि मामूली होने से डर खत्म

इसके अलावा महानिरीक्षक कैलाश चंद बिश्नोई ने अवैध निर्माण के मामले में पेनल्टी राशि बढ़ाने का भी प्रस्ताव दिया है। अवैध बिल्डिंग में निर्माणकर्ता करोड़ों खर्च करता है, लेकिन धारा 32, 33 के नोटिस पर जुर्माना राशि मामूली है। ऐसे में अधिनियम को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए न्यायालय में प्रस्तुत आरोप पत्र में दण्डित जुर्माना राशि में संशोधन कर बढ़ोतरी की जाए ।

अभी तक 10 पद खाली

बीते 4 महीने से प्रवर्तन शाखा केवल 4 प्रवर्तन निरीक्षकों के भरोसे चल रही थी, हाल में चारों का तबादला कर 8 नए इंस्पेक्टर लगाए हैं। इनमें से केवल 5 इंस्पेक्टरों ने जॉइन किया है और अभी तक 10 पद खाली हैं।

अधिनियम में संशोधन किया जाए

महानिरीक्षक पुलिस कैलाश चन्द्र बिश्नोई ने जेडीसी आनंदी को प्रस्ताव दिया है कि जेडीए रीजन में अवैध निर्माण और सरकारी भूमि पर अवैध अतिक्रमण रोकने के लिए प्रभावी नियंत्रण लागू करने के उद्देश्य से प्रवर्तन शाखा की स्थापना की गई है। जेडीए रीजन में 20 जोन हैं और कई जोन इतने बड़े हैं कि एक जोन को दो विभाजित किया हुआ है। प्रवर्तन शाखा के लिए 18 पुलिस निरीक्षक के स्वीकृत पद होने पर भी काफी कम संख्या में पुलिस निरीक्षक पदस्थापित है। जेडीए रीजन काफी बड़ा होने और स्टाफ की कमी से प्रवर्तन शाखा को अवैध निर्माण/अतिक्रमणों के विरुद्ध कार्रवाई करने में जटिलताओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में जेडीए अधिनियम में अवैध निर्माण/अतिक्रमणों के विरु द्ध जेडीए बिल्डिंग बायलॉज के अनुसार स्थानीय पुलिस थाने को भी कार्रवाई के लिए अधिकृत किया जाए।

Kashish Bohra
Author: Kashish Bohra

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